10 या 20 नहीं...150 बार गाया था Nusrat Fateh Ali Khan ने ये दर्दभरा गाना, रुंध गया गला लेकिन परफेक्शन में आया हर सुर

Nusrat Fateh Ali Khan Dhadkan Song: नुसरत फतेह अली खान ने एक बार ऐसा दर्दभरा गाना गाया, जिसे गाते हुए 10 या 20 बार नहीं बल्कि पूरे 150 बार गला भर आया. वे बड़ी मुश्किल से इस गानों को 150 बार रीटेक के बाद गा पाए.

nusrat fateh ali khan dharkan song
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nusrat fateh ali khan dharkan song

इस गाने के बोल उन्हें बार बार इमोशनल कर दे रहे थे, जिसकी वजह से भावुक होकर वे सुर को सही तान पर नहीं लेजा पा रहे थे. लेकिन 150 बार की कड़ी मेहनत के बाद बड़ी मुश्किल से अपने जज्बातों को काबू करके उन्होंने ये गाना गाया.  

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साल 2000 में आई फिल्म का गाना

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नुसरत फतेह अली खान ने साल 2000 में आई इस फिल्म में एक गाना गाया, जिसका ये ट्रैक आज भी लोगों को रुलाने के लिए काफी है. हर बोल और फिल्म में दिखाए गए सीन्स इस गाने को बेहद भावुक बनाते हैं, जिसे गाने वाला सिंगर भी खुद को नहीं रोक पाया.

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कौन सी है फिल्म?

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इस फिल्म का नाम है- धड़कन. इसका "दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है" (Dulhe Ka Sehra) गाना नुसरत फतेह अली खान ने गाया है. मगर इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान एक खास लाइन पर 150 बार रोए थे, जिसके कारण हर बार रिकॉर्डिंग बीच में ही रोकनी पड़ी थी.

किस लाइन पर भावुक हुए नुसरत साहब?

किस लाइन पर भावुक हुए नुसरत साहब?4 / 6

फिल्म के मशहूर गीतकार समीर अनजान (Sameer Anjaan) ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि जब नुसरत साहब इस गाने की निम्नलिखित लाइन गा रहे थे, तो उनका गला पूरी तरह रुंध गया था. समीर बताते हैं कि जैसे कि "बाबुल" शब्द आता, नुसरत साहब को अपनी बेटियों की याद आ जाती थी और वे बेहद भावुक हो जाते थे.

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150 बार गाया गाना

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समीर ने बताया कि नुसरत साहब इस कदर रोने लगते थे, जिससे उनका गला रुंध जाता और सुर बिगड़ जाते. सिर्फ इस एक लाइन को गाने में नुसरत साहब को 150 टेक लेने पड़े. वे इस गाने को गाते ही भावुक हो जा रहे थे. हर कोई यह दृश्य देखकर हैरान था, लेकिन उनसे यह गाना अपनी बेटियों की याद में गाया नहीं जा रहा था.

संगीत के प्रति समर्पण

संगीत के प्रति समर्पण6 / 6

संगीतकारों ने उनसे ब्रेक लेने या बाद में रिकॉर्ड करने को कहा, लेकिन नुसरत साहब ने मना कर दिया. उन्होंने केवल इसी एक लाइन को परफेक्ट सुर में गाने के लिए डेढ़ घंटे (1.5 घंटे) तक लगातार कोशिश की और इसे पूरा किया. बता दें कि साल 1997 में नुसरत साहब ने इस गाने को रिकॉर्ड किया था. जब 2000 में यह फिल्म रिलीज हुई, तो उस वक्त नुसरत साहब दुनिया में मौजूद नहीं थे.

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