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भारतीय रेलवे के ट्रैक साधारण लोहे से नहीं बल्कि खास हाई-कार्बन मैंगनीज स्टील से बनाए जाते हैं. यही वजह है कि लाखों टन वजन और हर मौसम के बावजूद रेल की पटरियों पर जल्दी जंग नहीं लगता और वो सालों तक मजबूत बनी रहती हैं.
साधारण लोहे की बजाय स्टील क्यों?

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अगर सामान्य लोहा इस्तेमाल किया जाए तो वो जल्दी घिस सकता है और उसमें जंग भी लग सकता है. रेलवे ट्रैक के लिए इस्तेमाल होने वाला स्टील ज्यादा हार्ड, मजबूत और weatherproof होता है. इससे ट्रैक की उम्र कई सालों तक बनी रहती है.
मैंगनीज स्टील की सबसे बड़ी खासियत

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रेलवे ट्रैक में मैंगनीज की मात्रा ज्यादा होने से उनकी मजबूती बढ़ जाती है. ये स्टील लगातार घर्षण और भारी दबाव को सहन कर सकता है. यही वजह है कि रोज हजारों ट्रेनें गुजरने के बावजूद पटरियां जल्दी खराब नहीं होतीं.
पटरियों पर जंग क्यों नहीं लगता?

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रेल की पटरियों पर लगातार ट्रेनें चलती रहती हैं. ट्रेन के पहियों और ट्रैक के बीच होने वाला फ्रिक्शन पटरियों की ऊपरी सतह को साफ रखता है. इससे हल्की जंग की परत अपने आप हट जाती है और ट्रैक चमकदार दिखाई देते हैं.
ट्रैक को खास तकनीक से किया जाता है मजबूत

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रेलवे ट्रैक बनाने के दौरान हीट ट्रीटमेंट, क्वेंचिंग और टेम्परिंग जैसे प्रोसेस अपनाए जाते हैं. इससे स्टील की मजबूती और जंग से बचाव क्षमता काफी बढ़ जाती है. कई जगहों पर प्रोटेक्टिव कोटिंग भी लगाई जाती है.
रेलवे ट्रैक के नीचे क्यों बिछाए जाते हैं पत्थर?

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रेलवे लाइन के नीचे मौजूद पत्थर पानी निकालने और नमी कम करने में मदद करते हैं. इससे ट्रैक के आसपास पानी जमा नहीं होता और पटरियां लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं.
(All Photos Credit: Freepik)