E20 और E85 जैसे फ्यूल को लेकर लोगों में काफी भ्रम देखा जा रहा है. कई ड्राइवर यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उनकी गाड़ी के लिए कौन सा फ्यूल सही है. असल में यहां मुख्य मुद्दा यह है कि गलत फ्यूल का इस्तेमाल इंजन पर असर डाल सकता है, खासकर जब पेट्रोल और डीजल को लेकर गलती हो जाए.
पेट्रोल और डीजल की प्रकृति में क्या अंतर है?

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पेट्रोल और डीजल दोनों के गुण अलग होते हैं. डीजल कम ज्वलनशील होता है, जबकि पेट्रोल ज्यादा आसानी से जल जाता है और उसे केवल एक चिंगारी की जरूरत होती है. डीजल में लुब्रिकेशन के गुण भी होते हैं, जो इंजन के पार्ट्स को स्मूद तरीके से काम करने में मदद करते हैं.
ऑक्टेन और सीटेन रेटिंग क्या बताती है?

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पेट्रोल में आमतौर पर 91-95 ऑक्टेन रेटिंग पाई जाती है, जबकि इसमें सीटेन की मात्रा कम होती है. दूसरी तरफ, डीजल में 45-55 सीटेन रेटिंग अधिक होती है और ऑक्टेन वैल्यू कम होती है. यह अंतर ही दोनों फ्यूल को अलग-अलग इंजनों के लिए उपयुक्त बनाता है.
अगर पेट्रोल कार में गलती से डीजल भर जाए तो क्या होगा?

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अगर पेट्रोल इंजन वाली कार में डीजल भर दिया जाए, तो इंजन को सही तरीके से फ्यूल समझने और जलाने में परेशानी होती है. अगर मिश्रित फ्यूल थोड़ी मात्रा में हो, तो नुकसान कम हो सकता है, लेकिन शुद्ध डीजल से इंजन पर असर ज्यादा पड़ सकता है और परफॉर्मेंस बिगड़ सकती है. ये भी पढ़ें- कार सर्विसिंग में क्या बदलना जरूरी है? जानिए पूरी चेकलिस्ट
इंजन डैमेज का खतरा कितना गंभीर हो सकता है?

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अगर गलत फ्यूल के साथ गाड़ी चलाई जाए, तो फ्यूल लाइन, पंप और इंजन पार्ट्स में घर्षण बढ़ सकता है. इससे इंजन डैमेज या इंजन सीज होने तक की स्थिति बन सकती है. इसलिए गलती का पता चलते ही इंजन स्टार्ट नहीं करना चाहिए.
गलती होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

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अगर गलत फ्यूल भर गया है, तो गाड़ी को बिल्कुल स्टार्ट न करें. तुरंत उसे मैकेनिक या सर्विस सेंटर तक पहुंचाएं और टैंक से पूरा फ्यूल निकालकर सिस्टम की अच्छी तरह सफाई करवाएं, ताकि आगे किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके.