घर की छत पर सोलर पैनल क्या मिडिल क्लास के लिए है फायदे का सौदा? यहां समझें पूरा गणित

भारत में सरकार द्वारा सोलर पैनल के इस्तेमाल को लेकर कई योजनाएं लागू की गई हैं, जिससे लोग ज्यादा से ज्यादा इसका उपयोग करें और बिजली की खपत कम हो. आपने भी भारत के कई घरों की छत पर सेलर पैनल लगे देखे होंगे, लेकिन क्या ये सच में मिडिल क्लास के लोगों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है?

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भारत में सरकार द्वारा सोलर पैनल के इस्तेमाल को लेकर कई योजनाएं लागू की गई हैं, जिससे लोग ज्यादा से ज्यादा इसका उपयोग करें और बिजली की खपत कम हो. आपने भी भारत के कई घरों की छत पर सेलर पैनल लगे देखे होंगे, लेकिन क्या ये सच में मिडिल क्लास के लोगों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है?

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सरकार देती है सब्सिडी

सरकार देती है सब्सिडी2 / 8

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बढ़ते बिजली टैरिफ और सरकारी सब्सिडी ने सोलर पैनल की शुरुआती लागत को कम कर दिया है, जिससे 3-5 वर्षों में ही खर्च वसूल हो जाता है. उसके बाद 20-22 वर्षों तक लगभग मुफ्त बिजली मिलने का लाभ घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है.

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आर्थिक तर्क का मूल आधार

आर्थिक तर्क का मूल आधार3 / 8

भारतीय उपभोक्ता कीमतों को लेकर ज्यादा ही इमोशनल होते हैं, इसलिए भारत में सोलर का प्रमुख आकर्षण पर्यावरण नहीं, बल्कि सीधी बचत से जुड़ा हुआ है. एक बार लगवाने का खर्च करें, कुछ वर्षों में वह वसूल हो जाए और वर्षों तक बिजली बिल कम रहे और एक आम आदमी को इससे ज्यादा क्या चाहिए.

उत्पादन क्षमता का हिसाब

उत्पादन क्षमता का हिसाब4 / 8

सोलरस्क्वायर की सीईओ श्रेया मिश्रा के अनुसार, सिस्टम 25-27 वर्ष तक बिजली उत्पन्न करता है. शहरी घरों में मासिक 300-500 यूनिट खपत पर 3 से 5 किलोवाट का सिस्टम उपयुक्त होता है. भारत में 1 किलोवाट सोलर सालाना 1400-1450 यूनिट बिजली पैदा करता है, यानी 3 किलोवाट से 4200-4350 और 5 किलोवाट से 7000-7250 यूनिट. इससे वार्षिक बचत काफी बढ़ जाती है.

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बिल बचत का आंकड़ा

बिल बचत का आंकड़ा5 / 8

प्रति यूनिट 7-10 रुपये दर पर 400 यूनिट मासिक खपत वाले परिवार का सालाना खर्च 40-50 हजार होता है. 25 वर्षों में यह 10 लाख से अधिक पहुंच सकता है, अगर टैरिफ बढ़ते रहे. सोलर सिस्टम इसका बड़ा हिस्सा समाप्त कर देता है.

सब्सिडी से बदलाव

सब्सिडी से बदलाव6 / 8

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में केंद्र से 78,000 रुपये तक सहायता मिलती है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली में 30,000 और असम में 45,000 रुपये अतिरिक्त राज्य सब्सिडी उपलब्ध है. इससे प्रभावी लागत 1.5-2 लाख तक सीमित रह जाती है.

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पेबैक अवधि का महत्व

पेबैक अवधि का महत्व7 / 8

सोलर पैनल में किया गया निवेश वापस आने में 4 से 5 साल लग जाते हैं. उसके बाद रखरखाव को छोड़ बिजली एक तरह से मुफ्त हो जाती है. ऐसे में सोलर पैनल को तुरंत नहीं, लेकिन लंबी अवधि के लिए किफायती माना जा सकता है.

क्या न करें?

क्या न करें?8 / 8

सोलर पैनल लेने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे आपका पैसा बर्बाद ना हो. सबसे पहले तो सस्ते सोलर पैनल से बचें, उसकी गुणवत्ता, मजबूती और शेड की जांच जरूर करें. ALMM अप्रूव्ड मॉड्यूल चुनें और डिग्रेडेशन दर समझें. बिजली और पैसे की बचत हो रही है या नहीं इसके लिए एक साल के बिल को ट्रैक करें.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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