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इसी साल 28 फरवरी को जब दोनों देशों में जंग छिड़ी थी तो गुडरिटर्न्स के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 16,158 रुपये प्रति ग्राम और 10 ग्राम का भाव 1,61,580 रुपये था जो 24 मार्च तक 13565 तक गिर गया है. इस तरह सोने के दाम में केवल 25 दिन में 46 हजार रुपये की तगड़ी गिरावट देखने को मिली. वहीं, चांदी के दाम में भी जंग पीरियड में 54 हजार रुपये की गिरावट है। गुड रिटर्न्स की रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी को चांदी के दाम दो लाख 84 हजार रुपये प्रति किलो थे, जोकि 23 मार्च को बाजार बंद होने के समय दो लाख तीस हजार रुपये तक सिमट गए थे.
25 दिन में कैसे घटे सोने के दाम?

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वहीं, 28 February को जंग शुरू होने के समय गुड रिटर्न्स की रिपोर्ट के अनुसार 24 कैरेट सोना 16,871 रुपये प्रति ग्राम था, जोकि 01 मार्च को 17,309 रुपये हुआ, इसी तरह 2 को 17,051 रुपये, 3 को 16,762 रुपये, 4 को 16,451 रुपये, 5 को 16,288 रुपये, 6 को 16,113 रुपये, 07 को 16,364 रुपये, 08 को 16,364 रुपये, 09 को 16,168 रुपये, 10 को 16,238 रुपये, 11 को 16,331 रुपये, 12 को 16,222 रुपये, 13 को 16,069 रुपये, जबकि 14 और 15 को 15,966 रुपये, 16 को 15,742 रुपये, 17 को 15,808 रुपये, जबकि 18 को 15,742 रुपये, 19 को 15,028 रुपये, 20 को 14,891 रुपये, 21 को 14,597 रुपये, जबकि 22 को 14,597 रुपये, 23 को 14,329 रुपये और 24 मार्च यानी आज सोने की कीमत 14,035 रुपये जा पहुंची है.
25 दिन में कैसे घटे चांदी के दाम?

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वहीं, 28 February को गुड रिटर्न्स की रिपोर्ट के अनुसार 28 February और 01 March को चांदी के दाम 2,95,000 रुपये प्रति किलाे थे, जोकि 02 मार्च को 3,15,000 रुपए हो गया। इसी तरह, 03 को 2,95,000 रुपये, 04, 05, 06, 07 और 08 को 2,85,000 रुपये, 9 को 2,80,000 रुपए, इसके बाद 10 और 11 को 2,90,000 रुपये, 12 को 2,80,000 रुपये, 13 को 2,79,000 रुपये, 14 और 15 को 2,75,000 रुपये, 16 को 2,70,000 रुपये, 17 को 2,75,000 रुपये, 18 को 2,65,000 रुपये, 19 को 2,60,000 रुपये, 20 को 2,55,000 रुपये, 21 और 22 को 2,45,000 रुपये, 23 को 2,30,000 रुपये, जबकि 24 को 2,35,000 रुपये तक दर्ज की गई हैं।
गिरावट का एक कारण यह भी

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सोने की कीमतों में गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व के बदलते नियम हैं. ब्याज दरों में कटौती की पहले की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं और अब यह अटकलें हैं कि दरें ऊंची बनी रह सकती हैं, या और भी बढ़ सकती हैं. इस बदलाव से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जो आमतौर पर सोने के विपरीत दिशा में चलता है. मजबूत डॉलर अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोने को महंगा बना देता है, जिससे मांग कमजोर होती है और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.
ETF से भारी निकासी ने बढ़ाई गिरावट

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निवेशकों के व्यवहार ने बिकवाली को और बढ़ा दिया है. हाल ही में सोने की कीमतों में रिकॉर्ड ऊंचाई आने के बाद, कई बाजार प्रतिभागियों ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया. इसके चलते सोने समर्थित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों (ETF) से भारी मात्रा में निकासी हुई, जिससे बिकवाली की एक नई लहर शुरू हो गई. जैसे-जैसे अधिक निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं, गिरावट की गति और भी तेज हो गई है.
51 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट

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न्यूज 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में सोने की कीमतों में करीब 20% की भारी गिरावट आई, जो पिछले 51 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट है. यह 1975 के बाद से एक माह में आई सबसे बड़ी गिरावट है, जो 1978, 1980, 1983 और यहां तक कि 2008 के वित्तीय संकट के दौरान देखी गई पिछली गिरावटों को भी पीछे छोड़ देती है. निवेशकों के लिए, इस गिरावट का पैमाना और गति बेहद चिंताजनक है.