भारत में यहां बहती है देश की सबसे छोटी नदी, लंबाई सिर्फ 45 किमी; सूखने के बाद हुआ पुनर्जन्म

भारत में नदियों का जाल है, ये वो देश है जहां प्रकृति की बड़ी अनुकंपा है. जी हां, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि भारतीय उपमहाद्वीप पर आपको हर तरह का मौसम देखने को मिलता है. यहां गंगा समेत कई पवित्र और बड़ी नदियां बहती हैं, जो हजारों किलोमीटर तक लोगों की प्यास और भूख मिटाती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि भारत की सबसे छोटी नदी कौन सी है और कहां बहती है?

Arvari river shortest India
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कहां है भारत की सबसे छोटी नदी?

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आपको जानकर अचंभा होगा कि राजस्थान के अलवर जिले में बहने वाली अरवरी नदी देश की सबसे छोटी नदी है. अरवरी नदी का उद्गम अलवर जिले के थानागाजी ब्लॉक के भानेटा गांव के पास अरावली पहाड़ियों से होता है. यह शुष्क इलाके से होकर सरस गांव के निकट साहिबी नदी में विलीन हो जाती है.

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कितनी लंबी है अरवरी नदी?

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अरवरी नदी की कुल लंबाई 45 किलोमीटर और बेसिन क्षेत्र 492 वर्ग किलोमीटर है. 1960 के दशक से वनों की अंधाधुंध कटाई और भूजल दोहन के कारण अरवरी नदी करीब 60 वर्षों तक पूरी तरह सूख गई. इससे इलाके के कुएं लुप्त हो गए, खेती चौपट पड़ गई और ग्रामीण पलायन को मजबूर हो गए. यह राजस्थान के जल संकट का जीता-जागता प्रतीक बन चुकी थी.

कैसे हुआ नदी का पुनर्जन्म?

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1980 के अंत में तरुण भारत संघ नामक एनजीओ ने ग्रामीणों के साथ मिलकर पुनरुद्धार अभियान शुरू किया. उन्होंने सरकारी मदद के बिना अपने श्रम से जोहड़ बनाए, जो पारंपरिक जल संचयन संरचनाएं हैं. इन प्रयासों ने नदी को नया जीवन प्रदान किया.

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नदी में लौटने लगा पानी

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जोहड़ तकनीक से वर्षा जल को रोका गया, जो धीरे-धीरे भूमिगत जलस्तर बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई. 1990 तक नदी में पानी लौटने लगा और 1995 तक यह पूर्ण रूप से बहने लगी. आज यह शुष्क क्षेत्र में वर्ष भर कलकल बहती रहती है.

'अरवरी नदी संसद' का गठन

'अरवरी नदी संसद' का गठन6 / 8

अरवरी के पुनर्जीवन के बाद ग्रामीणों ने अनोखी 'अरवरी नदी संसद' का गठन किया, जो भारत की पहली सामुदायिक जल प्रबंधन संस्था है. इसमें आसपास के 70 गांवों के प्रतिनिधि वार्षिक बैठकें करते हैं. यहां पानी उपयोग, मछली पालन और प्रदूषण रोकथाम के नियम तय होते हैं.

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नदी की वजह से इलाके में लौटी जिंदगी

नदी की वजह से इलाके में लौटी जिंदगी7 / 8

नदी के बहने से इलाके में हरियाली लौट आई, बंजर खेतों में गेहूं-सरसों की फसलें लहलहाने लगीं. जैव विविधता में भी वृद्धि हुई, मछलियां और पक्षी वापस लौट आए. ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई और पलायन रुक गया. अरवरी नदी अब वैश्विक जल संरक्षण का मॉडल बन चुकी है, जहां पर्यावरणविद और छात्र सीखने आते हैं.

नदियों के संरक्षण के लिए रोडमैप

नदियों के संरक्षण के लिए रोडमैप8 / 8

राजेंद्र सिंह जैसे जल योद्धाओं के नेतृत्व में शुरू हुए इस अभियान ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक चुनौतियों से जोड़ा. अरवरी की सफलता अन्य नदियों के संरक्षण के लिए रोडमैप प्रदान करती है. यह प्रकृति संरक्षण में मानव भूमिका की मिसाल कायम करती है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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