BJP ने बिहार का नया CM सम्राट चौधरी को ही क्यों बनाया? विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव बने उपमुख्यमंत्री
बिहार में नीतीश कुमार के शासनकाल का अंत हो गया है और अब सम्राट चौधरी बिहार पर राज करेंगे। नीतीश कुमार को राज्यसभा में सांसद बनाकर भेज दिया गया है, लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिरी BJP ने सम्राट चौधरी पर ही दांव क्यों खेला, जबकि और भी कई दावेदार रेस में थे, आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं...

बिहार की राजधानी पटना में आज लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह होगा। इसमें प्रदेश राज्यपाल सैयद अता हसनैन सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे। उनके साथ जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (LJP-R), जीतनराम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेताओं को मई में कैबिनेट विस्तार करके मंत्री बनाया जाएगा।
सम्राट चौधरी का 30 साल का राजनीतिक अनुभव
2 / 6बिहार के सियासी गलियारों में चर्चा है कि सम्राट चौधरी को BJP ने यूं ही मुख्यमंत्री नहीं बना दिया। बल्कि इसके पीछे कई वजह हैं। एक वजह तो सम्राट चौधरी का 30 साल का राजनीतिक अनुभव है। दूसरा नीतीश कुमार के साथ उनके मजबूत रिश्ते, तीसरा बिहार के एक बड़े तबके में उनकी मजबूत पकड़, चौथा उनकी प्रशासनिक कामकाज करने-कराने की क्षमता और 5वां बिहार में JDU को हटाकर BJP का पकड़ और वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश, ताकि BJP को सहयोगी दलों पर निर्भर न रहना पड़े।
BJP सहयोगी दलों पर निर्भरता खत्म करना चाहती
3 / 6सम्राट चौधरी RJD, JDU में रहकत राजनीतिक अनुभव लेकर BJP में आए, जहां उनकी राजनीतिक क्षमताएं मजबूत हुईं। इसी अनुभव और मजबूती का फायदा BJP बिहार में उठाना चाहती है। वहीं भारतीय जनता पार्टी अब बिहार में सहयोगी दलों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि अपने चेहरे को सत्ता देकर बिहार को अकेले संभालने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। सम्राट चौधरी 1990 के दशक से राजनीति में एक्टिव हैं। बिहार की राजनीति का हर दौर वे देख चुके हैं और बिहार के सामाजिक, राजनीतिक पहलुओं से अच्छे से वाकिफ हैं।
कुशवाहा समुदाय से कनेक्शन मजबूत सामाजिक साधार
4 / 6सम्राट चौधरी की सबसे बड़ी मजबूती उनका सामाजिक समीकरण है, क्योंकि वे बिहार के कुशवाहा समुदाय से हैं और इस समुदाय की बिहार के वोटबैंक में सबसे बड़ी और अहम हिस्सेदारी है। नीतीश कुमार के कुर्मी समुदाय, अन्य पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के साथ यह समुदाय करीब 60 प्रतिशत वोट बैंक का प्रतनिधित्व करता है। इसलिए BJP ने सम्राट को मुख्यमंत्री बनाकर इस वोटबैंक को साध लिया। साल 2024 से बतौर उपमुख्यमंत्री वे प्रदेश के वित्त, शहरी विकास और पंचायती राज जैसे विभाग संभाल रहे हैं तो उन्हें शासन की बारीकियों का पता है।
नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी के मजबूत संबंध
5 / 6सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की थी। 1999 में राबड़ी देवी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था। फिर वे जनता दल यूनाइटेड (JDU) में आए, जहां उन्होंने नीतीश कुमार के साथ काम किया और साल 2018 में BJP जॉइन करने के बाद वे डिप्टी CM की कुर्सी तक पहुंचे, यानी वे बिहार के तीनों प्रमुख दलों से अनुभव लेने के बाद मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं। साल 2014 में RJD के विधायकों को एक ग्रुप को तोड़कर उसे JDU में जोड़कर उन्होंने अपनी निर्णय लेने की क्षमता को भी साबित किया है।
सम्राट चौधरी निर्णय लेने और रणनीति बदलने में माहिर
6 / 6BJP में सम्राट चौधरी अपने अनुभव के आधार पर पहले प्रदेश अध्यक्ष बने। फिर उपमुख्यमंत्री औन आज वे बिहार में BJP के प्रमुख ओबीसी चेहरों में से एक हैं। सम्राट चौधरी कभी नीतीश कुमार के सबसे बड़े आलोचक थे, लेकिन 2024 से 2026 के बीच गठबंधन की राजनीति में उन्होंने समझदारी दिखाते हुए उन्हीं नीतीश कुमार के साथ बतौर उपमुख्यमंत्री काम किया, यानी वे समय और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलने में भी माहिर हैं। वहीं उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक है। उनके पिता शकुनी चौधरी प्रदेश के वरिष्ठ नेता रहे तो राजनीति विरासत में मिली हुई है।