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ऊर्जा संकट की आहट के बीच केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर राशनिंग (Rationing) लागू कर दी है। राज्य पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि पेट्रोल पंपों पर अचानक स्टॉक खत्म न हो और हर आम आदमी को जरूरत भर का तेल मिल सके। आइए, तस्वीरों के जरिए समझते हैं क्या हैं ये नए नियम और आप पर इनका क्या असर होगा।
पेट्रोल के लिए ₹5,000 की लिमिट

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अब केरल में कोई भी व्यक्ति एक बार में ₹5,000 से ज्यादा का पेट्रोल नहीं खरीद पाएगा। कार, बाइक और ऑटो-रिक्शा चलाने वालों के लिए यह पर्याप्त है, क्योंकि आम तौर पर इतने में फुल टैंक हो जाता है। इसलिए आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
डीजल की खुराक: 200 लीटर पर लगा ब्रेक

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डीजल खरीदने वालों के लिए भी सीमा तय कर दी गई है। एक बार में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही मिल सकेगा। यह नियम लंबी दूरी के भारी ट्रकों और प्राइवेट बसों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है, क्योंकि उन्हें सफर पूरा करने के लिए इससे कहीं ज्यादा तेल चाहिए होता है।
ड्रम और डिब्बों में तेल ले जाने पर नो एंट्री

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राज्य में अब ड्रम, जैरीकैन या किसी भी बड़े कंटेनर में थोक में ईंधन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। तेल की जमाखोरी रोकना और यह सुनिश्चित करना कि पंपों पर मौजूद स्टॉक केवल वाहनों के लिए ही इस्तेमाल हो।
क्यों पड़ी राशनिंग की जरूरत?

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तेल कंपनियां अब पंपों को केवल 2-3 दिन का ही स्टॉक दे रही हैं। क्रेडिट सुविधा खत्म होने से छोटे पंप मालिकों के लिए भारी मात्रा में तेल मंगाना मुश्किल हो गया है। राशनिंग से यह फायदा होगा कि कोई बड़ा खरीदार एक साथ सारा स्टॉक नहीं ले जा पाएगा।