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यूएई में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी यानी एंड-ऑफ-सर्विस बेनिफिट बेहद अहम होता है. जानिए UAE में ग्रेच्युटी कैसे कैलकुलेट होती है, किन नियमों पर मिलती है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
UAE में ग्रेच्युटी क्या है?

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यूएई में ग्रेच्युटी एक तरह का एंड-ऑफ-सर्विस बेनिफिट होता है, जो कर्मचारी को नौकरी छोड़ने या कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर दिया जाता है. ये खासतौर पर विदेशी कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है, क्योंकि यहां भारत की तरह पीएफ या पेंशन जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती. इसलिए ग्रेच्युटी को कर्मचारियों की सेविंग और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता है.
कब मिलती है ग्रेच्युटी?

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यूएई में ग्रेच्युटी पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम एक साल तक लगातार नौकरी करना जरूरी होता है. अगर कोई कर्मचारी एक साल पूरा होने से पहले नौकरी छोड़ देता है, तो उसे ग्रेच्युटी का फायदा नहीं मिलता. इसलिए नौकरी की अवधि ग्रेच्युटी के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त मानी जाती है.
सैलरी के किस हिस्से पर होती है केल्युक्लेशन?

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ग्रेच्युटी की केल्युक्लेशन हमेशा कर्मचारी की बेसिक सैलरी के आधार पर की जाती है, ना कि उसकी कुल सैलरी पर. कुल सैलरी में मिलने वाले भत्ते, बोनस और बाकी अलाउंस इसमें शामिल नहीं होते. यही वजह है कि कई बार कर्मचारियों को उम्मीद से कम ग्रेच्युटी मिलती है, क्योंकि वो पूरी सैलरी को आधार मान लेते हैं. अगर कोई कर्मचारी एक साल से ज्यादा लेकिन पांच साल तक नौकरी करता है, तो उसे हर साल के लिए 21 दिनों की बेसिक सैलरी के हिसाब से ग्रेच्युटी दी जाती है. ये नियम यूएई लेबर लॉ के तहत तय किया गया है और ज्यादातर कर्मचारियों पर लागू होता है.
5 साल से ज्यादा नौकरी करने वालों के लिए नियम

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अगर कोई कर्मचारी पांच साल से ज्यादा समय तक एक ही कंपनी में काम करता है, तो उसे ज्यादा ग्रेच्युटी का फायदा मिलता है. पहले पांच साल के लिए 21 दिन की सैलरी प्रति वर्ष के हिसाब से भुगतान होता है, जबकि उसके बाद के हर साल के लिए 30 दिन की बेसिक सैलरी दी जाती है. इससे लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों को ज्यादा फायदा मिलता है.
अधिकतम ग्रेच्युटी कितनी मिल सकती है?

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यूएई के नियमों के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी को मिलने वाली कुल ग्रेच्युटी की एक सीमा तय है. ये अधिकतम दो साल की कुल सैलरी से ज्यादा नहीं हो सकती. यानी चाहे कर्मचारी कितने भी लंबे समय तक काम करे, उसे इससे अधिक ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी.
इस्तीफा देने पर क्या मिलेगा पैसा?

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नए नियमों के तहत अब कर्मचारी अगर खुद इस्तीफा देता है, तब भी उसे ग्रेच्युटी का फायदा मिल सकता है, बशर्ते उसने कम से कम एक साल की सेवा पूरी की हो. पहले के मुकाबले ये नियम अब ज्यादा आसान और कर्मचारियों के हित में बना दिया गया है, जिससे उन्हें नौकरी बदलने पर भी फायदा मिलता है.
किन मामलों में ग्रेच्युटी नहीं मिलती?

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कुछ हालातों में कर्मचारी को ग्रेच्युटी का फायदा नहीं मिलता है. जैसे अगर उसने एक साल पूरा नहीं किया हो या उसे गंभीर अनुशासनहीनता, धोखाधड़ी या कंपनी के नियमों के उल्लंघन के कारण नौकरी से निकाला गया हो. ऐसे मामलों में कंपनी ग्रेच्युटी देने से इनकार कर सकती है.
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