अगर आप भी ऑफिस आने-जाने, घूमने या किसी अन्य काम के लिए ओला (Ola) कैब या ऑटो सेवा का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। चंडीगढ़ प्रशासन की स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ओला का एग्रीगेटर लाइसेंस अगले 6 महीने के लिए सस्पेंड (रद्द) कर दिया है। प्रशासन के इस कड़े फैसले के बाद शहर में ओला का बिजनेस पूरी तरह ठप होने के कगार पर पहुंच गया है, जिससे रोजाना सफर करने वाले आम यात्रियों के साथ-साथ कंपनी से जुड़े हजारों ड्राइवर पार्टनर्स की मुश्किलें भी बढ़ने वाली हैं।
क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला?

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प्रशासन द्वारा की गई यह सख्त कार्रवाई 'चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर रूल्स 2025' के नियमों के उल्लंघन के आरोपों के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, ओला कंपनी के खिलाफ ड्राइवरों और आम लोगों की तरफ से लगातार कई गंभीर शिकायतें मिल रही थीं।
इन शिकायतों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे शामिल थे:

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कंपनी द्वारा ड्राइवरों को अनिवार्य हेल्थ (स्वास्थ्य) और टर्म इंश्योरेंस जैसी जरूरी सुविधाएं सही तरीके से नहीं दी जा रही थीं। ड्राइवरों की जरूरी ट्रेनिंग और यात्रियों से वसूले जाने वाले किराए से जुड़े तय सरकारी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था।
बिना बताए दफ्तर बदला, नोटिसों का भी नहीं दिया जवाब

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स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (STA) के दावों के मुताबिक, ओला को नियमों का पालन करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट जमा करने के लिए पहले भी कई बार निर्देश और नोटिस भेजे गए थे, लेकिन कंपनी के रवैये में कोई सुधार नहीं देखा गया। जांच के दौरान एक और हैरान करने वाली बात सामने आई कि कंपनी ने लगभग एक साल पहले ही चंडीगढ़ में स्थित अपने मुख्य कार्यालय (Office) को प्रशासन को बिना कोई सूचना दिए किसी दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया था। अथॉरिटी का कहना है कि कंपनी को अपना पक्ष रखने के कई मौके दिए गए, लेकिन किराए और अन्य गड़बड़ियों से जुड़े सरकारी नोटिसों का कंपनी ने कोई जवाब तक नहीं दिया।
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आम जनता और ड्राइवर्स पर क्या होगा असर?

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लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने इन सभी शिकायतों, नोटिसों की अनदेखी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आखिरकार ओला के लाइसेंस को 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया है। चंडीगढ़, पंचकुला और मोहाली (ट्राइसिटी) में ओला की कैब और ऑटो सेवाएं बंद या प्रभावित होने से रोजाना सफर करने वाले कामकाजी लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। पीक आवर्स में कैब मिलना मुश्किल हो जाएगा और अन्य कप्तानों द्वारा मनमाना किराया वसूलने की आशंका बढ़ जाएगी। ओला प्लेटफॉर्म से जुड़े हजारों कैब और ऑटो चालकों के सामने अचानक रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल, ओला कंपनी की तरफ से इस सस्पेंशन ऑर्डर और चंडीगढ़ में अपनी सेवाओं को जारी रखने की वैकल्पिक योजना पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।