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Opration Sindoor one year: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि महज कुछ हजार रुपयों का एक छोटा सा ड्रोन, करोड़ों की मिसाइल रक्षा प्रणाली को चुनौती दे सकता है? 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक साल बाद भारत ने इस खतरे का ऐसा समाधान निकाला है कि अब दुश्मन का परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा. जैसलमेर की सीमाओं से लेकर दिल्ली के आसमान तक, भारत ने 'सुदर्शन चक्र' और 'कुशा' जैसी प्रणालियों से एक ऐसा अभेद्य कवच तैयार किया है जो पाकिस्तान के किसी भी नापाक ड्रोन हमले को पलक झपकते ही खाक कर देने में सक्षम है.
ऑपरेशन सिंदूर: क्या हुआ था पिछले साल आज की रात

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ठीक एक साल पहले, 7 मई 2025 को जब भारत ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया, तो जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोनों की बौछार कर दी थी. उस समय जैसलमेर बॉर्डर पर तैनात रहे एक लेफ्टिनेंट कर्नल बताते हैं, "हम जानते थे कि हमला होगा, लेकिन ड्रोनों का झुंड एक नई चुनौती थी. हमारी एस-400 और आकाश मिसाइलों ने उन्हें कुचल दिया, लेकिन उस रात ने हमें सिखाया कि भविष्य की जंग सस्ती और घातक तकनीक से लड़ी जाएगी."
अब मिसाइल नहीं, गोलियां गिराएंगी दुश्मन को

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20 हजार डॉलर के ड्रोन को गिराने के लिए भारतीय सेना अब अपनी पुरानी ZU-23-2 और L-70 जैसी एंटी-एयरक्राफ्ट गन को एआई और आधुनिक रडार से लैस कर रही है. सेना अब 10 किलोवाट के लेजर का उपयोग कर रही है, जो 2 किमी दूर ही ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक्स को जलाकर उसे बेकार कर देता है. भारत ने 5 अतिरिक्त एस-400 स्क्वाड्रन को मंजूरी दी है, जो लंबी दूरी के खतरों के लिए 'यमराज' मानी जाती हैं. मार्च 2026 में 60 यूसीएवी की खरीद को मंजूरी मिली है, जो कावेरी इंजन से लैस हैं और हमला करने में माहिर हैं.
प्रोजेक्ट कुशा: भारत का 'आयरन डोम'

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प्रोजेक्ट कुशा भारत की अपनी 'आयरन डोम' जैसी स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. इसकी रेंज 60 किमी से लेकर 350 किमी तक होगी. यानी दुश्मन के विमान भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही रडार पर होंगे और नष्ट किए जा सकेंगे. इसमें तीन तरह की मिसाइलें शामिल होंगी, जो इसे रूसी S-400 प्रणाली के बराबर या उससे भी बेहतर बनाती हैं. इसके ग्राउंड ट्रायल पूरे हो चुके हैं और 2030 तक इसे पूरी तरह सेना में शामिल करने का लक्ष्य है.
मिशन सुदर्शन चक्र: विशाल एआई-संचालित नेटवर्क

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अगर 'कुशा' भारत की तलवार है तो 'सुदर्शन चक्र' वह दिमाग है जो इसे चलाएगा. अगस्त 2025 में घोषित यह मिशन भारत की वायु रक्षा के लिए 2035 तक का एक मास्टर प्लान है. यह विशाल एआई-संचालित नेटवर्क है. यह रडार, उपग्रहों, मिसाइल प्रणालियों और एंटी-ड्रोन गन्स को एक साथ जोड़ता है. इसका फायदा यह है कि अगर दुश्मन एक साथ सैकड़ों ड्रोन या मिसाइलें दागता है, तो सुदर्शन चक्र का एआई खुद तय करेगा कि किस खतरे को कौन सा हथियार सबसे पहले नष्ट करेगा.