24 घंटे ऑन रखनी पड़ती है ये मशीन, 1 मिनट के लिए हुई बंद तो हो जाएगा लाखों का नुकसान; मरीजों की बचाती है जान
अक्सर आपने देखा होगा कि रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेनों के इंजन लगातार चालू रहते हैं, कई लोगों को मन में सवाल उठता है कि इंजन बंद क्यों नहीं किया जाता है. हालांकि इस सवाल का जवाब हम अगली स्टोरी में देंगे, लेकिन आज हम जिस मशीन की बात कर रहे हैं, उसे भी कभी बंद नहीं किया जाता है.

24 घंटे चालू रखना जरूरी
2 / 9MRI मशीन ऐसी तकनीकी संरचना है, जिसे अस्पतालों में लगातार ऑन रखा जाता है, क्योंकि इसे बंद करने पर न सिर्फ तकनीकी खराबी का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि लाखों रुपये का नुकसान भी हो सकता है. इस मशीन का उद्देश्य मरीजों के शरीर के अंदर की छोटी से छोटी गड़बड़ी को भी स्पष्ट रूप से दिखाना है, जो दूसरी तकनीकों से छूट सकती है.
एमआरआई मशीन क्या है?
3 / 9इसीलिए अस्पतालों में इसे ऐसी स्थिति में भी नहीं रोका जाता, जहां सामान्य बायोमेडिकल उपकरणों को बंद करना संभव होता है. एमआरआई यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग एक उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीक है, जो शरीर के अंदरूनी ऊतकों और अंगों की अत्यधिक सटीक तस्वीर बनाती है, बिना किसी रेडिएशन का इस्तेमाल किए.
कैसी समस्या का लगाती है पता?
4 / 9यह एक्स‑रे या सीटी स्कैन की तुलना में नरम ऊतकों, जैसे दिमाग, स्पाइन, मसल्स और रक्त वाहिकाओं की विस्तृत जानकारी देती है, जिससे ट्यूमर, स्ट्रोक, दिमागी रोग और रीढ़ की चोट जैसी गंभीर बीमारियों का सही समय पर पता लगाया जा सके. इसकी वजह से डॉक्टर इलाज की योजना और ऑपरेशन की रणनीति भी बेहतर बना पाते हैं, जिससे मरीजों की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है.
-269 डिग्री पर रखा जाता है ठंडा
5 / 9एमआरआई मशीन के अंदर लगा सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट उसकी सबसे ज़रूरी और महंगी इकाई है, जिसे लगभग -269 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा रखने के लिए तरल हीलियम का इस्तेमाल किया जाता है. इस अत्यंत निचले तापमान पर कुंडली का प्रतिरोध शून्य हो जाता है, जिससे बाहरी बिजली के बिना भी करंट लंबे समय तक लगातार प्रवाहित होता रहता है.
मशीन बंद कर दें तो क्या होगा?
6 / 9अगर इस मशीन को अचानक बंद कर दिया जाए, तो हीलियम तेजी से उबलकर गैस के रूप में बाहर निकल सकता है, जिससे मैग्नेट गर्म हो जाता है और मशीन खराब होने का जोखिम बढ़ जाता है. अगर एमआरआई मशीन को अचानक या गलत तरीके से बंद कर दिया जाए, तो उसकी मरम्मत में लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं, क्योंकि तरल हीलियम का नुकसान भरने की प्रक्रिया बेहद महंगी और तकनीकी रूप से जटिल होती है.
20 से 30 लाख रुपये तक का खर्च
7 / 9इस गैस को फिर से भरने में लगभग 20 से 30 लाख रुपये या उससे भी अधिक का खर्च आ सकता है, जिससे अस्पताल की ऑपरेशनल लागत में भारी वृद्धि होती है. इसके अलावा निकलने वाली हीलियम गैस कमरे में ऑक्सीजन की जगह ले सकती है, जिससे दम घुटने का खतरा भी पैदा हो सकता है, जब तक कि वहां वायंटिलेशन और नियमित निगरानी की व्यवस्था न हो.
कब बंद की जाती है मशीन?
8 / 9एमआरआई मशीन को आमतौर पर हमेशा चालू रखा जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर तीन ही स्थितियों में इसे बंद करने का निर्णय लिया जाता है. पहली स्थिति आपातकाल होती है, जब धातु की चीज या कोई मरीज मशीन के अंदर फंस जाए और जीवन खतरे में हो, तब इसे कंट्रोल करने के लिए 'क्वेंच' कर दिया जाता है.
प्राकृतिक आपदा में क्या करते हैं?
9 / 9दूसरी स्थिति भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदा की होती है, जब इमारत को नुकसान का खतरा हो, और तीसरी स्थिति वह होती है, जब मैग्नेट में खुद कोई तकनीकी खराबी या रखरखाव की ज़रूरत हो. क्वेंच एक नियंत्रित प्रक्रिया है, जिसमें मैग्नेट को बिजली और तरल हीलियम की आपूर्ति धीरे‑धीरे रोका जाता है, ताकि हीलियम को बिना ज़्यादा नुकसान के वापस उपयोग योग्य रूप में रखा जा सके.
