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ईरान में जारी युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों के बीच महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। कहने को तो भारतीय रुपये के मुकाबले ईरानी रियाल की कीमत बहुत कम है, लेकिन वहां के स्थानीय लोगों के लिए एक वक्त की रोटी जुटाना भी पहाड़ जैसा काम हो गया है।
ईरान में महंगाई का तांडव: क्या आप सोच सकते हैं 1KG आटे की कीमत?

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पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था वेंटिलेटर पर है। रोजमर्रा की चीजों की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही हैं। आटा हो या मटन, आम आदमी की थाली से प्रोटीन और पोषण गायब होता जा रहा है। आइए जानते हैं क्या है ईरान के बाजारों का हाल।
₹14 का आटा लाखों में

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ईरान में 1 किलो आटे की कीमत 72,000 से 1,93,000 ईरानी रियाल के बीच है। भारतीय रुपये में यह महज ₹5 से ₹14 के बराबर है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह बहुत महंगा है। क्योंकि उनकी कमाई रियाल में है और रियाल की वैल्यू मिट्टी के बराबर हो चुकी है।
मटन और चिकन अब केवल सपनों में

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ईरान में अब मांस खाना अमीरों का शगल बन गया है। 1 किलो चिकन की कीमत 25 लाख से 35 लाख रियाल तक पहुंच गई है। वहीं मटन के दाम 2.7 लाख से 7 लाख रियाल के बीच झूल रहे हैं। आम आदमी के लिए अपनी डाइट में प्रोटीन शामिल करना नामुमकिन होता जा रहा है।
दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स: 1 साल में 50% का उछाल

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बच्चों के लिए दूध जुटाना भी अब चुनौती है। 1 लीटर दूध की कीमत 5.7 लाख से 8.2 लाख रियाल तक पहुँच गई है। पिछले एक साल में डेयरी उत्पादों के दामों में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे पोषण का संकट गहरा गया है।
₹5 का पेट्रोल लेकिन ₹1000 की ब्रेड!

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ईरान की इकोनॉमी अजीब विरोधाभासों से भरी है। सरकारी सब्सिडी के कारण वहां पेट्रोल आज भी ₹5-7 प्रति लीटर के बराबर है, लेकिन दूसरी तरफ खाने-पीने की चीजों पर से सब्सिडी हटने के कारण ब्रेड और सब्जियां आम जनता की पहुंच से बाहर हो गई हैं।
कमाई $100 और खर्च $500; कैसे चलेगा घर?

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ईरान में एक औसत मजदूर महीने में करीब $100-150 कमाता है, जबकि एक छोटे परिवार का न्यूनतम खर्च $500 के पार जा चुका है। कुल महंगाई दर 50% है, लेकिन खाद्य महंगाई 100% को पार कर गई है। यह बढ़ता अंतर ईरान में बड़े सामाजिक तनाव की वजह बन रहा है।