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Baba Vanga Gold Predictions: बुल्गारियाई रहस्यवादी बाबा वेंगा की भविष्यवाणी से सोने के निवेशक असमंजस में हैं. भारत में सोने की कीमत फिलहाल करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम है. यह कीमत लंबे समय से निवेश करने वालों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, लेकिन सोने के गहने खरीदने वाले लोगों के बजट पर भारी पड़ रही है. पिछले कुछ महीनों में कीमती धातुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे निवेशक और आम खरीदार दोनों हैरान हैं.

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वायरल पोस्ट्स के मुताबिक बाबा वांगा ने 2026 में आर्थिक अस्थिरता की भविष्यवाणी की थी. कुछ दावों में यह भी कहा जा रहा है कि उस समय सोने की कीमतों में 25 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. सोने का भाव 10 ग्राम के लिए 1.63 लाख रुपये से लेकर 1.82 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. इसी बीच विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतें कई वजहों से प्रभावित होती हैं, जिनमें वैश्विक ब्याज दरें, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियां शामिल हैं.

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गिरावट के दौरान कुछ लोगों ने नुकसान से बचने के लिए अपना निवेश बेच दिया, जबकि कई लोगों ने मौके को भुनाते हुए कम कीमत पर खरीदारी की. सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव काफी तेज रहता है और विशेषज्ञ भी इनके अचानक बढ़ने या गिरने का सटीक अनुमान नहीं लगा पाते. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों के आधार पर जल्दबाजी में फैसले न लें. अपनी निवेश योजना पर टिके रहें और घबराकर न तो सोना बेचें और न ही जरूरत से ज्यादा खरीदारी करें.

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बाबा वांगा की 2026 को लेकर की गई भविष्यवाणियां सोशल मीडिया पर फिर से चर्चा में हैं. फिलहाल भारत में सोने की कीमत करीब 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है. आर्थिक मंदी या अनिश्चितता के दौर में सोने को सहारा जरूर मिलता है, लेकिन हालात सुधरते ही इसकी कीमतों में तेज गिरावट भी देखी जाती है. इस हफ्ते की शुरुआत में अचानक आई गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं.

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सोना एक सुरक्षित निवेश जरूर माना जाता है, लेकिन सोच-समझकर और संतुलित तरीके से ही इसमें निवेश करना बेहतर होता है. बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां लिखित रूप में मौजूद नहीं हैं, ये उनके अनुयायियों द्वारा सुनी-सुनाई बातों पर आधारित हैं. विज्ञान इन्हें प्रमाणित नहीं करता, लेकिन इतिहास में कई घटनाएं उनके दावों के करीब रही हैं, यानी 2026 मुश्किलों भरा जरूर हो सकता है, लेकिन यह दुनिया का आखिरी साल नहीं है. वैज्ञानिक इन दावों को महज 'संयोग' मानते हैं.