प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए उनकी वफादारी और कड़ी मेहनत का सबसे बड़ा इनाम ग्रेच्युटी (Gratuity) होती है। अब तक के पारंपरिक नियमों के मुताबिक, किसी भी कंपनी से ग्रेच्युटी पाने के लिए लगातार 5 साल तक नौकरी करना अनिवार्य था। लेकिन सरकार द्वारा लागू किए गए न्यू लेबर कोड्स (New Labour Codes) ने इस पूरे गेम को बदल दिया है। नए नियमों से कर्मचारियों को बहुत बड़ी राहत मिली है, लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसी शर्तें भी जोड़ी गई हैं जहां आपकी एक छोटी सी गलती सालों की कमाई पर पानी फेर सकती है। आइए, ग्रेच्युटी का नया गणित और इसके पिटफॉल (Pitfalls) समझते हैं।
5 साल का झंझट खत्म! अब सिर्फ 1 साल की नौकरी पर मिलेगी ग्रेच्युटी

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नए लेबर कोड में सबसे बड़ा ऐतिहासिक बदलाव फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉइज (Fixed-Term Employees) के लिए हुआ है। पहले 5 साल की पाबंदी के कारण अनुबंध (Contract) पर काम करने वालों को एक रुपया भी ग्रेच्युटी नहीं मिलती थी। अब अगर आप किसी कंपनी में फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट (FTE) पर हैं, तो महज 1 साल की सेवा पूरी करने के बाद ही आप ग्रेच्युटी के हकदार बन जाएंगे।
बदल गया सैलरी का फॉर्मूला, अब हाथ में आएगी ज्यादा बड़ी रकम

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नए नियमों के अनुसार, आपकी 'बेसिक सैलरी' (Basic Salary) और 'मंगाई भत्ता' (Dearness Allowance - DA) मिलकर आपके कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है। पहले कंपनियां बेसिक सैलरी को जानबूझकर कम रखती थीं और भत्तों (Allowances) को बढ़ा देती थीं, जिससे ग्रेच्युटी का पैसा कम बनता था। अब बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ते ही आपकी ग्रेच्युटी की रकम ऑटोमेटिकली काफी मोटी (Substantial) हो जाएगी।
सावधान! इन 3 गंभीर परिस्थितियों में कंपनी रोक सकती है आपका पैसा

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ग्रेच्युटी आपका कानूनी अधिकार है, लेकिन दफ्तर में किए गए ये 3 अपराध आपका पूरा पैसा फ्रीज करवा सकते हैं:
चोरी या धोखाधड़ी (Theft or Fraud): यदि कोई कर्मचारी रिश्वत लेते, गबन करते या फर्जी दस्तावेजों के जरिए कंपनी के साथ धोखाधड़ी करते पकड़ा जाता है।
घोर दुर्व्यवहार (Misconduct): सहकर्मियों के साथ मारपीट करना, महिला कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार या ऑफिस के अनुशासन को तार-तार करना भारी पड़ेगा। आरोप सिद्ध होने पर कंपनी 100% ग्रेच्युटी काट सकती है।
कंपनी को वित्तीय नुकसान (Financial Loss): यदि आपकी किसी लापरवाही के कारण कंपनी को सीधा वित्तीय नुकसान होता है, तो कंपनी उस नुकसान की भरपाई आपकी ग्रेच्युटी से कर सकती है।
अपनी मर्जी से फंड नहीं रोक सकता बॉस, ये हैं आपके कानूनी अधिकार

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कोई भी कंपनी अपनी मनमर्जी या निजी खुंदक में आपकी ग्रेच्युटी नहीं रोक सकती। इसके लिए बकायदा कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। कंपनी को आपके खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने होंगे और आपको अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा मौका देना होगा। यदि आरोप साबित नहीं होते और कंपनी बिना वजह पैसे रोकती है, तो उसे बकाया राशि पर भारी ब्याज देना पड़ेगा. (टैक्स और पीएफ की तरह ही अपने एम्प्लॉयमेंट रिकॉर्ड को हमेशा पारदर्शी रखें)।