
1 / 5
Atom bomb expiry date:दुनिया भर के देशों के पास हजारों की संख्या में न्यूक्लियर वैपन्स मौजूद हैं. न्यूक्लियर बम कभी खराब नहीं होते. इसकी मुख्य वजह इसके अंदर इस्तेमाल होने वाले रेडियोएक्टिव पार्टिकल्स हैं. ये तत्व बहुत ही धीमी गति से अपनी ताकत खोते हैं, जिसे विज्ञान की भाषा में 'हाफ लाइफ' कहा जाता है. यही कारण है कि ये हथियार दशकों तक उतने ही खतरनाक बने रहते हैं जितने वे निर्माण के समय थे. Photo Credit : AI image
यूरेनियम और प्लूटोनियम का गणित

2 / 5
बम के अंदर मौजूद प्लूटोनियम-239 की 'हाफ लाइफ' करीब 24,100 साल होती है. यानी इसे अपनी आधी ताकत खोने में भी हजारों साल लग जाते हैं. यूरेनियम-235 तो और भी ज्यादा जिद्दी है! वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे अपनी आधी शक्ति खोने में लाखों साल लग सकते हैं. यही वजह है कि ये हथियार सदियों तक एक्टिव रहते हैं. Photo Credit : AI image
कैसे होता है महाविस्फोट?

3 / 5
न्यूक्लियर बम की तबाही न्यूक्लियर फिशन तकनीक पर आधारित है. जब बम के भीतर मौजूद यूरेनियम या प्लूटोनियम के अणुओं पर न्यूट्रॉन की बौछार की जाती है, तो वे टूट जाते हैं. इससे एक 'चेन रिएक्शन' शुरू होती है, जिससे पलक झपकते ही इतनी ऊर्जा निकलती है जो पूरे शहर को राख कर सकती है. Photo Credit : AI image
अपने आप नहीं फटता बम

4 / 5
भले ही इसके अंदर का मसाला लाखों साल तक सक्रिय रहे, लेकिन परमाणु बम खुद-ब-खुद नहीं फटता. इसे फटने के लिए एक जटिल इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, ट्रिगर और डेटोनेटर की जरूरत होती है. हालांकि, बम के अंदर लगे अन्य पुर्जे समय के साथ पुराने हो सकते हैं, जिन्हें मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है. Photo Credit : AI image
क्या एक्सपायर बम सुरक्षित है?

5 / 5
नहीं! भले ही बम धमाका न कर पाए, लेकिन उसके अंदर का रेडियोएक्टिव कचरा सालों तक घातक रेडिएशन फैला सकता है, जो पर्यावरण और इंसानों के लिए जानलेवा है. Photo Credit : AI image