मानसून के दौरान कई कार चालकों को वाइपर से आने वाली चूं-चूं या खड़खड़ाहट की आवाज परेशान करती है. इसकी सबसे बड़ी वजह वाइपर की रबर का सख्त या घिस जाना होती है. गर्मियों की तेज धूप रबर को सुखा देती है, जिससे उसमें दरारें पड़ने लगती हैं. बारिश शुरू होने पर यही रबर शीशे से रगड़ खाकर आवाज पैदा करती है. इसके अलावा विंडशील्ड पर जमा धूल और गंदगी भी इस समस्या की वजह बन सकती है.
वाइपर बदलने से पहले करें ये आसान काम

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हर बार आवाज आने पर नया वाइपर खरीदना जरूरी नहीं होता. कई बार सिर्फ सफाई करने से ही समस्या खत्म हो जाती है. हल्के साबुन वाले पानी में कपड़ा भिगोकर वाइपर की रबर को अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद किसी ग्लास क्लीनर की मदद से विंडशील्ड साफ कर लें. ध्यान रखें कि अमोनिया वाले क्लीनर का इस्तेमाल न करें, क्योंकि वे रबर को और ज्यादा सूखा सकते हैं.
वाइपर लिक्विड क्यों है जरूरी?

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कई लोग सोचते हैं कि बारिश का पानी ही वाइपर के लिए काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है. बारिश के पानी में धूल और गंदगी मिली होती है, जो शीशे पर चिपक जाती है. वाइपर लिक्विड शीशे को स्मूद बनाता है, जिससे वाइपर आसानी से चलता है और आवाज कम होती है. साथ ही यह रबर को जल्दी सख्त होने से भी बचाता है. ये भी पढ़ें- सुबह पेट्रोल भरवाने से क्या मिलता है ज्यादा तेल, कितना सच है ये सालों पुराना दावा?
सख्त रबर को ऐसे बनाएं मुलायम

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अगर वाइपर की रबर सख्त हो गई है लेकिन उसमें दरारें नहीं आई हैं, तो उसे तुरंत बदलने की जरूरत नहीं है. सिलिकॉन बेस्ड ऑयल को कपड़े पर लगाकर रबर पर हल्के हाथ से रगड़ें. इससे रबर की लचक वापस आने में मदद मिल सकती है. बाजार में इसके लिए खास स्प्रे भी मिलते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.
कब समझें कि नया वाइपर लगाने का समय आ गया?

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अगर सफाई, वाइपर लिक्विड और अन्य सभी उपाय अपनाने के बाद भी आवाज बंद नहीं होती, तो वाइपर बदलना ही सबसे सही विकल्प है. रबर में दरारें दिखना, रबर के टुकड़े निकलना या वाइपर चलने के बाद शीशे पर धारियां रह जाना इस बात के संकेत हैं कि वाइपर अब अपनी उम्र पूरी कर चुका है. बारिश में खराब वाइपर के साथ ड्राइविंग करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इससे सामने का दृश्य साफ नहीं दिखता और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. (Images Credit- Freepik/Pexels)