Bank Locker Rules: बैंक लॉकर में चोरी या नुकसान होने पर मुआवजे का क्या है नियम? यहां जानें अकांउट होल्डर्स

बैंक लॉकर में रखा कीमती सामान और गहने चोरी हो जाएं या किसी और तरह का नुकसान हो जाए तो बैंक मुआवजा देते हैं। यह जानकार देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दी और बैंक लॉकर के नुकसान पर मुआवजे को लेकर स्थिति साफ की है।

Bank Locker
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बैंक लॉकर में लोग अपने गहने, कीमती सामान, सीक्रेट डॉक्यूमेंट आदि रखते हैं, लेकिन वे उनकी सुरक्षा को लेकर भी अकसर चिंतित नजर आते हैं, लेकिन टेंशन न लें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक जानकारी दी है, जिसके बारे में शायद ही लोग जानते हों। उन्होंने बताया है कि  बताया कि अगर बैंक लॉकर में रखे सामान को नुकसान पहुंचता है तो इसके लिए बैंक जिम्मेदार होता है।

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किराये का 100 गुना ज्यादा मुआवजा देगा बैंक

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वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि बैंक लॉकर में रखे सामान का नुकसान होने पर बैंक मुआवजा देते हैं और यह मुआवजा सालाना किराये का 100 गुना होता है, यानी अगर आप बैंक लॉकर के लिए साल में 3000 रुपये किराया देते हैं तो नुकसान होने पर बैंक आपको 3 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए बाध्य है। यह नियम सरकार की ओर से बनाया गया है, ताकि नुकसान की भरपाई पारदर्शी तरीके से हो।

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बैंक को सामान की जानकारी का अधिकार नहीं

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वित्त मंत्री ने लोकसभा में बताया कि बैंकों को RBI के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत काम करना होता है। किसी भी तरह की कोताही बरतने पर या ग्राहक का नुकसान होने पर मुआवजा भी उन्हीं से भरवाया जाता है। ग्राहक ने बैंक लॉकर में क्या रखा है, यह जानने का अधिकार बैंकों को नहीं है। बल्कि सिर्फ ग्राहक को पता होगा, यानी यह जानकारी पूरी तरह से गोपनीय यानी कॉन्फिडेंशियल होती है।

ग्राहक की प्राइवेसी में दखल नहीं दे सकते बैंक

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि अगर बैंक लॉकर में रखे गए कीमती सामान की लिस्ट मांगते हैं या सामान की कीमत पूछते हैं तो यह बैंक ग्राहक की प्राइवेसी में दखल होगा, जिसकी शिकायत देने पर बैंक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। यही वजह है कि बैंक लॉकर में रखे गए सामान की बैंक मैनेजमेंट न तो असेसमेंट करता है और न ही जानकारी लेने की इच्छा जताता है।

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बैंक लॉकर के सामान का इंश्योरेंस संभव नहीं

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी दी कि लॉकर में रखी गई हर चीज की वैल्यूएशन करना और उसका इंश्योरेंस करवाना संभव नहीं है, लेकिन अगर ग्राहक चाहे कि उसे उसके सामान के बराबर मुआवजा मिले तो उसे बैंक को लॉकर में रखे सामान की जानकारी देनी होगी। लेकिन मौजूदा बैंकिंग कानून इसकी इजाजत नहीं देते, इसलिए सरकार ने एक स्टैंडर्ड फॉर्मला बनाकर मुआवजे का नियम लागू किया है, जो देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों पर लागू होता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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