क्या न्यूक्लियर बम की भी होती है एक्सपायरी डेट? कितने साल तक रहते हैं 'जिंदा'

Atom bomb expiry date: क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया को दहला देने वाले न्यूक्लियर बम क्या हमेशा के लिए काम करते रहते हैं? या फिर ब्रेड और दवाइयों की तरह इनकी भी कोई एक्सपायरी डेट होती है? जानिए यूरेनियम और प्लूटोनियम की हाफ-लाइफ का वो चौंकाने वाला विज्ञान, जो इन घातक हथियारों को लाखों सालों तक सक्रिय रखता है.

A detailed technical cross-section diagram of an atom bomb, highlighting the nuclear core, high-explosive lenses, and the internal mechanisms that initiate a chain reaction.
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यूरेनियम और प्लूटोनियम का गणित

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बम के अंदर मौजूद प्लूटोनियम-239 की 'हाफ लाइफ' करीब 24,100 साल होती है. यानी इसे अपनी आधी ताकत खोने में भी हजारों साल लग जाते हैं. यूरेनियम-235 तो और भी ज्यादा जिद्दी है! वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे अपनी आधी शक्ति खोने में लाखों साल लग सकते हैं. यही वजह है कि ये हथियार सदियों तक एक्टिव रहते हैं. Photo Credit : AI image

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कैसे होता है महाविस्फोट?

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न्यूक्लियर बम की तबाही न्यूक्लियर फिशन तकनीक पर आधारित है. जब बम के भीतर मौजूद यूरेनियम या प्लूटोनियम के अणुओं पर न्यूट्रॉन की बौछार की जाती है, तो वे टूट जाते हैं. इससे एक 'चेन रिएक्शन' शुरू होती है, जिससे पलक झपकते ही इतनी ऊर्जा निकलती है जो पूरे शहर को राख कर सकती है. Photo Credit : AI image

अपने आप नहीं फटता बम

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भले ही इसके अंदर का मसाला लाखों साल तक सक्रिय रहे, लेकिन परमाणु बम खुद-ब-खुद नहीं फटता. इसे फटने के लिए एक जटिल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, ट्रिगर और डेटोनेटर की जरूरत होती है. हालांकि, बम के अंदर लगे अन्य पुर्जे समय के साथ पुराने हो सकते हैं, जिन्हें मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है. Photo Credit : AI image

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क्या एक्सपायर बम सुरक्षित है?

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नहीं! भले ही बम धमाका न कर पाए, लेकिन उसके अंदर का रेडियोएक्टिव कचरा सालों तक घातक रेडिएशन फैला सकता है, जो पर्यावरण और इंसानों के लिए जानलेवा है. Photo Credit : AI image

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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