क्या आप जानते हैं नंबर प्लेट की शुरुआत किस देश में हुई थी? जवाब चौंका देगा

हर गाड़ी पर लगी नंबर प्लेट की कहानी 130 साल से भी ज्यादा पुरानी है. आखिर नंबर प्लेट की शुरुआत कब हुई, दुनिया में सबसे पहले किस देश ने इसे लागू किया और भारत में इसकी एंट्री कैसे हुई? जानिए नंबर प्लेट के पीछे छिपा पूरा इतिहास और इसके हर अक्षर अंक का मतलब.

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आज हर वाहन पर नंबर प्लेट लगी होती है, लेकिन इसकी शुरुआत सड़क सुरक्षा और वाहन पहचान की जरूरत से हुई थी. 19वीं सदी के आखिर में जब मोटर वाहन सड़कों पर आने लगे, तब सरकारों के सामने उन्हें ट्रैक करने की चुनौती खड़ी हो गई. दुर्घटना या अपराध के बाद वाहन और उसके मालिक की पहचान आसान बनाने के लिए पहचान प्लेट अनिवार्य की गई.

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 दुनिया की पहली नंबर प्लेट कब आई?

 दुनिया की पहली नंबर प्लेट कब आई?2 / 7

वाहन पहचान प्लेट की पहली आधिकारिक व्यवस्था 14 अगस्त 1893 को पेरिस, फ्रांस में लागू की गई थी. उस समय शहर में चलने वाले हर वाहन पर ऐसी प्लेट लगाना जरूरी था, जिसमें वाहन नंबर के साथ मालिक का नाम और पता भी दर्ज हो. इससे पुलिस को दुर्घटना या किसी घटना में शामिल वाहन की पहचान करने में मदद मिलती थी.

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 दूसरे देशों ने कैसे अपनाई यह व्यवस्था?

 दूसरे देशों ने कैसे अपनाई यह व्यवस्था?3 / 7

फ्रांस के बाद कई देशों ने वाहन पंजीकरण प्रणाली लागू की. जर्मनी ने 1896 में राष्ट्रीय स्तर पर नंबर प्लेट सिस्टम शुरू किया और वाहन पहचान लागू करने वाले शुरुआती देशों में शामिल हो गया. इसके बाद 1898 में नीदरलैंड ने भी राष्ट्रीय ट्रैफिक कानून के तहत नंबर प्लेट और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था शुरू की. ये भी पढ़ें- बारिश में बाइक रोकते समय पहले कौन-सा ब्रेक दबाना चाहिए? एक गलती बन सकती है हादसे की वजह  

अमेरिका में नंबर प्लेट सिस्टम की शुरुआत

अमेरिका में नंबर प्लेट सिस्टम की शुरुआत4 / 7

संयुक्त राज्य अमेरिका में 1901 में न्यूयॉर्क ने वाहन पहचान से जुड़ा कानून लागू किया. शुरुआती दौर में वाहन मालिक खुद चमड़े, लकड़ी या धातु से प्लेट बनवाते थे. बाद में 1903 में मैसाचुसेट्स ऐसा पहला अमेरिकी राज्य बना, जिसने सरकार द्वारा तैयार की गई आधिकारिक नंबर प्लेट जारी की.

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भारत में नंबर प्लेट का इतिहास

भारत में नंबर प्लेट का इतिहास5 / 7

भारत में वाहन पंजीकरण की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी. सबसे पहले बॉम्बे में 1901 में वाहन पंजीकरण नियम लागू किए गए. इसके बाद 1903 में बंगाल और 1907 में मद्रास ने भी अपने अपने नियम बनाए. हालांकि उस समय अलग अलग क्षेत्रों में अलग नियम लागू थे. ये भी पढ़ें- बिना लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन चलाएं ये इलेक्ट्रिक स्कूटर! सिर्फ 41 हजार से शुरू है कीमत  

पूरे देश के लिए कब बना एक नियम?

पूरे देश के लिए कब बना एक नियम?6 / 7

वाहन पंजीकरण को एक समान बनाने के लिए 1914 में भारतीय मोटर वाहन अधिनियम लागू किया गया. इसी कानून के जरिए पूरे ब्रिटिश भारत में वाहन पंजीकरण के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया और नंबर प्लेट व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू किया गया.

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नंबर प्लेट के हर अक्षर और अंक का क्या मतलब होता है?

नंबर प्लेट के हर अक्षर और अंक का क्या मतलब होता है?7 / 7

नंबर प्लेट पर लिखे हर अक्षर और अंक का अपना महत्व होता है. उदाहरण के लिए TN 06 AB 1234 में पहले दो अक्षर (TN) राज्य का कोड बताते हैं. अगले दो अंक (06) संबंधित जिले या RTO कार्यालय की पहचान दर्शाते हैं. बीच के अक्षर (AB) उस समय की पंजीकरण सीरीज को दिखाते हैं, जबकि अंतिम चार अंक (1234) वाहन की यूनिक पहचान संख्या होते हैं. आज यह पूरा सिस्टम कंप्यूटर आधारित हो चुका है, जिससे हर वाहन को अलग नंबर दिया जाता है. (Images Credit-AI)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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