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मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बुरी खबर है। मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने राज्य में बिजली की दरों में बढ़ोतरी का फैसला सुनाया है। जबलपुर स्थित मुख्यालय से जारी इस आदेश के बाद अब प्रदेश के घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ने वाला है।
एमपी में बिजली बिल बढ़ा

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मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2026-27 के लिए नया टैरिफ प्लान जारी कर दिया है। बिजली कंपनियों द्वारा दायर की गई टैरिफ याचिकाओं पर लंबी सुनवाई के बाद, आयोग ने राज्य में बिजली की कीमतों में औसत 4.80 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है।
कंपनियों की मांग और आयोग का फैसला

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प्रदेश की बिजली कंपनियों ने वित्तीय घाटे और बढ़ती परिचालन लागत का हवाला देते हुए 10.19 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी की मांग की थी। हालांकि, उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने इस मांग को आधा कर दिया और केवल 4.80 प्रतिशत की वृद्धि को ही मंजूरी दी।
किन पर पड़ेगा असर?

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बिजली की नई दरें लागू होने के बाद सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक बिल में 5% तक का इजाफा हो सकता है। वहीं दुकानों, शोरूम और फैक्ट्रियों के लिए बिजली महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
क्यों बढ़ाई गईं दरें?

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नियामक आयोग के अनुसार, बिजली कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति और बिजली उत्पादन व वितरण में आने वाले खर्चों (Operating Costs) को देखते हुए यह फैसला लेना अनिवार्य था। कंपनियों का तर्क है कि कोयले के दाम और रखरखाव के खर्चों में बढ़ोतरी के कारण वे घाटे में चल रही थीं।
जनता और उपभोक्ता संगठनों में नाराजगी

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इस फैसले के बाद उपभोक्ता संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए बिजली के बिलों में यह बढ़ोतरी 'कोढ़ में खाज' जैसी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन की भी आशंका जताई जा रही है।