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पश्चिम बंगाल में इस वक्त चुनावी प्रचार जोरों पर हो रहा है. सभी पार्टियां जमकर एक दूसरे पर निशाना साधती हुई दिखाई दे रही हैं. जल्द ही प्रचार का ये दौर थम जाएगा और 4 मई को पश्चिम बंगाल के नतीजे सामने आ जाएंगे. इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बंगाल में जमीन तलाश रही भाजपा के बीच कड़ी टक्कर के कयास लग रहे हैं. हालांकि ममता बनर्जी पर यकीन करने वालों का एक बड़ा तबका है, जो आमतौर पर उनकी व्यक्तिगत खूबियों का बड़े यकीन से बखान करता है. मिसाल के तौर पर CM हमेशा सफेद साड़ी और हवाई चप्पल में दिखती हैं. इस बीच एक और सवाल है जो चर्चा में है. एक ऐसा सवाल जो ममता बनर्जी की निजी जिंदगी से जुड़ा हुआ है और वो है कि ममता बनर्जी ने शादी क्यों नहीं की?
ममता बनर्जी ने आखिर क्यों नहीं की शादी?

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देश में अक्सर यह सवाल उठता है कि ममता बनर्जी ने शादी क्यों नहीं की. दरअसल, ममता बनर्जी समाज के लिए काफी कुछ करना चाहती थी और चाहती हैं. लेकिन वो सामाजिक परंपराओं की विरोधी भी रही हैं. ममता बनर्जी में शुरू से सेवा भाव रहा है. इसी वजह से ममता बनर्जी कभी शादी के बंधन में बंध नहीं पाईं. वो कभी भी ये नहीं चाहती थी कि किसी भी तरह का बंधन उन्हें बांध पाए, वो नहीं चाहती थी कि किसी तरह का बंधन उनके समाज सेवा के आड़े आए. इसलिए भी ममता बनर्जी ने कभी शादी नहीं की.
ममता बनर्जी क्यों पहनती है सफेद साड़ी और चप्पल?

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ममता बनर्जी हमेशा सफेद साड़ी में ही नजर आती हैं. इसके पीछे की कहानी काफी हैरान करने वाली है. दरअसल, जब ममता बनर्जी सिर्फ 9 साल की थी तो उनके पिता का देहांत हो गया था. उनका परिवार गरीबी से जूझ रहा था. इस वजह से कपड़े इकट्ठा या खरीदने का शौक भी ममता बनर्जी में खत्म हो गया. इसके अलावा, ममता बनर्जी हमेशा से ही सादगी भरा जीवन जीना चाहती थी. लिहाजा उन्होंने हमेशा सफेद साड़ी पहनने का फैसला किया. आज भी इतनी संपत्ति होने के बाद भी ममता बनर्जी सिर्फ सफेद और चप्पल में दिखाई देती हैं.
कहां बनती हैं ममता बनर्जी की साड़ियां?

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राजनीति में आने के बाद लंबे समय तक ममता के समर्थक भी इस बारे में बात करते रहे थे. वैसे ममता सफेद साड़ियों पर एकरंगी बॉर्डर वाली जो साड़ियां पहनती हैं, वो बंगाल के ही धानेखाली इलाके की बनी होती हैं. इन साड़ियों की खासियत है कि ये वहां के चिपचिपाहट-भरे मौसम में भी हल्की और आरामदेह होती है.
अपनी सादगी को लेकर जानी जाती हैं 'दीदी'

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ममता बनर्जी के जमीन से जुड़ा होने का एक और प्रमाण ये भी दिया जाता है कि दूसरे राजनेताओं से अलग उनके घर पर आने वाले मेहमानों को शाही भोजन की बजाए, स्थानीय खाना ही परोसा जाता रहा. अक्सर उनके घर आने वालों के सामने चाय और मुरमरे का नाश्ता पेश किया जाता है. खुद ममता बंगाल के खाने से अलग बगैर तेल-मसाले वाला खाना पसंद करती हैं. समर्थकों के बीच ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता ऐसी कई वजहों से अपनी सादगी को लेकर जानी जाती हैं.
हवाई चप्पलों में ही दिखती हैं ममता बनर्जी

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ममता बनर्जी की एक और पहचान उन्हें अलग कतार में खड़ी करती है, वो है उनकी तेज चाल. हवाई चप्पल पहने हुए ममता अक्सर लंबी-लंबी पदयात्राएं करती हैं. जैसे हाल ही में प्रचार के दौरान उन्होंने पदयात्रा का आयोजन करवाया. अपनी सूती साड़ी और फ्लैट चप्पल में वे रैलियों में सबसे आगे तेज और सधे कदमों से चलती हैं, जो कि उन्हें आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी दिखाता है. यही नहीं ममता बनर्जी जब घर से दफ्तर या फिर दूसरी जगहों पर जाती हैं तो उनके साथ गाड़ियों का लंबा-चौड़े काफिला भी दिखाई नहीं देता है.
कहां है ममता बनर्जी का पैतृक घर?

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दक्षिण कोलकाता में ममता का पैतृक निवास हरीश चटर्जी स्ट्रीट में है. यहां का मकान काफी तंग हालत में है और बारिश के दिनों में सड़क पर अक्सर पानी भर जाता है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे समय में कई बार सड़कों पर रखी ईंटों को पार करते हुए ममता को अपने घर में प्रवेश करते देखा गया. सेंट्रल रेलवे में मंत्री रहने के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक बार उनके इस घर गए थे और वहां की हालत देखकर हैरान रह गए थे.