क्रिस्टोफर नोलन की फिल्मों से लेकर हाल ही में आई प्रोजेक्ट हेल मैरी तक, इन सभी फिल्मों की लिस्ट देखकर आप हैरान रह जाएंगे. अगर आप वीकेंड पर कुछ अच्छा देखना चाहते हैं, तो इस लिस्ट को सेव करके रख लें.
इंटरस्टेलर

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इस फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे स्पेस में बिताया गया एक घंटा धरती के 7 साल के बराबर हो सकता है. ब्लैक होल के अंदर का फाइव-डायमेंशनल (5D) नजारा और बाप-बेटी की टाइम-ट्रैवल से जुड़ी कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी. 2014 में आई इस फिल्म ने आज भी लोगों के दिलों में जगह बनाकर रखी है.
प्रोजेक्ट हेल मैरी

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यह एस्ट्रोबायोलॉजी और सोलर क्राइसिस पर आधारित फिल्म है, जिसमें एक मिडिल स्कूल साइंस टीचर (रायन गोसलिंग) स्पेसशिप में अकेला जागता है, लेकिन उसे याद नहीं कि वह कौन है और वहां कैसे पहुंचा. जैसे-जैसे उसकी याददाश्त लौटती है, उसे पता चलता है कि सूरज को खत्म कर रहे एक अनोखे एलियन परजीवी से पूरी मानवता को बचाने की जिम्मेदारी उसी पर है. फिल्म में दिखाया गया कड़ा विज्ञान और एक अनोखे एलियन 'रॉकी' के साथ उसका कम्युनिकेशन दिमाग की बत्ती गुल कर देगा.
अराइवल

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इस फिल्म में नॉन लीनियर टाइमिंग और एलियन लैंग्वेज के बारे में बताया गया है. जैसे कि जब धरती पर एलियंस आते हैं, तो एक भाषा वैज्ञानिक उनकी भाषा को डिकोड करती है. जैसे-जैसे वह उनकी भाषा सीखती है, उसका समय को देखने का नजरिया बदल जाता है. फिल्म का क्लाइमैक्स आपको यह सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या भूतकाल और भविष्यकाल एक साथ घटित हो सकते हैं?
एंट-मैन एंड द वास्प: क्वांटमैनिया

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यह फिल्म आपको सब-एटॉमिक लेवल की एक ऐसी जादुई और अजीब दुनिया में ले जाती है, जहां समय और स्पेस के सामान्य नियम काम नहीं करते. मार्वल की यह फिल्म क्वांटम फिजिक्स के कांसेप्ट को एक अलग विजुअल अंदाज में पेश करती है. मल्टीवर्स का ये कॉन्सेप्ट आपके होश उड़ा देगा.
द मार्टियन

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इस स्पेस सर्वाइवल और बॉटनी साइंस पर आधारित फिल्म के कॉन्सेप्ट आपका दिमाग हिला देंगे. मंगल ग्रह पर अकेला छूटा एक वैज्ञानिक बिना ऑक्सीजन और पानी के, सिर्फ अपने साइंस के ज्ञान और सूझबूझ से कैसे आलू उगाता है और नासा से संपर्क साधता है. यह फिल्म काल्पनिक विज्ञान नहीं, बल्कि बेहद रियलिस्टिक साइंस पर आधारित है.
एड एस्ट्रा

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इस फिल्म में सौर मंडल को नष्ट करने वाले रहस्यमयी 'कॉस्मिक सर्ज' को रोकने के लिए एक अंतरिक्ष यात्री को नेपच्यून के आखिरी छोर तक जाना पड़ता है. अंतरिक्ष का सन्नाटा और वहां इंसानों का अकेलापन इस फिल्म में बहुत गहराई से दिखाया गया है. फिल्म में कई खतरनाक सस्पेंस सीन्स दिखाए गए हैं.