पाकिस्तानी या भारतीय कौन है ज्यादा बड़ा देशभक्त? सर्वे ने बताया- कितने प्रतिशत लोग युद्ध लड़ने को तैयार

मिडिल ईस्ट संकट के बाद दुनिया पर तीसरे विश्व युद्ध के काले बादल छाए हुए हैं. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग ने विश्व को 3 धड़े में बांट दिया है. एक वो देश हैं जो उस युद्ध की निंदा कर रहे हैं, तो दूसरे कुछ देश सपोर्ट कर रहे हैं. वहीं कई देश इस पर कुछ नहीं बोलना चाहते.

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मिडिल ईस्ट संकट के बाद दुनिया पर तीसरे विश्व युद्ध के काले बादल छाए हुए हैं. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग ने विश्व को 3 धड़े में बांट दिया है. एक वो देश हैं जो उस युद्ध की निंदा कर रहे हैं, तो दूसरे कुछ देश सपोर्ट कर रहे हैं. वहीं कई देश इस पर कुछ नहीं बोलना चाहते.

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सामने आया चौंकाने वाला सर्वे

सामने आया चौंकाने वाला सर्वे2 / 9

इस बीच अगर भारत किसी युद्ध जैसे संकट से घिर जाता है तो ऐसे में कितनी प्रतिशत जनता अपने देश के लिए युद्ध के मैदान में उतरेगी? हाल ही में Gallup International ने इसे लेकर एक सर्वे जारी किया है, जिसमें देशभक्ति की सच्ची तस्वीर पेश की गई है.

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विकासशील देशों में समर्पण अधिक

विकासशील देशों में समर्पण अधिक3 / 9

सर्वे में पता चला है कि विकासशील देशों में लोगों का देश के प्रति समर्पण कहीं ज्यादा गहरा नजर आता है, जबकि विकसित राष्ट्रों में यह भावना अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई देती है. भारत जैसे देशों के लिए ये नतीजे गर्व का विषय हैं, जो बताते हैं कि संकट की घड़ी में लाखों लोग आगे आने को तैयार रहते हैं.

पाकिस्तान में कितनी देशभक्ति?

पाकिस्तान में कितनी देशभक्ति?4 / 9

पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों में 89 प्रतिशत लोग देश पर संकट आने पर युद्ध लड़ने को तैयार हैं. यह आंकड़ा देशभक्ति की गहरी जड़ों को दर्शाता है. सर्वे में लोगों ने बिना हिचकिचाहट अपना समर्थन जताया.

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बांग्लादेश के लोग कितने देशभक्त

बांग्लादेश के लोग कितने देशभक्त5 / 9

बांग्लादेश और अफगानिस्तान में भी 80 प्रतिशत से अधिक लोग इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तत्पर दिखे. इन देशों की जनता ने संकटकाल में एकजुटता का परिचय दिया. Gallup के आंकड़े इस भावना की पुष्टि करते हैं.

चीन में कितने प्रतिशत लोग लड़ेंगे युद्ध?

चीन में कितने प्रतिशत लोग लड़ेंगे युद्ध?6 / 9

चीन में लगभग 70 प्रतिशत नागरिक देश की रक्षा के लिए मैदान में उतरने को तैयार हैं. यह आंकड़ा एशियाई देशों में व्याप्त देशप्रेम को उजागर करता है. सर्वे ने इनकी मजबूत भावनाओं को रेखांकित किया.

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अमेरिका में चौंकाने वाला आंकड़ा

अमेरिका में चौंकाने वाला आंकड़ा7 / 9

अमेरिका जैसे विकसित देश में मात्र 41 प्रतिशत लोग युद्ध के लिए तैयार हैं. आधुनिक जीवनशैली ने यहां देशभक्ति को प्रभावित किया लगता है. यूरोपीय देशों में भी यही ट्रेंड दिखाई देता है.

यूरोपीय देश भी काफी पीछे

यूरोपीय देश भी काफी पीछे8 / 9

कई यूरोपीय राष्ट्रों में औसतन 30 प्रतिशत ही इस तैयारी का इजहार करते हैं. विकास की चकाचौंध में राष्ट्रीय समर्पण पीछे छूट गया है. सर्वे ने इस अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर किया.

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भारत के क्या हैं आकंड़े?

भारत के क्या हैं आकंड़े?9 / 9

भारत में युवा पीढ़ी देश सेवा की भावना से लबरेज है. सेना के प्रति उनका अटूट विश्वास बना हुआ है. संकट में वे सबसे आगे रहने को बेताब रहते हैं. सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने सकारात्मक जवाब दिए, जो देशप्रेम की जीवंतता दिखाते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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