Schizophrenia Sympytoms: सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें व्यक्ति के सोचने, समझने, महसूस करने और व्यवहार करने के तरीके पर असर पड़ता है. इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को कई बार असली और काल्पनिक चीजों में फर्क करना मुश्किल हो जाता है. आमतौर पर लोग इसे पागलप समझ लेते हैं, लेकिन सच यह है कि यह एक मेडिकल कंडीशन है जिसका सही समय पर इलाज और देखभाल बेहद जरूरी होती है. सिजोफ्रेनिया किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण ज्यादातर किशोरावस्था के बाद या युवावस्था में दिखाई देने लगते हैं. अगर शुरुआत में ही इसके संकेत पहचान लिए जाएं तो मरीज को बेहतर इलाज और सपोर्ट मिल सकता है.
लोगों से दूरी बनाना

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सिजोफ्रेनिया का एक शुरुआती संकेत यह हो सकता है कि व्यक्ति अचानक परिवार और दोस्तों से दूर रहने लगे. वह अकेले रहना पसंद करने लगता है और सोशल एक्टिविटीज में रुचि कम हो जाती है.
सोच और व्यवहार में बदलाव

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मरीज की बातों और व्यवहार में अजीब बदलाव दिख सकते हैं. वह ऐसी बातें कह सकता है जिनका कोई मतलब न हो या बार-बार विषय बदल सकता है. कई बार उसकी सोच वास्तविकता से अलग लगने लगती है.
शक और डर बढ़ना

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कुछ लोगों को ऐसा लगने लगता है कि कोई उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहता है या उन पर नजर रख रहा है. जरूरत से ज्यादा शक करना भी इसका शुरुआती लक्षण हो सकता है.
आवाजें सुनाई देना

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सिजोफ्रेनिया से पीड़ित कई लोगों को ऐसी आवाजें सुनाई देती हैं जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं यह बीमारी का सबसे आम और गंभीर संकेत माना जाता है.
भावनाओं का कम दिखना

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व्यक्ति का चेहरा भावहीन लग सकता है. वह खुशी, दुख या गुस्से जैसी भावनाएं सामान्य तरीके से व्यक्त नहीं कर पाता. कई बार उसकी आवाज भी सपाट लगने लगती है.
ध्यान लगाने में परेशानी

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सिजोफ्रेनिया के शुरुआती चरण में व्यक्ति को पढ़ाई, काम या सामान्य बातचीत में ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत हो सकती है. उसकी याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.
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