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मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग के बीच सोने-चांदी की कीमतों में बीते दिन गिरावट देखने को मिली, जिसे देखते ही निवेशक हैरान रह गए, आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर महंगी धातुओं के दाम भी बढ़ते हैं, लेकिन सोने-चांदी के दामों में गिरावट क्यों आई? जानते हैं इसकी वजह
तेल की बढ़ती कीमत और अमेरिकी डॉलर की मजबूती

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सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग के बीच सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट से ग्लोबल मार्केट में काफी हलचल देखने को मिल रही है. तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के कारण कॉमेक्स बाजार में सोने की कीमत 1.3% गिरी, जबकि चांदी की कीमत में 4% से अधिक की गिरावट आई , जो मुनाफावसूली और मार्केट में बढ़ते ट्रेड टेंशन को दर्शाती है.
निवेशकों की मुनाफावसूली

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कीमती धातुओं में गिरावट का एक प्रमुख कारण हाल के महीनों में सोने की लगातार तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली है. सोने से मोटा मुनाफा अर्जित कर चुके निवेशक ग्लोबल मार्केट में शेयर मार्केट में हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए सोना बेच रहे हैं. एमके वेल्थ मैनेजमेंट के अनुसंधान प्रमुख जोसेफ थॉमस ने कहा, ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों पर मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव का असर तो पड़ा है, लेकिन कीमती धातुओं में अस्थिरता बढ़ी है. तेल की कीमतें भी बढ़ी हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल

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मिडिल ईस्ट में जंग के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 17% बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया, जो महामारी के बाद से सबसे बड़ी दैनिक वृद्धि में से एक है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 107 डॉलर के करीब पहुंच गया. यह उछाल मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधानों की चिंताओं से जुड़ा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण गलियारा है. तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए स्थिति जटिल हो जाती है.
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली वृद्धि

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कीमती धातुओं पर दबाव डालने वाला एक अन्य कारक मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड है. बाजार में तनाव के दौरान मुनाफा चाहने वाले निवेशक डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली वृद्धि हुई है क्योंकि यह चिंताजनक है कि लगातार मुद्रास्फीति फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती में देरी कर सकती है. मजबूत डॉलर आमतौर पर अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोने को अधिक महंगा बना देता है, जिससे मांग कम हो जाती है.