सुदर्शन चक्र Vs कुशा: पाकिस्तानी ड्रोन अगर आज करें भारत पर हमला तो कितना सुरक्षित है हमारा आसमान

Opration Sindoor one year: ऑपरेशन सिंदूर को आज एक साल पूरा हो गया। पिछले साल आज के दिन भारत के सटीक मिसाइल और हवाई हमलों ने पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया, उसके बाद पांच दिन तक सामने से ही अटैक हुए, लेकिन भारत के सुरक्षा सिस्टम के सामने सभी फेल हो गए, उसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के लिए अभूतपूर्व गति से कदम उठाए हैं। जानें, आज कितने तैयार हैं हम?

project kusha and sudarshna chakra
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Photo Credit: Gemini AI

Opration Sindoor one year: क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि महज कुछ हजार रुपयों का एक छोटा सा ड्रोन, करोड़ों की मिसाइल रक्षा प्रणाली को चुनौती दे सकता है? 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक साल बाद भारत ने इस खतरे का ऐसा समाधान निकाला है कि अब दुश्मन का परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा. जैसलमेर की सीमाओं से लेकर दिल्ली के आसमान तक, भारत ने 'सुदर्शन चक्र' और 'कुशा' जैसी प्रणालियों से एक ऐसा अभेद्य कवच तैयार किया है जो पाकिस्तान के किसी भी नापाक ड्रोन हमले को पलक झपकते ही खाक कर देने में सक्षम है.

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ऑपरेशन सिंदूर: क्या हुआ था पिछले साल आज की रात

ऑपरेशन सिंदूर: क्या हुआ था पिछले साल आज की रात2 / 5

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ठीक एक साल पहले, 7 मई 2025 को जब भारत ने सीमा पार आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया, तो जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोनों की बौछार कर दी थी. उस समय जैसलमेर बॉर्डर पर तैनात रहे एक लेफ्टिनेंट कर्नल बताते हैं, "हम जानते थे कि हमला होगा, लेकिन ड्रोनों का झुंड एक नई चुनौती थी. हमारी एस-400 और आकाश मिसाइलों ने उन्हें कुचल दिया, लेकिन उस रात ने हमें सिखाया कि भविष्य की जंग सस्ती और घातक तकनीक से लड़ी जाएगी."

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अब मिसाइल नहीं, गोलियां गिराएंगी दुश्मन को

अब मिसाइल नहीं, गोलियां गिराएंगी दुश्मन को3 / 5

20 हजार डॉलर के ड्रोन को गिराने के लिए भारतीय सेना अब अपनी पुरानी ZU-23-2 और L-70 जैसी एंटी-एयरक्राफ्ट गन को एआई और आधुनिक रडार से लैस कर रही है. सेना अब 10 किलोवाट के लेजर का उपयोग कर रही है, जो 2 किमी दूर ही ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक्स को जलाकर उसे बेकार कर देता है. भारत ने 5 अतिरिक्त एस-400 स्क्वाड्रन को मंजूरी दी है, जो लंबी दूरी के खतरों के लिए 'यमराज' मानी जाती हैं. मार्च 2026 में 60 यूसीएवी की खरीद को मंजूरी मिली है, जो कावेरी इंजन से लैस हैं और हमला करने में माहिर हैं.

प्रोजेक्ट कुशा: भारत का 'आयरन डोम'

प्रोजेक्ट कुशा: भारत का 'आयरन डोम'4 / 5

प्रोजेक्ट कुशा भारत की अपनी 'आयरन डोम' जैसी स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. इसकी रेंज 60 किमी से लेकर 350 किमी तक होगी. यानी दुश्मन के विमान भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही रडार पर होंगे और नष्ट किए जा सकेंगे. इसमें तीन तरह की मिसाइलें शामिल होंगी, जो इसे रूसी S-400 प्रणाली के बराबर या उससे भी बेहतर बनाती हैं. इसके ग्राउंड ट्रायल पूरे हो चुके हैं और 2030 तक इसे पूरी तरह सेना में शामिल करने का लक्ष्य है.

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मिशन सुदर्शन चक्र: विशाल एआई-संचालित नेटवर्क

मिशन सुदर्शन चक्र: विशाल एआई-संचालित नेटवर्क5 / 5

अगर 'कुशा' भारत की तलवार है तो 'सुदर्शन चक्र' वह दिमाग है जो इसे चलाएगा. अगस्त 2025 में घोषित यह मिशन भारत की वायु रक्षा के लिए 2035 तक का एक मास्टर प्लान है. यह विशाल एआई-संचालित नेटवर्क है. यह रडार, उपग्रहों, मिसाइल प्रणालियों और एंटी-ड्रोन गन्स को एक साथ जोड़ता है. इसका फायदा यह है कि अगर दुश्मन एक साथ सैकड़ों ड्रोन या मिसाइलें दागता है, तो सुदर्शन चक्र का एआई खुद तय करेगा कि किस खतरे को कौन सा हथियार सबसे पहले नष्ट करेगा.

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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