बाकी मौसम की तुलना में क्या गर्मी में गाड़ियां ज्यादा पेट्रोल पीती हैं? कितनी सच है ये बात?

क्या आपने भी नोटिस किया है कि गर्मी आते ही आपकी गाड़ी का माइलेज अचानक कम होने लगता है? कई लोग इसे सिर्फ अफवाह मानते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. आइए समझते हैं कि गर्मी में माइलेज पर क्या असर पड़ता है और यह बारिश के मौसम से कितना अलग होता है.

Car petrol
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गर्मी का मौसम आते ही अक्सर यह चर्चा शुरू हो जाती है कि क्या इस समय गाड़ियां ज्यादा पेट्रोल खर्च करती हैं. कुछ लोग इसे सिर्फ एक अफवाह मानते हैं, जबकि कुछ इसे पूरी तरह सच समझते हैं. एसी का बढ़ता इस्तेमाल, फ्यूल वाष्पीकरण और टायर प्रेशर जैसे कई छोटे-छोटे कारण मिलकर आपकी जेब पर असर डालते हैं.

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एसी का बढ़ता इस्तेमाल सबसे बड़ा कारण

एसी का बढ़ता इस्तेमाल सबसे बड़ा कारण2 / 7

गर्मी में जब तापमान 40 डिग्री या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो बिना एसी के सफर करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में एसी लगातार चलाना पड़ता है, जिससे इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है. एसी का कंप्रेसर गर्मी में ज्यादा मेहनत करता है क्योंकि उसे बाहर की तेज गर्मी के मुकाबले केबिन को ठंडा रखना होता है. इसी वजह से पेट्रोल की खपत बढ़ जाती है और माइलेज कम महसूस होता है.

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फ्यूल का वाष्पीकरण भी बढ़ाता है खपत

फ्यूल का वाष्पीकरण भी बढ़ाता है खपत3 / 7

गर्मी के मौसम में फ्यूल इवेपोरेशन यानी पेट्रोल के वाष्पित होने की समस्या भी देखने को मिलती है. अगर वाहन को धूप में पार्क किया जाए तो टैंक में मौजूद पेट्रोल गर्म होकर धीरे-धीरे वाष्पित हो सकता है, जिससे फ्यूल की मात्रा पर असर पड़ता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मी में गाड़ी को हमेशा छांव में पार्क किया जाए, ताकि फ्यूल की बर्बादी कम हो और केबिन भी ज्यादा गर्म न हो.

क्या फ्यूल की डेंसिटी सच में बदलती है?

क्या फ्यूल की डेंसिटी सच में बदलती है?4 / 7

सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि गर्मी में पेट्रोल की डेंसिटी कम हो जाती है, जिससे कम फ्यूल मिलता है. ठंडे तापमान में फ्यूल ज्यादा घना होता है, इसलिए सुबह या रात के समय फ्यूल भरवाने पर थोड़ा ज्यादा फ्यूल मिलने की बात कही जाती है. हालांकि यह फर्क बहुत मामूली होता है और रोजमर्रा की ड्राइविंग पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ता, लेकिन तापमान का प्रभाव पूरी तरह गलत भी नहीं है. ये भी पढ़ें- ऑटो में सिर्फ 3 पहिए ही क्यों होते हैं 4 क्यों नहीं? असली वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

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 बारिश के मौसम से तुलना कैसी है?

 बारिश के मौसम से तुलना कैसी है?5 / 7

बारिश के मौसम में तापमान सामान्यतः कम रहता है, जिससे एसी पर निर्भरता घट जाती है और इंजन पर लोड भी कम होता है. हालांकि बारिश में पानी भरी सड़कें, बार-बार ब्रेक लगाना और धीमी ड्राइविंग जैसी परिस्थितियां माइलेज को प्रभावित कर सकती हैं. फिर भी कुल मिलाकर देखा जाए तो गर्मी में एसी का दबाव और फ्यूल वाष्पीकरण की समस्या बारिश की तुलना में ज्यादा असर डालती है. ये भी पढ़ें- चलती कार के ब्रेक हो जाएं फेल, तो भूलकर भी न करें ये गलती, ऐसे बच सकती है जान

टायर प्रेशर का भी होता है बड़ा असर

टायर प्रेशर का भी होता है बड़ा असर6 / 7

गर्मी में तापमान बढ़ने से टायर के अंदर की हवा फैलती है, जिससे प्रेशर असंतुलित हो सकता है. इससे गाड़ी की रोलिंग रेजिस्टेंस बदल जाती है और माइलेज पर असर पड़ता है. इसलिए गर्मी के मौसम में टायर प्रेशर की नियमित जांच जरूरी होती है, ताकि फ्यूल एफिशिएंसी सही बनी रहे. ये भी पढ़ें- गाड़ी पार्क करते समय वाइपर उठाना क्यों है जरूरी? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

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क्या है सच्चाई?

क्या है सच्चाई?7 / 7

यह कहना गलत नहीं होगा कि गर्मी के मौसम में गाड़ियां थोड़ा ज्यादा पेट्रोल खर्च करती हैं. हालांकि यह फर्क बहुत बड़ा नहीं होता, लेकिन एसी का इस्तेमाल, फ्यूल वाष्पीकरण और टायर प्रेशर जैसे कारण मिलकर माइलेज को प्रभावित करते हैं. अगर गाड़ी को सही तरीके से मेंटेन किया जाए, तो इस असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है. (All Images Credit- Pexels)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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