क्या कैंसर में जीभ काट दी जाती है? जानिए Tongue Cancer ट्रीटमेंट कैसे होता है

Tongue Cancer Treatment: जीभ का कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसके लक्षण समय रहते पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. ऐसे में यहां जानिए जीभ का कैंसर हो जाए तो जीभ काटी जाती है या नहीं.

Tongue cancer treatment
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Tongue cancer treatment

Tongue Cancer Surgery: जीभ का कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो जीभ से शुरू होता है. इसे ओरल कैंसर और माउथ कैंसर की कैटेगरी में रखा जाता है. यह कैंसर 2 तरह का होता है, पहला जीभ के ऊपर होने वाला कैंसर और दूसरा जीभ के आधार पर होने वाला कैंसर जिसे ओरोफेरिंजियल कैंसर भी कहते हैं. जीभ का कैंसर (Jeebh Me Cancer) होने पर मरीज के मन में सबसे बड़ा सवाल आता है कि क्या कैंसर के कारण जीभ काट दी जाती है या नहीं. ऐसे में यहां जानिए जीभ के कैंसर का ट्रीटमेंट कैसे होता है.

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जीभ के कैंसर में जीभ काटी जाती है या नहीं

जीभ के कैंसर में जीभ काटी जाती है या नहीं2 / 7

जीभ के कैंसर में जीभ काटने की जरूरत पड़ सकती है. लेकिन, जीभ तब काटी जाती है जब कैंसर की स्टेज एडवांस हो जाती है और ट्यूमर बड़ा हो जाता है. कैंसर छोटा होता है तो कैंसर वाले हिस्से को काटकर निकाल दिया जाता है लेकिन अगर कैंसर बढ़ जाए तो जीभ का बड़ा हिस्सा काटकर निकाला जाता है.

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क्या जीभ काटने के बाद नई जीभ लगाई जाती है

क्या जीभ काटने के बाद नई जीभ लगाई जाती है3 / 7

जीभ के कैंसर की सर्जरी के बाद जीभ काटकर निकाल दी जाती है. इसके बाद रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की जाती है. इसमें मरीज के शरीर के दूसरे हिस्से से मांस या त्वचा का टुकड़ा निकालकर उससे नई जीभ की संरचना तैयार की जाती है और खून की नसों को सर्जरी करके जोड़ दिया जाता है.

क्या जीभ के कैंसर की सर्जरी के बाद मरीज बोल या खा पाता है

क्या जीभ के कैंसर की सर्जरी के बाद मरीज बोल या खा पाता है 4 / 7

जीभ का कुछ हिस्सा निकाला जाता है तो मरीज स्पीच थेरैपी के बाद सामान्य तरह से बोलने लगता है. लेकिन, पूरी जीभ निकालने के बाद आवाज बदल जाती है और ट्रेनिंग के बाद ही मरीज बोल पाता है. वहीं, सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को लिक्विड डाइट दी जाती है. नई जीभ स्वाद नहीं पहचान पाती लेकिन खाना निगलने में मदद करती है.

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जीभ के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं

जीभ के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं5 / 7

जीभ पर लंबे समय तक छाला निकले रहना, जीभ की रंगत में प्रभाव दिखना, दर्द होना, जीभ का सूज जाना, कुछ भी खाने या निगलने में दिक्कत होना और आवाज में बदलाव होना जीभ के कैंसर के शुरुआती लक्षणों में शामिल है.

जीभ का कैंसर होने के क्या कारण हैं

जीभ का कैंसर होने के क्या कारण हैं 6 / 7

तंबाकू या धूम्रपान के कारण जीभ का कैंसर हो सकता है. इसके अलावा एचपीवी वायरस और खराब ओरल हाइजीन ना रखने के कारण जीभ का कैंसर हो सकता है.

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जीभ के कैंसर की जांच कैसे होती है

जीभ के कैंसर की जांच कैसे होती है 7 / 7

जीभ का कैंसर है या नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए बायोप्सी की जाती है जिसमें जीभ के टुकड़े का सैंपल लेकर कैंसर की पुष्टि होती है. इसके अलावा इमेजिंग टेस्ट जैसे सीटी स्कैन या एमआरआई से जांच की जाती है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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