गाड़ी चलाते समय जब फ्यूल गेज में E (Empty) दिखाई देता है या लो फ्यूल वार्निंग लाइट जलने लगती है, तो कई लोगों को लगता है कि अब टैंक में बिल्कुल भी पेट्रोल नहीं बचा है. लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग है. आधुनिक कारों में फ्यूल गेज और वार्निंग सिस्टम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि ड्राइवर को समय रहते पेट्रोल भरवाने का मौका मिल सके. हालांकि, E दिखने के बाद कितनी दूरी तय की जा सकती है, यह हर कार में अलग-अलग हो सकता है.
फ्यूल गेज कैसे काम करता है?

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कार का फ्यूल गेज सीधे फ्यूल टैंक से जुड़ा होता है. टैंक के अंदर लगे फ्लोट और सेंसर पेट्रोल या डीजल के स्तर को मापकर गेज तक जानकारी पहुंचाते हैं. गेज में F (Full) का मतलब टैंक भरा होना होता है, जबकि E (Empty) दर्शाता है कि ईंधन काफी कम बचा है. वहीं लो फ्यूल लाइट का जलना इस बात का संकेत है कि जल्द से जल्द फ्यूल भरवाना चाहिए. E दिखने का मतलब हमेशा टैंक का पूरी तरह खाली होना नहीं होता.
लो फ्यूल लाइट जलने पर कितना पेट्रोल बचता है?

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जब गाड़ी में लो फ्यूल लाइट ऑन होती है, तब भी टैंक में कुछ मात्रा में ईंधन रिजर्व के तौर पर मौजूद रहता है. इसका उद्देश्य ड्राइवर को नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचने का समय देना होता है. आमतौर पर लो फ्यूल लाइट तब जलती है जब टैंक में लगभग 4 से 15 लीटर तक पेट्रोल या डीजल बचा होता है. हालांकि यह मात्रा वाहन के मॉडल और कंपनी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. इसलिए लाइट जलने के बाद भी गाड़ी कुछ दूरी तक चल सकती है, लेकिन ज्यादा देर तक ऐसा करना सही नहीं माना जाता. ये भी पढ़ें- कार खरीदने वालों को झटका! 1 जुलाई से महंगी होंगी इस कंपनी की गाड़ियां, जानें कितनी बढ़ेगी कीमत
अलग-अलग कारों में कितना ईंधन रिजर्व रहता है?

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कुछ पॉपुलर कार मॉडलों पर किए गए अध्ययन बताते हैं कि लो फ्यूल लाइट जलने के बाद भी टैंक में पर्याप्त ईंधन बचा हो सकता है. उदाहरण के तौर पर Nissan Altima और Nissan Rogue में लगभग 3 गैलन फ्यूल रिजर्व रहता है. वहीं Toyota Prius में करीब 1.6 गैलन और Honda Accord में लगभग 2.6 गैलन ईंधन बचा हो सकता है. इसी वजह से लो फ्यूल लाइट ऑन होने के बाद भी कई कारें 70 से 110 मील तक चल सकती हैं. हालांकि वास्तविक दूरी ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और वाहन मॉडल पर निर्भर करती है.
कम पेट्रोल में गाड़ी चलाने के नुकसान

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बार-बार टैंक लगभग खाली होने तक गाड़ी चलाना वाहन के लिए नुकसानदायक हो सकता है. पेट्रोल फ्यूल पंप को ठंडा रखने में भी मदद करता है. जब टैंक में ईंधन बहुत कम रह जाता है, तो फ्यूल पंप ज्यादा गर्म हो सकता है और उसकी उम्र कम हो सकती है. इसके अलावा तेज मोड़, अचानक ब्रेक लगाने या खराब सड़कों पर चलने के दौरान फ्यूल सप्लाई बाधित होने का खतरा भी बढ़ जाता है. अगर पेट्रोल पूरी तरह खत्म होने से गाड़ी बंद हो जाए, तो फ्यूल सिस्टम के अन्य हिस्सों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है. ये भी पढ़ें- बारिश में बाइक रोकते समय पहले कौन-सा ब्रेक दबाना चाहिए? एक गलती बन सकती है हादसे की वजह
0 Miles Left दिखने पर क्या गाड़ी चल सकती है?

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आजकल कई आधुनिक कारों में डिजिटल डिस्प्ले पर Distance to Empty या 0 Miles Left जैसी जानकारी दिखाई जाती है. कुछ मामलों में 0 दिखने के बाद भी वाहन थोड़ी दूरी तक चल सकता है, लेकिन इसकी कोई निश्चित गारंटी नहीं होती. विशेषज्ञों के अनुसार कुछ कारें 10 से 15 मील तक अतिरिक्त चल सकती हैं. यह पूरी तरह सड़क, ट्रैफिक, ड्राइविंग स्टाइल और वाहन की स्थिति पर निर्भर करता है.
लो फ्यूल लाइट के बाद कितनी दूरी तय की जा सकती है?

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लो फ्यूल लाइट जलने के बाद गाड़ी कितनी दूर तक जाएगी, इसका कोई एक तय जवाब नहीं है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई कारें 30 से 45 मील तक आसानी से चल सकती हैं. कुछ मॉडल 60 मील या उससे अधिक दूरी भी तय कर लेते हैं. वहीं कुछ वाहनों में केवल 25 से 30 मील तक का ही रिजर्व फ्यूल बचता है. इसलिए लो फ्यूल लाइट जलने के बाद जल्द से जल्द पेट्रोल भरवा लेना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है. (Images Credit-Freepik)