ट्यूबलेस टायर पंचर होने पर कितने किलोमीटर चल सकती है गाड़ी? जानिए सच

ट्यूबलेस टायर पंचर हो जाए तो क्या तुरंत गाड़ी रोकनी चाहिए? या फिर कुछ दूरी तक चला सकते हैं? ज्यादातर लोग इस सवाल का सही जवाब नहीं जानते. आखिर पंचर होने के बाद ये टायर कितनी दूर तक चल सकते हैं और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

Tubeless tyre
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आजकल गाड़ियों में ट्यूबलेस टायर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और इसकी वजह भी साफ है यह पुराने टायरों के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक होते हैं. पहले जहां पंचर होते ही गाड़ी रोकनी पड़ती थी, वहीं अब ट्यूबलेस टायर आपको थोड़ा समय और दूरी दोनों दे देते हैं.

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ट्यूबलेस टायर क्या होते हैं?

ट्यूबलेस टायर क्या होते हैं?2 / 7

ट्यूबलेस टायर में अलग से ट्यूब नहीं होती. इसकी अंदरूनी सतह पर एक खास एयरटाइट परत होती है, जो हवा को बाहर निकलने से रोकती है. टायर और रिम के बीच ऐसा सील बनता है कि बिना ट्यूब के भी हवा का दबाव बना रहता है.

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पंचर होने पर तुरंत हवा नहीं निकलती

पंचर होने पर तुरंत हवा नहीं निकलती3 / 7

ट्यूबलेस टायर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि पंचर होने के बाद भी हवा अचानक बाहर नहीं निकलती. इससे ड्राइवर को गाड़ी संभालने और सुरक्षित जगह तक पहुंचने का समय मिल जाता है.

पंचर के बाद कितनी दूरी तय कर सकते हैं

पंचर के बाद कितनी दूरी तय कर सकते हैं4 / 7

एक्सपर्टस के मुताबिक अगर टायर में कील या कोई छोटी चीज फंसी हुई है, तो आप आमतौर पर 50 से 100 किलोमीटर तक कम स्पीड में गाड़ी चला सकते हैं. यह दूरी टायर की हालत और हवा के दबाव पर निर्भर करती है.

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कब गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है

कब गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है5 / 7

अगर टायर का प्रेशर बहुत कम हो गया है या उसमें बड़ा कट लग गया है, तो गाड़ी चलाना जोखिम भरा हो सकता है. ऐसी स्थिति में टायर और रिम दोनों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए तुरंत रुककर रिपेयर करवाना बेहतर है.

ट्यूबलेस टायर के बड़े फायदे

ट्यूबलेस टायर के बड़े फायदे6 / 7

इन टायरों में हवा धीरे-धीरे निकलती है, जिससे अचानक कंट्रोल खोने का खतरा कम होता है. ये हल्के होते हैं, जिससे फ्यूल की बचत होती है और टायर ज्यादा गर्म भी नहीं होते. इसके अलावा छोटे पंचर को बिना टायर निकाले आसानी से ठीक किया जा सकता है.

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बेहतर पकड़ और लंबी उम्र

बेहतर पकड़ और लंबी उम्र7 / 7

ट्यूबलेस टायर तेज रफ्तार में भी अच्छी ग्रिप देते हैं और सड़क पर बेहतर संतुलन बनाए रखते हैं. ट्यूब न होने की वजह से इनमें कम घर्षण होता है, जिससे इनकी लाइफ भी लंबी होती है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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