आपकी कार कम चलती है? फिर भी सर्विस मिस करना पड़ सकता है भारी, जानिए कितने महीने में करानी चाहिए सर्विस
क्या आपकी कार महीने में सिर्फ कुछ ही बार सड़क पर निकलती है? अगर हां, तो यह मत समझिए कि सर्विस की जरूरत नहीं है. कम चलने वाली कारों में भी इंजन ऑयल, बैटरी और कई जरूरी पार्ट्स समय के साथ खराब हो सकते हैं. जानिए कार की सर्विस को लेकर एक्सपर्ट्स क्या सलाह देते हैं और किन संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

कई लोग मानते हैं कि अगर कार ज्यादा नहीं चली तो सर्विस कराने की जरूरत नहीं है. लेकिन कार की देखभाल सिर्फ किलोमीटर के आधार पर नहीं, बल्कि समय के हिसाब से भी जरूरी होती है. लंबे समय तक खड़ी रहने पर भी कई पार्ट्स की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है.
कंपनियां क्या सलाह देती हैं?
2 / 7ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार अधिकांश कार निर्माता 10,000 किलोमीटर या 1 साल, जो भी पहले पूरा हो, उस समय सर्विस कराने की सलाह देते हैं. यह नियम उन कारों पर भी लागू होता है जो बहुत कम इस्तेमाल होती हैं.
खड़ी कार में भी होती हैं ये समस्याएं
3 / 7कार का उपयोग कम होने पर भी इंजन ऑयल धीरे-धीरे अपनी गुणवत्ता खो सकता है. इसके अलावा एयर फिल्टर में धूल जमा हो सकती है, बैटरी की क्षमता कम हो सकती है और ब्रेक ऑयल व कूलेंट का असर भी समय के साथ घटने लगता है. इसलिए समय पर सर्विस कराना जरूरी माना जाता है. ये भी पढ़ें- कब बदलाना चाहिए कार वाइपर? ये 5 संकेत दिखें तो तुरंत बदलें, नहीं तो हो सकता है बड़ा खतरा
नई कारों का सर्विस शेड्यूल क्या होता है?
4 / 7आमतौर पर नई कार की पहली सर्विस लगभग 1,000 किलोमीटर पर होती है. इसके बाद दूसरी सर्विस 5,000 किलोमीटर या 6 महीने और तीसरी सर्विस 10,000 किलोमीटर या 1 साल के भीतर कराई जाती है. हालांकि अलग-अलग कंपनियों का शेड्यूल थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए कार का मैनुअल जरूर देखें.
पुरानी कारों को ज्यादा देखभाल की जरूरत
5 / 7अगर आपकी कार 5 साल से ज्यादा पुरानी है या 70,000 किलोमीटर से अधिक चल चुकी है, तो उसके कई पार्ट्स तेजी से घिसने लगते हैं. ऐसे मामलों में एक्सपर्ट्स हर 5,000 किलोमीटर या 3 से 6 महीने के अंदर सर्विस कराने की सलाह देते हैं. ये भी पढ़ें- सुबह पेट्रोल भरवाने से क्या मिलता है ज्यादा तेल, कितना सच है ये सालों पुराना दावा?
सर्विस में सिर्फ ऑयल नहीं बदलता
6 / 7कार सर्विस के दौरान केवल इंजन ऑयल ही नहीं बदला जाता. इसमें ऑयल फिल्टर, एयर फिल्टर, ब्रेक सिस्टम, बैटरी, टायर प्रेशर, सस्पेंशन, कूलेंट लेवल, वाइपर, लाइट्स और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भी जांच की जाती है. कई सर्विस सेंटर इंजन और सेंसर की डायग्नोस्टिक स्कैनिंग भी करते हैं.
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
7 / 7अगर कार से असामान्य आवाज आने लगे, माइलेज अचानक कम हो जाए, डैशबोर्ड पर चेक इंजन लाइट जल जाए, स्टार्ट करने में परेशानी हो या ब्रेक लगाते समय कंपन महसूस हो, तो तय सर्विस डेट का इंतजार न करें. ऐसे संकेत बताते हैं कि कार को तुरंत जांच और सर्विस की जरूरत है. (Images Credit-Freepik)