शराब पीने से पहले जमीन पर क्यों डाली जाती हैं कुछ बूंदें? “लिबेशन” की यह परंपरा आज भी क्यों जिंदा है?

जब लोग शराब पीने बैठते हैं तो आपने भी कभी न कभी किसी न किसी को नोटिस जरूर किया होगा कि वो शराब पीने से पहले गिलास से थोड़ी सी ड्रिंक जमीन पर गिरा देते हैं, क्या आपने कभी सोचा है कि वो लोग ऐसा क्यों करते हैं? जाहिर है कि पहली नजर में किसी को ऐसा करते हुए देखना थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन इसके पीछे सिर्फ आदत नहीं, बल्कि सदियों पुरानी एक परंपरा, मान्यताएं, संस्कृति और एक खास सोच छिपी हुई है.

why liquor poured on floor
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सिर्फ आदत नहीं, एक पुरानी परंपरा है

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शराब पीने से पहले उसकी कुछ बूंद जमीन पर डालना कोई आज का नया ट्रेंड नहीं है. दरअसल, यह एक ऐसी परंपरा है जो अलग-अलग संस्कृतियों में अलग अर्थ लेकर मौजूद रही हैं. इसे कई जगह 'अर्पण' के रूप में देखा जाता है. यानी पीने से किसी अदृश्य शक्ति, प्रकृति या पूर्वजों को सम्मान देना.

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दुनिया में क्यों करते हैं ऐसा?

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दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है. बल्कि यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के कई हिस्सों में भी लोग पीने से पहले कुछ बूंदें जमीन पर गिराते हैं. इस परंपरा को 'लिबेशन' कहा जाता है, जिसमें किसी पेय को धरती पर अर्पित करके सम्मान जताया जाता है. कुछ संस्कृतियों में इसे पूर्वजों को याद करने का तरीका माना जाता है तो कहीं इसे प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक संकेत समझा जाता है.

भारतीय मान्यता के अनुसार ये सुरक्षा और सम्मान का भाव

भारतीय मान्यता के अनुसार ये सुरक्षा और सम्मान का भाव4 / 7

भारत में इस प्रथा को कई लोग आध्यात्मिक नजरिए से भी जोड़ते हैं. मान्यता है कि पहली बूंद किसी रक्षक शक्ति या देवता को समर्पित की जाती है. ताकि नकारात्मक ऊर्जा से बचाव हो सके. कुछ परंपराओं में इसे बाबा भैरव से भी जोड़ा जाता है, जिन्हें रक्षक माना जाता है. तो इसके हिसाब ये यह कोई रस्म नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का भी प्रतीक बन गया है.

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'पहले देना, फिर लेना' की सोच

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अगर गहराई से देखें तो यह परंपरा एक बड़े सिद्धांत को भी दिखाती है- पहले अर्पण, फिर उपभोग. यानी जो भी हमारे पास है उसे सीधे इस्तेमाल करने से पहले उसका एक हिस्सा प्रकृति समाज या किसी बड़ी शक्ति को समर्पित करना. यह सोच हमें याद दिलाती है कि हर चीज सिर्फ हमारे लिए नहीं होती, बल्कि उसका एक हिस्सा साझा भी होता है.

क्या ये नकारात्मकता से जुड़ा है?

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कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि शराब नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकती है इसलिए पहली बूंद जमीन पर डालकर उस प्रभाव को कम करने की कोशिश की जाती है. हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. लेकिन यह विश्वास लोगों के व्यवहार और परंपराओं का हिस्सा जरूर बन चुका है.

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आज भी जिंदा है ये प्रथा

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जब भी लोग शराब पीने बैठते हैं तो आज के समय में भी वह इस प्रथा का पालन करते हैं. यह प्रथा इसलिए भी जिंदा है क्योंकि यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भावना और संस्कृति से जुड़ी है. चाहे आप इसे आस्था मानें या कोई आदत समझें. लेकिन इस तरह की प्रथाएं हमें यह बताती है कि छोटी-छोटी चीजों के भी गहरी और बड़ी कहानियां छिपी होती हैं. डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्रों पर आधारित है, इसे विशेषज्ञ सलाह न मानें. हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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