कई लोग मानते हैं कि अगर कार ज्यादा नहीं चली तो सर्विस कराने की जरूरत नहीं है. लेकिन कार की देखभाल सिर्फ किलोमीटर के आधार पर नहीं, बल्कि समय के हिसाब से भी जरूरी होती है. लंबे समय तक खड़ी रहने पर भी कई पार्ट्स की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है.
कंपनियां क्या सलाह देती हैं?

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ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार अधिकांश कार निर्माता 10,000 किलोमीटर या 1 साल, जो भी पहले पूरा हो, उस समय सर्विस कराने की सलाह देते हैं. यह नियम उन कारों पर भी लागू होता है जो बहुत कम इस्तेमाल होती हैं.
नई कारों का सर्विस शेड्यूल क्या होता है?

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आमतौर पर नई कार की पहली सर्विस लगभग 1,000 किलोमीटर पर होती है. इसके बाद दूसरी सर्विस 5,000 किलोमीटर या 6 महीने और तीसरी सर्विस 10,000 किलोमीटर या 1 साल के भीतर कराई जाती है. हालांकि अलग-अलग कंपनियों का शेड्यूल थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए कार का मैनुअल जरूर देखें.
सर्विस में सिर्फ ऑयल नहीं बदलता

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कार सर्विस के दौरान केवल इंजन ऑयल ही नहीं बदला जाता. इसमें ऑयल फिल्टर, एयर फिल्टर, ब्रेक सिस्टम, बैटरी, टायर प्रेशर, सस्पेंशन, कूलेंट लेवल, वाइपर, लाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भी जांच की जाती है. कई सर्विस सेंटर इंजन और सेंसर की डायग्नोस्टिक स्कैनिंग भी करते हैं.
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

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अगर कार से असामान्य आवाज आने लगे, माइलेज अचानक कम हो जाए, डैशबोर्ड पर चेक इंजन लाइट जल जाए, स्टार्ट करने में परेशानी हो या ब्रेक लगाते समय कंपन महसूस हो, तो तय सर्विस डेट का इंतजार न करें. ऐसे संकेत बताते हैं कि कार को तुरंत जांच और सर्विस की जरूरत है. (Images Credit-Freepik)