8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के सामने रखी 9 मांगों की लिस्ट हुई रिवील

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लिखे पत्र में गर्वनमेंट स्टॉफ बॉडी की नौ मांगों की सूची रिवील हुई है. इन मांगों के साथ स्टाफ पक्ष ने आठवें वेतन आयोग से ज्ञापन प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में सुधार करने का आग्रह किया है. सभी नौ मांगों की सूची यहां दी गई है.

8th Pay Commission latest update
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8वें वेतन आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन को लिखे पत्र में नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी NC JCM) के स्टाफ साइड के सचिव शिवा गोपाल मिश्रा ने कई प्रमुख मुद्दों को उजागर किया और प्रोसेस  को अधिक समावेशी, विस्तृत और प्रभावी बनाने के लिए उपायों का सुझाव दिया. यह सुझाव कर्मचारियों के साथ लाखों पेंशनर्स के लिए भी अहम हैं.

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शब्दसीमा बढ़ाई जाए

शब्दसीमा बढ़ाई जाए2 / 6

लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा 3,500 अक्षरों (जो 500 शब्दों के बराबर है) की सीमा को संस्था ने अपर्याप्त बताया है. इसलिए, संस्था ने अनुरोध किया है कि प्रत्येक विषय के लिए शब्द सीमा को कम से कम 1,000 शब्दों तक बढ़ाया जाए ताकि ज्ञापन में सभी बातें लिखी जा सकें. उप-प्रश्नों के लिए स्पष्ट प्रावधान: संस्था ने कहा कि मौजूदा प्रारूप में प्रत्येक विषय के अंतर्गत सभी उप-प्रश्नों या टाइटल्स के जवाब देने की स्पष्ट सुविधा नहीं है. प्रारूप व्यवस्थित होना चाहिए, ताकि उत्तरदाताओं बिना किसी प्रतिबंध के प्रत्येक उप-प्रश्न का व्यवस्थित रूप से उत्तर देने में सक्षम हों.

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पेंशन सुधारों पर जरूरी सुझाव

पेंशन सुधारों पर जरूरी सुझाव3 / 6

पत्र में जिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला गया, उनमें से एक राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) के अंतर्गत आने वाली समस्याएं थीं. संस्था ने CCS नियमों के तहत पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग की. पत्र में कहा गया, "सरकारी कर्मचारियों को अंशदायी पेंशन योजना के अधीन नहीं किया जाना चाहिए." पेंशनभोगियों के मुद्दों को शामिल करना: स्टाफ पक्ष ने एक समर्पित प्रावधान बनाने की मांग की, जो पेंशन से संबंधित मुद्दों को संबोधित करेगा, जिसमें सेवानिवृत्ति लाभ, संशोधन, पेंशन में समानता, पेंशन के परिवर्तित मूल्य की बहाली, पेंशन में वृद्धि और अन्य कल्याणकारी उपाय शामिल हैं.

महिला कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी प्रावधान

महिला कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी प्रावधान4 / 6

निकाय ने प्रस्ताव दिया कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों, जैसे वर्क प्लेस सिक्योरिटी, मेटेरनिटी बैनेफिट, मासिक धर्म कल्याण, बाल देखभाल अवकाश (CCL) के साथ-साथ लैंगिक समानता नीतियों जैसे महिला-केंद्रित मुद्दों के लिए एक अलग अनुभाग शामिल किया जाना चाहिए. विभाग-विशिष्ट मुद्दे: पत्र में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि विभिन्न सरकारी विभागों को अलग-अलग समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसलिए, बेहतर नीति निर्माण के लिए विभाग-विशिष्ट चिंताओं पर सुझाव आमंत्रित करने का प्रावधान किया जाना चाहिए.

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ज्ञापन जमा करने की समय सीमा बढ़े

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कर्मचारी पक्ष ने विभाग-विशिष्ट मुद्दों पर परामर्श के लिए अधिक समय मांगा है और ज्ञापन प्रस्तुत करने की नई समय सीमा 31 मई, 2026 प्रस्तावित की है. उसने कहा कि संघों, यूनियनों और संगठनों को देश भर में संबद्ध संस्थाओं के साथ परामर्श के लिए अधिक समय की आवश्यकता है. अटैचमेंट के आकार की सीमा में वृद्धि: पत्र में ज्ञापन प्रस्तुत करने से संबंधित तकनीकी सीमाओं का भी उल्लेख किया गया है, क्योंकि वर्तमान सीमा केवल 2 एमबी है. इसमें इसे बढ़ाकर 10 एमबी करने का प्रस्ताव दिया गया है, यह कहते हुए कि इससे विस्तृत रिपोर्ट और डेटा प्रस्तुत करना संभव होगा.

प्रस्तुति के तरीकों में सुधार

प्रस्तुति के तरीकों में सुधार6 / 6

ज्ञापन को ऑनलाइन जमा करने के अलावा, पत्र में सुझाव दिया गया है कि संस्थाओं को ऑनलाइन माध्यम के साथ-साथ ईमेल और हार्ड कॉपी के माध्यम से भी अपनी राय प्रस्तुत करने की अनुमति दी जानी चाहिए. संस्था ने लिखा, "इससे तकनीकी बाधाएं कम होंगी और संचार का एक वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध होगा." कर्मचारी पक्ष ने आयोग के साथ आगे की बातचीत में भी रुचि व्यक्त की है. पत्र में उन्होंने कहा, "हम 13-04-2026 के बाद किसी भी सुविधाजनक तिथि पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग से मिलना चाहेंगे."

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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