कब बदलाना चाहिए कार वाइपर? ये 5 संकेत दिखें तो तुरंत बदलें, नहीं तो हो सकता है बड़ा खतरा

क्या आपकी कार के वाइपर बारिश में तेज आवाज करते हैं? हर बार नया वाइपर खरीदने से पहले ये आसान उपाय जरूर जान लें. कई बार सिर्फ सफाई और छोटी-सी सेटिंग से समस्या दूर हो सकती है. जानिए कब वाइपर को बदलना जरूरी हो जाता है.

Car Wiper
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मानसून के दौरान कई कार चालकों को वाइपर से आने वाली चूं-चूं या खड़खड़ाहट की आवाज परेशान करती है. इसकी सबसे बड़ी वजह वाइपर की रबर का सख्त या घिस जाना होती है. गर्मियों की तेज धूप रबर को सुखा देती है, जिससे उसमें दरारें पड़ने लगती हैं. बारिश शुरू होने पर यही रबर शीशे से रगड़ खाकर आवाज पैदा करती है. इसके अलावा विंडशील्ड पर जमा धूल और गंदगी भी इस समस्या की वजह बन सकती है.

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वाइपर बदलने से पहले करें ये आसान काम

वाइपर बदलने से पहले करें ये आसान काम2 / 6

हर बार आवाज आने पर नया वाइपर खरीदना जरूरी नहीं होता. कई बार सिर्फ सफाई करने से ही समस्या खत्म हो जाती है. हल्के साबुन वाले पानी में कपड़ा भिगोकर वाइपर की रबर को अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद किसी ग्लास क्लीनर की मदद से विंडशील्ड साफ कर लें. ध्यान रखें कि अमोनिया वाले क्लीनर का इस्तेमाल न करें, क्योंकि वे रबर को और ज्यादा सूखा सकते हैं.

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वाइपर लिक्विड क्यों है जरूरी?

वाइपर लिक्विड क्यों है जरूरी?3 / 6

कई लोग सोचते हैं कि बारिश का पानी ही वाइपर के लिए काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है. बारिश के पानी में धूल और गंदगी मिली होती है, जो शीशे पर चिपक जाती है. वाइपर लिक्विड शीशे को स्मूद बनाता है, जिससे वाइपर आसानी से चलता है और आवाज कम होती है. साथ ही यह रबर को जल्दी सख्त होने से भी बचाता है. ये भी पढ़ें- सुबह पेट्रोल भरवाने से क्या मिलता है ज्यादा तेल, कितना सच है ये सालों पुराना दावा?

वाइपर की डंडी भी हो सकती है वजह

वाइपर की डंडी भी हो सकती है वजह4 / 6

कई बार समस्या रबर में नहीं बल्कि वाइपर की डंडी में होती है. यदि डंडी टेढ़ी या ढीली हो जाए तो वाइपर शीशे पर सही तरीके से नहीं बैठता और आवाज करने लगता है. वाइपर को उठाकर देखें कि वह शीशे पर लगभग 90 डिग्री के कोण पर है या नहीं. अगर हल्का टेढ़ापन दिखे तो सावधानी से उसे सीधा किया जा सकता है. ये भी पढ़ें- Maruti WagonR Flex Fuel Price: देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल हैचबैक की कीमत आई सामने, जानिए क्या है खास

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सख्त रबर को ऐसे बनाएं मुलायम

सख्त रबर को ऐसे बनाएं मुलायम5 / 6

अगर वाइपर की रबर सख्त हो गई है लेकिन उसमें दरारें नहीं आई हैं, तो उसे तुरंत बदलने की जरूरत नहीं है. सिलिकॉन बेस्ड ऑयल को कपड़े पर लगाकर रबर पर हल्के हाथ से रगड़ें. इससे रबर की लचक वापस आने में मदद मिल सकती है. बाजार में इसके लिए खास स्प्रे भी मिलते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.

कब समझें कि नया वाइपर लगाने का समय आ गया?

कब समझें कि नया वाइपर लगाने का समय आ गया?6 / 6

अगर सफाई, वाइपर लिक्विड और अन्य सभी उपाय अपनाने के बाद भी आवाज बंद नहीं होती, तो वाइपर बदलना ही सबसे सही विकल्प है. रबर में दरारें दिखना, रबर के टुकड़े निकलना या वाइपर चलने के बाद शीशे पर धारियां रह जाना इस बात के संकेत हैं कि वाइपर अब अपनी उम्र पूरी कर चुका है. बारिश में खराब वाइपर के साथ ड्राइविंग करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे सामने का दृश्य साफ नहीं दिखता और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. (Images Credit- Freepik/Pexels)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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