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पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और इजरायल-लेबनान संघर्ष के बीच ऊर्जा संकट गहरा गया है। ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम को अनुचित करार दिया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अनिश्चितता बढ़ गई है। भारत के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि हम अपनी जरूरत का 90% एलपीजी यहीं से आयात करते हैं।
गैस की कीमतों पर वैश्विक तनाव का साया, जानें आज के भाव

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इजरायल-लेबनान संघर्ष के बाद ईरान के कड़े रुख ने ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। हालांकि, सरकार घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन कमर्शियल गैस और वैश्विक कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) के दाम: 9 अप्रैल की स्थिति

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) में 44% की बढ़त के बावजूद, भारत में घरेलू गैस की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। प्रमुख शहरों के रेट्स:
दिल्ली 913
कोलकाता 939
मुंबई 912.50
चेन्नई 928.50
बेंगलुरु 915.50
हैदराबाद 965
कमर्शियल गैस (19 किलो) में ₹195.50 का बड़ा उछाल

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रेस्टोरेंट और ढाबा चलाने वालों के लिए लागत बढ़ गई है। सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस $542 से बढ़कर $780 प्रति टन होने के कारण दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब ₹2,078.50 का हो गया है। कोलकाता में यह ₹2,208 और हैदराबाद में ₹2,320 के पार पहुंच गया है।
दिल्ली 2,078.50
कोलकाता 2,208
मुंबई 2,031
चेन्नई 2,246.50
बेंगलुरु 2,161
हैदराबाद 2,320
सरकार उठा रही है ₹380 प्रति सिलेंडर का घाटा

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जनता को महंगाई से बचाने के लिए तेल कंपनियां घरेलू सिलेंडर पर ₹380 का 'अंडर-रिकवरी' (घाटा) सह रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारत में घरेलू गैस की कीमतें पड़ोसी देशों—पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल—की तुलना में काफी कम हैं।
क्यों है भारत के लिए मिडिल ईस्ट संकट चुनौतीपूर्ण?

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भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल और 90% एलपीजी सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से आयात करता है। 'होर्मुज जलडमरूमध्य' पर ईरान का नियंत्रण भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। फिलहाल सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई सामान्य है।