
1 / 5
क्या आप जानते हैं कि सांप की एक मौसी भी है? जी हां, हम सांप की मौसी की ही बात कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं स्किंक की, जिन्हें आम बोलचाल में 'सांप की मौसी' या फिर 'बभनी' भी कहा जाता है. ये एक छिपकलियों की प्रजाति मानी जाती है. देखने में तो बड़ी ही फुर्तीली और चिकनी होती है, इसलिए इसे 'सांप की मौसी' तक कहा जाता है. हालांकि, यह मानव जाति को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाती हैं और लोगों में इन्हें लेकर आम धारणाएं भी हैं. कुछ लोग ये भी मानते हैं कि इन्हें छूने से पैसे मिलते हैं. असल में ये कीड़े खाकर फसल और घरों को नुकसान होने से बचाती हैं. हालांकि इनकी पहचान मुश्किल होने और सांप जैसी दिखने से अक्सर गलतफहमी का शिकार हो जाती हैं.
कहां मिलती हैं 'सांप की मौसी'

2 / 5
स्किंक हमारे इकोसिस्टम के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि ये कीटो की संख्या को संतुलित रखती हैं. भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, ये छोटे, चिकने शरीर वाली चमकदार स्केल्स वाली छिपकलियां हैं. ये विषैली नहीं होती, बल्कि बहुत फुर्तीली, सतर्क और तेज चलने वाली होती हैं. ये मुख्य रूप से छोटे कीड़ों, मकड़ियों और अन्य बिना रीढ़ वाले जीवों का शिकार करती हैं, जिससे इकोसिस्टम को संतुलित रखने में मदद मिलती है.
जहरीली होती है बभनी?

3 / 5
स्किंक पूरे भारत में हर तरह के क्षेत्रों में पाई जाती है. यह रेगिस्तान से से लेकर घने जंगल, हिमालय की तलहटी और तटीय इलाकों तक में भी पाई जाती है. बभनी का घरों, गैरेज, खेल के मैदानों, झीलों के किनारे और खुले मैदानों में पाया जाना आम बात है. ये शरीर से लंबे होते हैं और गर्दन लगभग नहीं दिखती है. कई प्रजातियों में पैर बहुत छोटे या बिल्कुल नहीं होते हैं. इसी वजह से ये रेंगने में सांपों जैसी लगती हैं, जिससे लोग इन्हें जहरीला समझते हैं और इन्हें मार देते हैं. लेकिन असल में ये स्किंक जहरीले नहीं होते हैं और लोगों के लिए किसी तरह का कोई खतरा नहीं पैदा करते हैं.
धरती पर बभनी की कितनी प्रजातियां हैं मौजूद?

4 / 5
क्षेत्रीयता के तौर पर बात करें तो वेस्टर्न घाट में 24 प्रजातियां हैं, जिनमें से 18 एंडेमिक हैं. डेक्कन पेनिनसुलर में 19 प्रजातियां हैं जिनमें से 13 एंडेमिक हैं. पूर्वोत्तर भारत में इनकी 14 प्रजातियां हैं जिसमें से दो एंडेमिक हैं. भारत में स्किंक के 16 जेनेरा हैं, जिसमें से चारी पूरी तरह से एंडेमिक हैं जैसे सेप्सोफिस, बरकुड़िया, कैस्ट्लिया और रिस्टेला.
स्किंक्स ऑफ इंडिया में क्या कुछ?

5 / 5
साल 2020 में जेडएसआई की एक किताब 'स्किंक्स ऑफ इंडिया' छपी थी. जिसमें बताया गया है कि भारत में स्किंक की कुल 62 प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें से लगभग 57 प्रतिशत प्रजातियां एंडेमिक हैं, मतलब ये सिर्फ भारत में ही मिलती हैं और कहीं भी नहीं. दुनिया भर में स्किंक की कुल 1602 प्रजातियां हैं जो छिपकलियों का सबसे बड़ा परिवार है. हालांकि भारत में इनकी हिस्सेदारी वैश्विक विविधता का 4 फीसदी से भी कम है. यह रिपोर्ट जेडएसआई के 16 क्षेत्रीय केंद्रों में चार साल की मेहनत का नतीजा है, जिसमें 4 हजार से ज्यादा नमूनों का अध्ययन किया गया था. इसमें सभी प्रजातियों की पहचान, आदतें, आवास और प्रजनन की जानकारी दी गई है. यह स्किंक पर भारत का पहला ऐसा विस्तृत मोनोग्राफ है.