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आज के समय में आमतौर पर हर व्यक्ति यूपीआई के थ्रू ही पेमेंट करता हैत. डिजिटल इंडिया के दौर में यूपीआई सिस्टम ने पेमेंट को बेहद आसान भी बनाया है लेकिन, दूसरी ओर भारतीय करेंसी पर छपी महात्मा गांधी की मुस्कुराती हुई फोटो की अहमियत आज भी उतनी ही है. लेकिन बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि आजादी के तुरंत बाद भारतीय नोटों पर गांधी जी की तस्वीर नहीं छपती थी.

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आज के समय में आमतौर पर हर व्यक्ति यूपीआई के थ्रू ही पेमेंट करता है. डिजिटल इंडिया के दौर में यूपीआई सिस्टम ने पेमेंट को बेहद आसान भी बनाया है लेकिन, दूसरी ओर भारतीय करेंसी पर छपी महात्मा गांधी की मुस्कुराती हुई फोटो की अहमियत आज भी उतनी ही है. लेकिन बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि आजादी के तुरंत बाद भारतीय नोटों पर गांधी जी की तस्वीर नहीं छपती थी.

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मिली जानकारी के अनुसार, उस समय करेंसी पर ब्रिटिश राजा किंग जॉर्ज सिक्स की फोटो छपती थी. यह बदलाव कब हुआ और फिर भारतीय करेंसी पर गांधी जी की तस्वीर क्यों पने लगी और यह फोटो कहां की है... आज इस खबर में हम इसी पर बात करने जा रहे हैं.

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भारत को 1947 में आजादी जरूर मिल गई थी, लेकिन भारतीय करेंसी से ब्रिटिश का प्रभाव तुरंत खत्म नहीं हुआ था. 1947 से 1949 तक नोटों पर किंग जॉर्ज सिक्स की ही तस्वीर छपती रही. वहीं, 1949 में भारतीय करेंसी में बड़ा बदलाव हुआ. एक रुपये के नोट से किंग जॉर्ज की तस्वीर हटा दी गई और उसकी जग सारनाथ के अशोक स्तंभ यानी लायन कैपिटल को इसमें शामिल किया गया. इसी अवधि में यह प्रस्ताव भी आया कि नोटों महात्मा गांधी की तस्वीर छापी जाए, जिसका डिजाइन भी तैयार था, लेकिन अंत में सरकार ने अशोक स्तंभ को ही फाइनल किया क्योंकि वह भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक था.

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वहीं, इसके बाद महात्मा गांधी की तस्वीर भारतीय नोटों पर पहली बार 1969 में दिखाई दी. यह वर्ष गांधी जी की जन्म शताब्दी का था और इसी मौके पर एक स्पेशल कमेमोरेटिव सीरीज जारी की गई. इस सीरीज में गांधी जी की तस्वीर के पीछे सेवाग्राम आश्रम का बैकग्राउंड था. हालांकि यह नियमित करेंसी का हिस्सा नहीं बनी और सीमित अवधि के लिए ही जारी की गई.

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1978 की नोटबंदी के बाद भारतीय नोटों की डिजाइनिंग में बदलाव आया था. बता दें कि नए नोटों पर भारतीय संस्कृति से जुड़े कई प्रतीकों को भी इसमें शामिल किया गया. जिसमें कोणार्क व्हील, मोर और अन्य राष्ट्रीय चिन्ह इसी दौर में नोटों में छपे थे. इसके बाद 1987 में पहली बार 500 का नोट जारी हुआ था. इस नोट पर गांधी जी की तस्वीर छपी थी, लेकिन वॉटरमार्क अभी भी अशोक स्तंभ ही था.