PM Modi Convoy: PM के काफिले में कौन-कौन सी और कितनी गाड़ियां होती हैं शामिल? जानें किस गाड़ी का क्या होता है रोल

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. आज भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दामों में 3-3 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है. इस बीच पीएम मोदी ने एक बड़ी मिसाल पेश की है. देशवासियों से तेल बचाने की अपील करने के बाद उन्होंने खुद के सुरक्षा काफिले में गाड़ियों की संख्या को आधा करने का निर्देश दिया है.

pm modi carcade
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पीएम और अन्य मंत्रियों ने भी कम की काफिले की गाड़ियां

पीएम और अन्य मंत्रियों ने भी कम की काफिले की गाड़ियां2 / 10

यह कदम न केवल फिजूलखर्ची रोकने वाला है, बल्कि वीवीआईपी कल्चर पर एक कड़ा प्रहार भी है. अब प्रधानमंत्री के साथ-साथ कई केंद्रीय मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपने कारकेड को छोटा करने की तैयारी में हैं. लेकिन इसी क्रम में पहले यह जान लेते हैं कि उनके काफिले में कौन-कौन सी गाड़ियां चलती हैं और हर गाड़ी का क्या रोल है.

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पीएम के काफिले में कटौती

पीएम के काफिले में कटौती3 / 10

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेल की बचत और संसाधनों के सही इस्तेमाल का संदेश देने के लिए अपने सुरक्षा घेरे में बदलाव किया है. उनके इस फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई बड़े नेताओं ने भी अपने काफिले में गाड़ियों को आधा करने की बात कही है. यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट मंडरा रहा है. प्रधानमंत्री का यह निर्देश साफ करता है कि सुरक्षा और मितव्ययिता के बीच संतुलन बनाना संभव है.

क्या है ब्लू बुक के सुरक्षा नियम

क्या है ब्लू बुक के सुरक्षा नियम4 / 10

प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा खाका गृह मंत्रालय की ब्लू बुक में दर्ज होता है. यह एक अत्यंत गोपनीय दस्तावेज है, जिसमें वीवीआईपी की सुरक्षा के हर पहलू का विवरण दिया जाता है. एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) इसी ब्लू बुक के नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री का कारकेड तैयार करती है. इसमें गाड़ियों की संख्या खतरे के स्तर, लोकेशन और कार्यक्रम के स्थल के आधार पर तय की जाती है. प्रधानमंत्री कहीं भी जाएं, उनकी सुरक्षा में तैनात हर अधिकारी और गाड़ी की भूमिका पहले से ही सुनिश्चित होती है.

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इस समय काफिले हैं कितनी गाड़ियां?

इस समय काफिले हैं कितनी गाड़ियां?5 / 10

सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के काफिले में कम से कम 18 मुख्य गाड़ियां होती है. इसके अलावा यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए 6 से 8 अतिरिक्त गाड़ियां भी साथ चलती हैं. कुल मिलाकर लगभग 24 गाड़ियां प्रधानमंत्री की सुरभा को अभेद्य बनाती हैं. इस काफिले में पायलट कार, एस्कॉर्ट वाहन, जैमर गाड़ी और एंबुलेंस जैसे महत्वपूर्ण गाड़ियां शामिल होती हैं. अब इस संख्या को घटाकर सीमित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है.

पीएम का काफिला अभेद्य गाड़ियों का है किला

पीएम का काफिला अभेद्य गाड़ियों का है किला6 / 10

प्रधानमंत्री मोदी के काफिले की सबसे महत्वपूर्ण गाड़ी मर्सिडीज-मेबैक एक 650 गार्ड है. इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित कारों में गिना जाता है और इसे वीआर-10 रेटिंग मिली हुई है. यह कार किसी चलते-फिरते बंकर से कम नहीं है, जिस पर एके-47 की गोलियों और हैंड ग्रेनेड का कोई असर नहीं होता. यदि गाड़ी से महज दो मीटर की दूरी पर 15 किलो टीएनटी का ब्लास्ट भी हो जाए, तो भी अंदर बैठा व्यक्ति सुरक्षित रहता है. गैस हमले की स्थिति में इसमें अलग से ऑक्सीजन सप्लाई की सुविधा भी मौजूद है.

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सुरक्षा का आधुनिक तकनीकी तंत्र

सुरक्षा का आधुनिक तकनीकी तंत्र7 / 10

काफिले में शामिल जैमर गाड़ी का रोल सबसे अहम होता है. इस गाड़ी के ऊपर कई एंटीना लगे होते हैं, जिनका काम आस-पास के रेडियो सिगनल्स को ठप करना होता है, ताकि कोई रिमोट कंट्रोल बम सक्रिय न किया जा सके. इसके अलावा काफिले में रेज रोवर सेंटिनल, टोयोटा लैंड क्रूजर और बीएमडब्ल्यू-7 सीरीज जैसी बख्तरबंद गाड़ियां भी शामिल रहती हैं. एसपीजी के कमांडो इन गाड़ियों में सवार होकर प्रधानमंत्री की मुख्य कार को चारों तरफ से घेरकर चलते हैं.

संसद दौरे पर छोटा कारकेड

संसद दौरे पर छोटा कारकेड8 / 10

जब प्रधानमंत्री संसद भवन जाते हैं, तो उनके काफिले का स्वरूप काफी छोटा होता है. चूंकि संसद परिसर खुद में एक उच्च सुरक्षा वाला क्षेत्र है, इसलिए वहां भारी-भरकम गाड़ियों के लश्कर की आवश्यकता नहीं होती है. हालांकि, छोटा काफिला होने के बावजूद सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाता है. जैमर और अनिवार्य सुरक्षा वाहन तब भी साथ होते हैं, ताकि सुरक्षा घेरा मजबूत बना रहे.

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भ्रम पैदा करने वाली डमी कारें

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सुरक्षा रणनीतियों के तहत प्रधानमंत्री के काफिले में एक जैसी दिखने वाली दो से तीन गाड़ियां चलती हैं. अंतिम समय तक यह गोपनीय रखा जाता है कि प्रधानमंत्री किस गाड़ी में बैठेंगे. यह डिकॉय रणनीति हमलावरों को भ्रमित करने के लिए अपनाई जाती है. अगर प्रधानमंत्री किसी दूसरे राज्य के दौरे पर होते हैं तो वहां की स्थानीय पुलिस की गाड़ियां और स्पेयर कारें भी काफिले का हिस्सा बन जाती हैं, जिसके बाद कुल गाड़ियों की संख्या और बढ़ जाती है.

एम्बुलेंस की व्यवस्था

एम्बुलेंस की व्यवस्था10 / 10

काफिले के साथ हमेशा एक अत्याधुनिक एंबुलेंस चलती है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी आपातकालीन चिकित्सा स्थिति में प्रधानमंत्री को तुरंत उपचार मिल सके. इस एंबुलेंस में तमाम जीवन रक्षक उपकरण और विशेषज्ञ मौजूद होते हैं. प्रधानमंत्री का काफिला सिर्फ गाड़ियों का समूह नहीं, बल्कि एक गतिशील सुरक्षा तंत्र है जो हर तरह के खतरे से निपटने के लिए 24 घंटे तैयार रहता है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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