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रत्न शास्त्र एक भारतीय ज्योतिष विज्ञान है, जिसमें व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति का आकलन करने के बाद रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है. इसमें पुखराज यानी येलो सफायर को बहुत ही शक्तिशाली रत्न माना गया है, जिसे धारण करने से मुख्यतौर पर गुरु यानी देवगुरु बृहस्पति ग्रह की स्थिति मजबूत होती है. हालांकि, पुखराज को धारण करने से जुड़े कई नियम भी हैं, जिनके बारे में आप यहां जान पाएंगे.
किस दिन पुखराज पहनना चाहिए?

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गुरुवार के दिन पुखराज को धारण करना शुभ होता है. वहीं, जो लोग शनिवार या रविवार के दिन पुखराज धारण करते हैं, वो इसके नकारात्मक प्रभाव से नहीं बच पाते हैं.
किस धातु में पुखराज पहनना चाहिए?

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सोने की अंगूठी में पुखराज को धारण करना शुभ होता है. यदि किसी कारण से आप सोने की अंगूठी में पुखराज नहीं पहन सकते हैं तो ऐसे में किसी पंडित की सलाह के बाद पंचधातु या पीतल में पुखराज पहन सकते हैं.
किस उंगली में पुखराज पहनना चाहिए?

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रत्न शास्त्र के अनुसार, पुखराज को दाएं यानी सीधे हाथ की तर्जनी उंगली में पहनना शुभ होता है. कहा जाता है कि जो लोग पुखराज को मध्यमा, अनामिका या छोटी उंगली में पहनते हैं, उन्हें इससे लाभ होने की जगह नुकसान होता है.
पुखराज पहनने की विधि

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पुखराज को धारण करने से पहले उसे दूध और गंगाजल से शुद्ध कर लें. अब शुभ दिन में सुबह 6 से 7 बजे के बीच पुखराज पहनें, जिस दौरान 108 बार 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः' मंत्र का जाप करें.
किन राशियों को पुखराज पहनना चाहिए?

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रत्न शास्त्र के अनुसार, गुरु यानी देवगुरु बृहस्पति ग्रह द्वारा शासित धनु और मीन राशि के लोगों के लिए पुखराज धारण करना शुभ होता है. इसके अलावा मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के जातक किसी पंडित की सलाह के बाद येलो सफायर को धारण कर सकते हैं. (All Image Credit- Meta AI & Social Media) (डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी रत्न शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.)