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Kaan Ki Safai Kyu Nahi Karni Chahiye: कई लोग कान में जमा मैल यानी ईयर वैक्स को गंदगी समझकर खुद ही साफ करने लगते हैं. इसके लिए लोग कॉटन बड्स, हेयरपिन, माचिस की तीली या दूसरी नुकीली चीजों का इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन ऐसा करना कानों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक कान का मैल पूरी तरह बेकार नहीं होता, बल्कि यह कानों को धूल, बैक्टीरिया और इंफेक्शन से बचाने में मदद करता है.
क्यों नहीं करनी चाहिए खुद से सफाई?

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कॉटन बड्स या नुकीली चीजों से कान साफ करने पर मैल बाहर निकलने के बजाय और अंदर जा सकता है. इससे कान में दर्द, इंफेक्शन, सुनने में दिक्कत या सूजन हो सकती है.
क्या है इरिगेशन क्लीनिंग?

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इरिगेशन एक प्रोफेशनल तकनीक है, जिसमें हल्के गुनगुने पानी या सलाइन वॉटर की मदद से कान के मैल को धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता है.
इरिगेशन से मिलने वाले फायदे

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जब कान में ज्यादा मैल हो जाता है तो निकालने में परेशानी हो जाती है. इसलिए इरिगेशन के जरिए कान की सफाई की जाती है. हालांकि, यह प्रक्रिया सिर्फ एक्सपर्ट की निगरानी में ही करानी चाहिए.
कब होती है सफाई की जरूरत?

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कान में बहुत मैल होना नॉर्मल है. शरीर के इस अंग का खुद का एक प्राकृतिक तंत्र मौजूद है, जो मैल को अपने आप साफ कर देता है. ज्यादा मैल के आने से सफाई की जरूरत होती है.
क्या होती है सक्शन क्लीनिंग?

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सक्शन क्लीनिंग में डॉक्टर एक छोटी मेडिकल मशीन की मदद से कान का मैल खींचकर बाहर निकालते हैं. यह तरीका काफी आधुनिक और सुरक्षित माना जाता है.
कान की सफाई में न करें ये गलती

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घर पर सफाई के दौरान अक्सर लोग ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिससे ईयर डैमेज हो जाता है. कानों को साफ करने के लिए कॉटन बड्स, हेयरपिन, चाबी या किसी नुकीली चीज का इस्तेमाल करना है.