
1 / 6
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे भारत में बिकने वाले बोतलबंद पानी के कारोबार पर दिखने लगा है जिससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ा है.
कीमतें क्यों बढ़ीं?

2 / 6
बिलेरी जैसे बड़े ब्रांड्स ने अपनी कीमतों में करीब 11 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी कर दी है जिससे 12 बोतलों वाला बॉक्स अब 24 रुपये तक महंगा हो गया है. पैकेजिंग मैटेरियल की लागत में पिछले कुछ ही दिनों में 70 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है जिसके कारण एक लीटर पानी की बोतल अब 20 रुपये की मिल रही है.
तेल से क्या नाता?

3 / 6
बोतलबंद पानी के लिए इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की बोतलें कच्चे तेल से बनने वाले पीईटी रेजिन से तैयार की जाती हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से प्लास्टिक की बोतलों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में भारी इजाफा हुआ है जिसके चलते कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं.
क्या है मुश्किल?

4 / 6
बाजार में प्लास्टिक प्रीफॉर्म्स की कीमत 115 रुपये प्रति किलो से बढ़कर अब 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लागत बढ़ने और कच्चे माल की कमी के कारण लगभग 20 प्रतिशत बोतल बनाने वाले प्लांट अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं जिससे बाजार में सप्लाई का संकट खड़ा हो गया है.
असर कितना बड़ा?

5 / 6
भारत के शहरी इलाकों में करीब 15 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 6 प्रतिशत परिवार पीने के पानी के लिए पूरी तरह बोतलबंद पानी पर ही निर्भर हैं. देश में ग्राउंड वाटर के दूषित होने की वजह से लोग साफ पानी के लिए इन बोतलों को खरीदते हैं लेकिन अब बढ़ती कीमतों ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है.
आगे क्या होगा?

6 / 6
प्लास्टिक की बढ़ती कीमतों का असर केवल पानी तक सीमित नहीं है बल्कि यह फूड डिलीवरी, दवाइयों और कॉस्मेटिक्स जैसे अन्य सेक्टर की पैकेजिंग को भी महंगा कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जंग के हालात सामान्य नहीं होते तब तक पैकेजिंग इंडस्ट्री पर यह दबाव बरकरार रहेगा जिससे महंगाई और बढ़ सकती है.