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ईरान संकट और global oil crisis के बीच भारत की इकॉनोमी ने मजबूती दिखाई है. अप्रैल के पहले हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 697 अरब डॉलर हो गया है, जिसमें सोने के भंडार की बड़ी भूमिका रही है.
697 अरब डॉलर पहुंचा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

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अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 697.12 अरब डॉलर हो गया है. ये बढ़ोतरी करीब 9 अरब डॉलर की है, जो पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद एक मजबूत रिकवरी मानी जा रही है.
गिरावट के बाद आई जोरदार रिकवरी

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इससे पहले के सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 10 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी. लेकिन अब तेजी से सुधार हुआ है, जिससे यह साफ है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियां बाजार को स्थिर रखने में सफल रही हैं.
गोल्ड रिजर्व बना सबसे बड़ा सहारा

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इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान सोने के भंडार (Gold Reserves) का रहा. RBI के आंकड़ों के मुताबिक, सोने की कीमत करीब 7.22 अरब डॉलर से बढ़कर 120.74 अरब डॉलर तक पहुंच गई है.
विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) में भी इजाफा

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विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets (FCA) होता है. इसमें भी करीब 1.78 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर लगभग 552.85 अरब डॉलर हो गया है. इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राएं शामिल होती हैं.
SDR और IMF रिजर्व की स्थिति

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स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है और यह करीब 18.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. वहीं IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) के साथ भारत की रिजर्व पोजिशन लगभग 4.81 अरब डॉलर पर स्थिर बनी हुई है.
रुपये को स्थिर रखने में मदद

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विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे भारतीय रुपये को स्थिर रखने में मदद मिलती है. जब बाजार में दबाव बढ़ता है, तो RBI डॉलर बेचकर रुपये को गिरने से बचाता है. हाल के समय में भी RBI ने इसी रणनीति का इस्तेमाल किया है.