Petrol Diesel Price Hike Impact: पेट्रोल-डीजल का रेट बढ़ने से जानें देश में क्या-क्या हो सकता है महंगा?
देश में पेट्रोल और डीजल आज फिर महंगा हो गया। पिछले 10 दिन में दोनों का रेट 4 बार में कुल 5 से 6 रुपये बढ़ाया गया है। इस महंगाई का सीधा असर लोगों की जेब पर, उनकी रसोई पर, उनके दिनचर्या पर पड़ेगा। क्योंकि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से कई चीजें महंगी हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते रेट भारतीयों की जिंदगी पर क्या और कैसे असर डालेंगे?

भारत 90 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता है। सबसे ज्यादा आयात अरब देशों से किया जाता है, लेकिन 28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक है। इस वजह से अरब देशों से कच्चे तेल के आयात में बाधा आ रह है। शुरुआत में तो देश में कुकिंग गैस का संकट गहराया था, लेकिन अब पेट्रोल डीजल का संकट गहराने लगा है, क्योंकि रेट बढ़ रहे है।
थोक बाजार में महंगाई का रिकॉर्ड टूटा
2 / 7बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेड के कारण दुनिया में कच्चा तेल 88 प्रतिशत महंगा हो गया है। इस वजह से भारत में गैस और पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़े, जिससे देश की रिटेल मार्केट तो नॉर्मल है, लेकिन थोक बाजार में महंगाई बढ़ने से 42 महीने का रिकॉर्ड टूट गया है। इससे आम आदमी के घर और रसोई का बजट बिगड़ा है और हालात यही रहे तो महंगाई भारतीयों की कमर तोड़ सकती है।
महंगे तेल के कारण से सब महंगा होगा
3 / 7मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, महंगा पेट्रोल और डीजल मतलब महंगा ट्रांसपोर्ट और महंगी ढुलाई होगी। इससे खेती का सामान महंगा होगा। डीजल महंगा होने से फैक्ट्रियों की लागत भी बढ़ जाएगी। क्योंकि भारत में करीब 40 फीसदी डीजल का इस्तेमाल ट्रकों, बसों, खेती-बाड़ी करने के लिए पंप, जेनरेटर और फैक्ट्रियों में होता है। इसलिए डीजल महंगा होने से सब्जियां, दूध, फल, पैकेज्ड फूड, सीमेंट और स्टील जैसी हर चीज महंगी होगी।
कंज्यूमर और होलसेल प्राइस इंडेक्स बढ़ेगा
4 / 7मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, पेट्रोल ओर डीजल का रेट बढ़ने से देश में महंगाई में करीब 20 बेसिस पॉइंट्स (0.20%) की बढ़ोतरी हो सकती है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) बढ़ सकता है, जिसके आधार पर रोजमर्रा की चीजों जैसे खाना, पानी, घर, ट्रांसपोर्ट, इलाज, पढ़ाई आदि के रेट तय होते हैं। यह बढ़ने परिवार पर बोझ बढ़ता है। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) भी बढ़ सकता है। इससे थोक बाजार में भाव तय होते हैं, जिसमें ईंधन, कच्चा माल, धातुएं और कारखानों में बनने वाली चीजों शामिल हैं। थोक में खरीदी जाने वाली चीजें महंगी होती हैं तो कंपनियां इसकी वसूली ग्राहकों से ही करती है, यानी दोनों सूरत में आम आदमी पर ज्यादा बोझ पड़ेगा।
अप्रैल में ज्यादा हुई रिटेल और थोक महंगाई
5 / 7बता दें कि मिडिल ईस्ट की जंग के कारण अप्रैल 2026 में भारत में रिटेल महंगाई यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) बढ़कर 3.48% के स्तर तक पहुंचा गया, जबकि मार्च में यह 3.40% था। वहीं थोक महंगाई होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) मार्च के 3.88% वाले स्तर से छलांग लगाकर अप्रैल में 8.3% पर पहुंच गई। महंगाई का यह स्तर 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इसमें भी सबसे ज्यादा इजाफा ईंधन और बिजली के सेगमेंट में हुआ, जो अप्रैल महीने में ही 1.05% से बढ़कर 24.71% प्रतिशत पर पहुंच गया, क्योंकि कच्चे तेल के रेट में 88% से ज्यादा का उछाल आया। इसलिए पेट्रोल और डीजल का रेट बढ़ने से थोक महंगाई का स्तर बढ़ता जा रहा है।
अरहर की दाल का रेट सबसे ज्यादा बढ़ा
6 / 7व्यापारियों के मुताबिक पिछले एक महीने में अरहर दाल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी आई है। थोक बाजार में अरहर करीब 12 फीसदी महंगी होकर 9000 से 11800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई है। उड़द दाल के दाम भी 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। वहीं मार्च के बाद से मसूर दाल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक महंगाई 9 प्रतिशत तक पहुंच सकती
7 / 7अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में सकंट बढ़ा तो देश में थोक महंगाई मई और जून के महीने में 9% तक पहुंच सकती है। ग्लोबल मार्केट में बढ़ती महंगाई का असर जल्द ही घरेलू ईंधन, मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट लागत में दिखने लगेगा। रिटेल महंगाई भी बढ़ने की आशंका है, क्योंकि महंगे तेल, खाने और ट्रांसपोर्ट का असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा।