प्रतीक यादव को लेकर बड़ा खुलासा, बीमारी के कारण डिप्रेशन में थे अपर्णा यादव के पति, पढ़ें डॉक्टर ने क्या-क्या बताया?

अखिलेश यादव के भाई और अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव डिप्रेशन से जूझ रहे थे, जो बीमारी के कारण था। यह खुलासा प्रतीक यादव की डॉक्टर ने किया, जो 5 साल से उनकी DVT यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस नामक बीमारी का इलाज कर रही थी। नाम रिवील न करने की शर्त पर डॉक्टर ने प्रतीक की हालत के बारे में विस्तार से बताया।

Prateek Yadav
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डॉक्टर ने बताया प्रतीक उनके पास करीब 5 साल पहले सीने में दर्द और सांस फूलने की शिकायत लेकर आए थे। देखने वे फिट और हेल्दी थे, लेकिन जब टेस्ट किए तो नसों में खून के थक्के जमने की बीमारी पता चली। इसी बीमारी को DVT यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस कहते हैं। इसमें पहले पैरों में खून के थक्के जमते हैं, जो फिर पूरे शरीर में बनने लगते हैं। इसी बीमारी ने प्रतीक को डिप्रेशन में पहुंचा दिया था।

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फेफड़ों तक पहुंच गए थे खून के थक्के

फेफड़ों तक पहुंच गए थे खून के थक्के2 / 5

डॉक्टर ने बताया कि DVT की बीमारी कंट्रोल की जा सकती है, लेकिन अगर खून के थक्के फेफड़ों तक पहुंच जाएं। फेफड़ों तक पहुंचाने पर बीमारी पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा बीमारी बन जाती है। इसलिए प्रतीक लंबे समय से ब्लड थिनर यानी खून पतला करने की दवाई ले रहे थे। प्रतीक लगातार चेकअप कराते थे और दवाइयां भी रेगुलर लेते थे। 5 साल से इलाज चल रहा था, लेकिन इस बीमारी ने उनकी जान ले ली।

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29 मई को गंभीर हालत में पहुंचे अस्पताल

29 मई को गंभीर हालत में पहुंचे अस्पताल3 / 5

डॉक्टर ने बताया कि 29 अप्रैल को प्रतीक अचानक अस्पताल पहुंचे। उनकी हालत बेहद खराब थी। प्रतीक के सीने में दर्द था और सांस फूल रही थी। उन्हें चक्कर भी आ रहे थे तो तुरंत ICU में भर्ती किया। उनकी हालत में सुधार होने लगा कि एक मई को प्रतीक बोले कि वे घर जाना चाहते हैं। डॉक्टरों ने हालत नॉर्मल न होने की बात कहते हुए डिस्चार्ज से मना किया तो वह जिद करने लगे। उन्होंने प्रतीक से कहा कि अस्पताल और डॉक्टर की मर्जी के बिना जाना डिस्चार्ज नहीं LAMA कहलाता है, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी पर घर जाने की बात कहने लगे। यह भी पढ़ें: प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के 5 नए खुलासे; जानें कितनी थीं चोटें, कैसे हुई मौत और क्या कहता है परिवार?

बीमारी ने डिप्रेशन में पहुंचा दिया

बीमारी ने डिप्रेशन में पहुंचा दिया4 / 5

डॉक्टर ने बताया कि प्रतीक को उनकी हालत के बारे में साफ-साफ बता दिया गया था। उन्हें कहा गया था कि अगर इलाज रोका गया तो जान जा सकती है, लेकिन प्रतीक जिद पर अड़े रहे। शायद ICU के माहौल ने उन्हें डिप्रेशन में डाल दिया था। मशीनों की आवाज, नर्सिंग स्टाफ की आवाजाही, दवाइयों की दुर्गंध से उन्हें घुटन होने लगी थी। इसलिए वे घर जाना चाहते थे और पत्नी-बच्चों के साथ रहना चाहते थे। काफी समझाने पर भी नहीं माने तो डॉक्यूमेंट साइन करके वे अस्पताल से निकल गए।

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24 घंटे के लिए नर्सिंग स्टाफ तैनात रहा

24 घंटे के लिए नर्सिंग स्टाफ तैनात रहा5 / 5

डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल से जाने के बाद भी प्रतीक यादव की इलाज जारी रहा। पत्नी अपर्णा यादव ने घर पर 3 नर्सिंग स्टाफ को 24 घंटे के लिए तैनात कराया था। नर्सिंग स्टाफ लगातार डॉक्टर के संपर्क में थीं। प्रतीक से 3 मई को सीधी बात भी हुई थी। फिर अचानक पता चला कि 13 मई 2026 की सुबह 5 बजकर 55 मिनट पर प्रतीक बेहोशी की हालत में मिले और इससे पहले की नर्सिंग स्टाफ कुछ कर पाता, उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल में ले जाया गया, जहां प्रतीक यादव को मृत घोषित कर दिया गया। यह भी पढ़ें: प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई सामने, जानें कैसे हुई अखिलेश यादव के भाई की मौत?

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

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खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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