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हम सभी रोजाना रुपये के नोट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि इन नोटों पर नंबर के साथ कुछ अंग्रेजी अक्षर भी लिखे होते हैं? ज्यादातर लोग इन्हें सामान्य डिजाइन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इनका असली मतलब काफी अहम होता है. ये छोटे-छोटे अक्षर नोट की पहचान, उसकी प्रिंटिंग और सुरक्षा से जुड़े बड़े राज बताते हैं.
नोट पर दिखने वाले अक्षर क्या होते हैं

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रुपये के नोटों पर A, B, C, D जैसे अक्षर आपको सीरियल नंबर के पास दिखाई देते हैं. ये सिर्फ सजावट नहीं होते, बल्कि एक खास कोड होते हैं जो नोट के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं.
ये अक्षर किस काम आते हैं

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इन अक्षरों का मुख्य काम यह बताना होता है कि नोट किस प्रिंटिंग प्रेस में छापा गया है. इससे हर नोट की पहचान अलग-अलग तरीके से की जा सकती है.
भारत में कितनी जगह छपते हैं नोट

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भारत में नोट छापने के लिए कुछ तय सरकारी प्रिंटिंग प्रेस हैं. आम तौर पर पांच बड़े केंद्रों पर नोटों की छपाई होती है, जहां से देशभर में करेंसी भेजी जाती है.
हर अक्षर का अलग मतलब होता है

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हर अक्षर एक खास प्रिंटिंग प्रेस को दर्शाता है. जैसे A देवास (मध्य प्रदेश), B सालबोनी (पश्चिम बंगाल), C मैसूर (कर्नाटक), D होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) और E नासिक (महाराष्ट्र) से जुड़ा होता है.
RBI के लिए क्यों जरूरी है यह सिस्टम

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यह कोडिंग सिस्टम भारतीय रिजर्व बैंक को नोटों की ट्रैकिंग में मदद करता है. अगर कहीं कोई गड़बड़ी या नकली नोट मिलता है, तो इन अक्षरों की मदद से उसकी जांच जल्दी हो जाती है.
एक उदाहरण से समझें

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अगर आपके पास 500 रुपये के नोट पर C लिखा है, तो इसका मतलब है कि वह नोट मैसूर की प्रिंटिंग प्रेस में छपा है. इसी तरह E का मतलब नासिक प्रेस होता है.
सिर्फ अक्षर ही नहीं, और भी हैं सुरक्षा फीचर्स

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नोटों में इन अक्षरों के अलावा भी कई सुरक्षा फीचर्स होते हैं जैसे वॉटरमार्क, सिक्योरिटी थ्रेड, उभरी हुई छपाई और माइक्रो लेटरिंग. ये सभी मिलकर नोट को सुरक्षित बनाते हैं.
समय के साथ सिस्टम हुआ और मजबूत

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पिछले कुछ सालों में नोटों की सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाया गया है. नई सीरीज में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे नकली नोट बनाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है.