Induction चूल्हे पर गोल घेरा क्यों होता है? 90% लोग इसे समझते हैं डिजाइन

क्या आप भी इंडक्शन चूल्हे के गोल घेरे को सिर्फ डिजाइन समझते हैं? असल में यही छोटा सा सर्कल आपकी कुकिंग स्पीड, बिजली बिल और चूल्हे की लाइफ पर से संबंध रखता है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल.

Induction
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गोल घेरा सिर्फ डिजाइन नहीं

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इंडक्शन चूल्हे पर बना गोल घेरा देखने में भले साधारण लगे, लेकिन यह बताता है कि बर्तन कहां रखना है. यह कुकिंग जोन को दिखाता है, जहां सबसे ज्यादा हीट जनरेट होती है.

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घेरे के नीचे छिपी होती है कॉइल

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इस घेरे के ठीक नीचे तांबे या एल्यूमीनियम की कॉइल लगी होती है. यही कॉइल बिजली को चुंबकीय ऊर्जा में बदलती है और बर्तन को सीधे गर्म करती है. यानी असली काम इसी हिस्से में होता है.

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

कैसे काम करता है यह सिस्टम?4 / 9

जब आप चूल्हा चालू करते हैं, तो कॉइल एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाती है. यह फील्ड सीधे बर्तन के नीचे असर करती है और उसे गर्म करती है. इसलिए गर्मी फैलने के बजाय एक जगह केंद्रित रहती है.

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कुकिंग स्पीड से सीधा कनेक्शन

कुकिंग स्पीड से सीधा कनेक्शन5 / 9

अगर आप बर्तन को ठीक इसी घेरे के अंदर रखते हैं, तो खाना तेजी से पकता है. गलत जगह रखने पर हीट ट्रांसफर सही नहीं होता और कुकिंग टाइम बढ़ जाता है.

बिजली बचाने में कैसे करता है मदद

बिजली बचाने में कैसे करता है मदद6 / 9

सही साइज का बर्तन अगर इस घेरे पर रखा जाए, तो लगभग 90% ऊर्जा सीधे बर्तन को गर्म करने में लगती है. इससे बिजली की बचत होती है और बिल कम आता है.

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गलत साइज के बर्तन से नुकसान

गलत साइज के बर्तन से नुकसान7 / 9

अगर बर्तन बहुत छोटा या बहुत बड़ा हो, तो हीट सही तरीके से ट्रांसफर नहीं होती. इससे ऊर्जा बर्बाद होती है और चूल्हे पर ज्यादा लोड पड़ता है.

सुरक्षा के लिए भी जरूरी है घेरा

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इस घेरे के नीचे लगे सेंसर यह पहचानते हैं कि बर्तन सही जगह पर रखा है या नहीं. गलत पोजीशन होने पर चूल्हा अपने आप बंद हो सकता है, जिससे सुरक्षा बनी रहती है.

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चूल्हे की लाइफ बढ़ाने में मददगार

चूल्हे की लाइफ बढ़ाने में मददगार9 / 9

जब आप सही तरीके से बर्तन रखते हैं, तो चूल्हे पर कम दबाव पड़ता है. इससे इसकी कॉइल और सर्किट सुरक्षित रहते हैं और चूल्हा लंबे समय तक सही चलता है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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