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Tongue Cancer Surgery: जीभ का कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो जीभ से शुरू होता है. इसे ओरल कैंसर और माउथ कैंसर की कैटेगरी में रखा जाता है. यह कैंसर 2 तरह का होता है, पहला जीभ के ऊपर होने वाला कैंसर और दूसरा जीभ के आधार पर होने वाला कैंसर जिसे ओरोफेरिंजियल कैंसर भी कहते हैं. जीभ का कैंसर (Jeebh Me Cancer) होने पर मरीज के मन में सबसे बड़ा सवाल आता है कि क्या कैंसर के कारण जीभ काट दी जाती है या नहीं. ऐसे में यहां जानिए जीभ के कैंसर का ट्रीटमेंट कैसे होता है.
जीभ के कैंसर में जीभ काटी जाती है या नहीं

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जीभ के कैंसर में जीभ काटने की जरूरत पड़ सकती है. लेकिन, जीभ तब काटी जाती है जब कैंसर की स्टेज एडवांस हो जाती है और ट्यूमर बड़ा हो जाता है. कैंसर छोटा होता है तो कैंसर वाले हिस्से को काटकर निकाल दिया जाता है लेकिन अगर कैंसर बढ़ जाए तो जीभ का बड़ा हिस्सा काटकर निकाला जाता है.
क्या जीभ काटने के बाद नई जीभ लगाई जाती है

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जीभ के कैंसर की सर्जरी के बाद जीभ काटकर निकाल दी जाती है. इसके बाद रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जाती है. इसमें मरीज के शरीर के दूसरे हिस्से से मांस या त्वचा का टुकड़ा निकालकर उससे नई जीभ की संरचना तैयार की जाती है और खून की नसों को सर्जरी करके जोड़ दिया जाता है.
क्या जीभ के कैंसर की सर्जरी के बाद मरीज बोल या खा पाता है

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जीभ का कुछ हिस्सा निकाला जाता है तो मरीज स्पीच थेरैपी के बाद सामान्य तरह से बोलने लगता है. लेकिन, पूरी जीभ निकालने के बाद आवाज बदल जाती है और ट्रेनिंग के बाद ही मरीज बोल पाता है. वहीं, सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को लिक्विड डाइट दी जाती है. नई जीभ स्वाद नहीं पहचान पाती लेकिन खाना निगलने में मदद करती है.
जीभ के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं

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जीभ पर लंबे समय तक छाला निकले रहना, जीभ की रंगत में प्रभाव दिखना, दर्द होना, जीभ का सूज जाना, कुछ भी खाने या निगलने में दिक्कत होना और आवाज में बदलाव होना जीभ के कैंसर के शुरुआती लक्षणों में शामिल है.
जीभ का कैंसर होने के क्या कारण हैं

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तंबाकू या धूम्रपान के कारण जीभ का कैंसर हो सकता है. इसके अलावा एचपीवी वायरस और खराब ओरल हाइजीन ना रखने के कारण जीभ का कैंसर हो सकता है.
जीभ के कैंसर की जांच कैसे होती है

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जीभ का कैंसर है या नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए बायोप्सी की जाती है जिसमें जीभ के टुकड़े का सैंपल लेकर कैंसर की पुष्टि होती है. इसके अलावा इमेजिंग टेस्ट जैसे सीटी स्कैन या एमआरआई से जांच की जाती है.