भारत तेल आयात करता है फिर भी निर्यात क्यों कर रहा है? मिडिल ईस्ट युद्ध में समझिए पूरा गणित

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच भारत की तेल नीति चर्चा में है. भारत भारी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों का निर्यात भी करता है. आखिर ऐसा क्यों होता है? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

India Oil Export
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Credit: AI

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भारत आयात पर इतना निर्भर क्यों है?

 भारत आयात पर इतना निर्भर क्यों है?2 / 8

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और यहां ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है. देश में ट्रांसपोर्ट, उद्योग और बिजली प्रोडक्शन के लिए भारी मात्रा में तेल की जरूरत होती है. लेकिन भारत के पास अपने घरेलू तेल भंडार सीमित हैं. इसी वजह से भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85-90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. सऊदी अरब, इराक, यूएई और रूस जैसे देश भारत के प्रमुख सप्लायर हैं. इस आयात निर्भरता का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

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फिर भारत निर्यात कैसे करता है?

फिर भारत निर्यात कैसे करता है?3 / 8

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जब भारत इतना तेल आयात करता है, तो फिर निर्यात कैसे करता है? दरअसल, भारत कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है, जिसे सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इस कच्चे तेल को भारत की रिफाइनरियों में प्रोसेस करके पट्रोल, डीजल, केरोसीन और एटीएफ जैसे फायदेमंद प्रॉडक्ट्स बनाए जाते हैं. इन refined products की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग होती है, इसलिए भारत इन्हें कई देशों को निर्यात करता है. यही वजह है कि भारत कच्चा तेल आयातक होते हुए भी पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट करता है.

रिफाइनरी का रोल क्या है?

रिफाइनरी का रोल क्या है?4 / 8

भारत की ताकत उसकी मजबूत रिफाइनिंग क्षमता है. देश में कई अत्याधुनिक रिफाइनरियां मौजूद हैं, जिनमें गुजरात के जामनगर में मौजूद दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी भी शामिल है. रिफाइनरियां कच्चे तेल को अलग-अलग प्रॉडक्ट्स में बदलती हैं, जैसे पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और जेट फ्यूल. भारत अक्सर सस्ता कच्चा तेल खरीदता है और उसे प्रोसेस करके ज्यादा कीमत पर बेचता है. इससे देश को विदेशी मुद्रा कमाने में मदद मिलती है और ऊर्जा सेक्टर मजबूत होता है.

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मिडिल ईस्ट युद्ध का क्या असर पड़ा?

मिडिल ईस्ट युद्ध का क्या असर पड़ा?5 / 8

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को हिला दिया है. खासतौर पर ईरान और इजरायल के बीच तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा बढ़ गया है. यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता है. अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. इस स्थिति ने भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि सप्लाई बाधित होने से ईंधन महंगा हो सकता है.

भारत ने कैसे किया मुकाबला?

भारत ने कैसे किया मुकाबला?6 / 8

इस संकट से निपटने के लिए भारत ने अपनी तेल खरीद रणनीति में बदलाव किया है. भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना बढ़ा दिया है, जिससे लागत को नियंत्रित किया जा सके. इसके अलावा अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी आयात बढ़ाया गया है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो. यह “डाइवर्सिफिकेशन” रणनीति भारत को वैश्विक संकट के दौरान भी स्थिर बनाए रखने में मदद करती है.

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क्या भारत तेल निर्यात रोक सकता है?

क्या भारत तेल निर्यात रोक सकता है?7 / 8

अगर देश में ईंधन की कमी का खतरा बढ़ता है, तो सरकार निर्यात पर नियंत्रण लगा सकती है. सरकार पहले भी पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा चुकी है ताकि घरेलू बाजार में सप्लाई बनी रहे और कीमतें नियंत्रित रहें. इस तरह सरकार जरूरत के अनुसार आयात-निर्यात संतुलन बनाकर देश के हितों की रक्षा करती है.

क्या भारत के पास पर्याप्त भंडार है?

क्या भारत के पास पर्याप्त भंडार है?8 / 8

भारत ने आपात स्थिति के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) बनाए हुए हैं. ये भंडार देश की लगभग 60 दिनों की जरूरत को पूरा करने में सक्षम हैं, जिससे अचानक सप्लाई रुकने की स्थिति में भी देश संभल सकता है. सरकार इन भंडारों को और बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि भविष्य के संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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