आज हर वाहन पर नंबर प्लेट लगी होती है, लेकिन इसकी शुरुआत सड़क सुरक्षा और वाहन पहचान की जरूरत से हुई थी. 19वीं सदी के आखिर में जब मोटर वाहन सड़कों पर आने लगे, तब सरकारों के सामने उन्हें ट्रैक करने की चुनौती खड़ी हो गई. दुर्घटना या अपराध के बाद वाहन और उसके मालिक की पहचान आसान बनाने के लिए पहचान प्लेट अनिवार्य की गई.
दुनिया की पहली नंबर प्लेट कब आई?

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वाहन पहचान प्लेट की पहली आधिकारिक व्यवस्था 14 अगस्त 1893 को पेरिस, फ्रांस में लागू की गई थी. उस समय शहर में चलने वाले हर वाहन पर ऐसी प्लेट लगाना जरूरी था, जिसमें वाहन नंबर के साथ मालिक का नाम और पता भी दर्ज हो. इससे पुलिस को दुर्घटना या किसी घटना में शामिल वाहन की पहचान करने में मदद मिलती थी.
दूसरे देशों ने कैसे अपनाई यह व्यवस्था?

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फ्रांस के बाद कई देशों ने वाहन पंजीकरण प्रणाली लागू की. जर्मनी ने 1896 में राष्ट्रीय स्तर पर नंबर प्लेट सिस्टम शुरू किया और वाहन पहचान लागू करने वाले शुरुआती देशों में शामिल हो गया. इसके बाद 1898 में नीदरलैंड ने भी राष्ट्रीय ट्रैफिक कानून के तहत नंबर प्लेट और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था शुरू की. ये भी पढ़ें- बारिश में बाइक रोकते समय पहले कौन-सा ब्रेक दबाना चाहिए? एक गलती बन सकती है हादसे की वजह
अमेरिका में नंबर प्लेट सिस्टम की शुरुआत

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संयुक्त राज्य अमेरिका में 1901 में न्यूयॉर्क ने वाहन पहचान से जुड़ा कानून लागू किया. शुरुआती दौर में वाहन मालिक खुद चमड़े, लकड़ी या धातु से प्लेट बनवाते थे. बाद में 1903 में मैसाचुसेट्स ऐसा पहला अमेरिकी राज्य बना, जिसने सरकार द्वारा तैयार की गई आधिकारिक नंबर प्लेट जारी की.
पूरे देश के लिए कब बना एक नियम?

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वाहन पंजीकरण को एक समान बनाने के लिए 1914 में भारतीय मोटर वाहन अधिनियम लागू किया गया. इसी कानून के जरिए पूरे ब्रिटिश भारत में वाहन पंजीकरण के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया और नंबर प्लेट व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू किया गया.
नंबर प्लेट के हर अक्षर और अंक का क्या मतलब होता है?

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नंबर प्लेट पर लिखे हर अक्षर और अंक का अपना महत्व होता है. उदाहरण के लिए TN 06 AB 1234 में पहले दो अक्षर (TN) राज्य का कोड बताते हैं. अगले दो अंक (06) संबंधित जिले या RTO कार्यालय की पहचान दर्शाते हैं. बीच के अक्षर (AB) उस समय की पंजीकरण सीरीज को दिखाते हैं, जबकि अंतिम चार अंक (1234) वाहन की यूनिक पहचान संख्या होते हैं. आज यह पूरा सिस्टम कंप्यूटर आधारित हो चुका है, जिससे हर वाहन को अलग नंबर दिया जाता है. (Images Credit-AI)