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आज की मॉडर्न कारें भले ही टेक्नोलॉजी से भरपूर हों, लेकिन उनकी नींव कई दशक पहले रखी जा चुकी थी. उस दौर में कुछ ऐसी कारें आईं, जिन्होंने अपने समय से कहीं आगे जाकर नए-नए प्रयोग किए. ये गाड़ियां भले ही उस समय ज्यादा पॉपुलर न हुई हों, लेकिन इन्होंने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की दिशा बदल दी. आज की कारों में जो फीचर्स आपको सामान्य लगते हैं, उनकी शुरुआत इन्हीं आइकॉनिक मॉडल्स से हुई थी.
लैंबॉर्गिनी काउंटैच (Lamborghini Countach)

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1970 के दशक में आई यह सुपरकार डिजाइन और परफॉर्मेंस दोनों के मामले में गेमचेंजर साबित हुई. इसका एग्रेसिव लुक, लो-हाइट बॉडी और V12 इंजन उस समय किसी सपने जैसा था. यह कार करीब 290 किमी/घंटा की टॉप स्पीड तक पहुंच सकती थी, जो आज भी प्रभावशाली मानी जाती है. हालांकि, इसकी ड्राइविंग आसान नहीं थी, लेकिन इसके डिजाइन ने फेरारी जैसी कंपनियों को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया.
होंडा इनसाइट (Honda Insight)

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यह कार हाइब्रिड टेक्नोलॉजी की दुनिया में मील का पत्थर साबित हुई. इसे शुरुआत से ही हाइब्रिड सिस्टम के साथ डिजाइन किया गया था, जिसमें 1-लीटर 3-सिलेंडर इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का कॉम्बिनेशन दिया गया था. इसका मकसद बेहतर माइलेज और कम ईंधन खपत था. आज जो हाइब्रिड कारें इतनी लोकप्रिय हैं, उनकी शुरुआत इसी सोच से हुई थी.
बुगाटी टाइप 35 (Bugatti Type 35)

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1920 के दशक में जब सड़कें और गाड़ियां दोनों शुरुआती दौर में थीं, तब यह कार रेसिंग दुनिया की बादशाह बनी. केवल 725 किलो वजन वाली इस कार को एल्युमिनियम से बनाया गया था, जिससे यह बेहद हल्की और तेज थी. इसका इंजन 140 हॉर्सपावर की ताकत देता था और यह 210 किमी/घंटा की स्पीड तक जा सकती थी. यही वजह है कि इसने 1924 से 1930 के बीच 2,000 से ज्यादा रेस जीतकर इतिहास रच दिया.
एएमसी ईगल (AMC Eagle)

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आज की क्रॉसओवर SUV सेगमेंट की शुरुआत इसी कार से मानी जाती है. 1980 में लॉन्च हुई इस कार में पहली बार फोर-व्हील ड्राइव सिस्टम को एक सामान्य पैसेंजर कार में दिया गया था. यह कार शहर की सड़कों के साथ-साथ खराब रास्तों पर भी आसानी से चल सकती थी. यही कॉन्सेप्ट आगे चलकर आज की SUVs और क्रॉसओवर गाड़ियों की पहचान बन गया.