कार को धूप से बचाने के चक्कर में न कर बैठें ये गलती, हो सकता है हजारों का चालान
कार की खिड़कियों पर ब्लैक फिल्म लगवाना स्टाइल जरूर बढ़ा सकता है, लेकिन यह आपको भारी चालान और कानूनी परेशानी में डाल सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर सख्त नियम बनाए हैं. जानिए कितनी टिंटेड फिल्म है लीगल, कितना कट सकता है चालान और किन लोगों को मिलती है छूट.

गर्मी और धूप से बचने, प्राइवेसी बढ़ाने या कार को स्टाइलिश लुक देने के लिए कई लोग कार के शीशों पर ब्लैक या टिंटेड फिल्म लगवा लेते हैं. लेकिन यही छोटा मॉडिफिकेशन कई बार कानूनी परेशानी की वजह बन जाता है. पुलिस ऐसे मामलों में चालान काट सकती है और फिल्म मौके पर ही हटवाई जा सकती है. हर साल इस नियम के उल्लंघन पर हजारों चालान जारी किए जाते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
2 / 8भारत में कार के शीशों पर बाहर से ब्लैक, स्मोक्ड, कलर्ड या रिफ्लेक्टिव फिल्म लगाना गैरकानूनी है. साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ आदेश दिया था कि वाहन खरीदने के बाद किसी भी तरह की अतिरिक्त फिल्म नहीं लगाई जा सकती. यह फैसला सड़क सुरक्षा और अपराध रोकने को ध्यान में रखकर लिया गया था.
क्या होता है VLT नियम?
3 / 8कार के शीशों पर विजिबल लाइट ट्रांसमिशन यानी VLT नियम लागू होता है. इसके अनुसार फ्रंट और रियर विंडशील्ड में कम से कम 70% रोशनी अंदर आनी चाहिए, जबकि साइड विंडो में 50% विजिबिलिटी जरूरी है. कंपनियां फैक्ट्री फिटेड हल्के टिंट वाले ग्लास दे सकती हैं, लेकिन वे तय मानकों के भीतर होने चाहिए.
ब्लैक फिल्म से क्यों बढ़ता है खतरा?
4 / 8ब्लैक फिल्म की वजह से रात, बारिश या धुंध के समय बाहर देखने में दिक्कत हो सकती है. इससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा वाहन के अंदर की गतिविधियां बाहर से साफ दिखाई नहीं देतीं, जिससे अपराध या संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है. ये भी पढ़ें- चलती कार में जिंदा जले 4 लोग, भीषण गर्मी में ड्राइविंग के समय भूलकर भी न करें ये गलती, ऐसे बचाएं अपनी जान
कितना कट सकता है चालान?
5 / 8अगर आपकी कार में तय सीमा से ज्यादा टिंटेड ग्लास या ब्लैक फिल्म पाई जाती है, तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान काटा जा सकता है. कई राज्यों में जुर्माना 100 रुपये से 1000 रुपये तक है, जबकि कुछ जगहों पर यह 2000 रुपये तक पहुंच सकता है. बार-बार नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई भी हो सकती है.
किन लोगों को मिलती है छूट?
6 / 8सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक केवल Z और Z+ सुरक्षा श्रेणी वाले लोगों या सुरक्षा एजेंसियों से मंजूरी प्राप्त वाहनों को ही ब्लैक फिल्म की छूट मिलती है. मंत्री, सांसद या बड़े पदों पर बैठे लोग भी अपनी निजी कारों में मनमर्जी से ब्लैक फिल्म नहीं लगवा सकते. ये भी पढ़ें- आपकी कार क्यों पी रही है ज्यादा पेट्रोल? ड्राइविंग में कर रहे ये बड़ी गलतियां
इंश्योरेंस क्लेम पर भी पड़ सकता है असर
7 / 8अगर कार में गैरकानूनी ब्लैक फिल्म लगी है और वाहन किसी हादसे या कानूनी मामले में शामिल हो जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनी क्लेम कम कर सकती है या पूरी तरह खारिज भी कर सकती है. कंपनियां इसे नियमों का उल्लंघन मानती हैं.
क्या इलेक्ट्रिक और लग्जरी कारों के लिए नियम अलग हैं?
8 / 8नहीं, इलेक्ट्रिक कार हो या महंगी लग्जरी कार, ब्लैक फिल्म को लेकर सभी वाहनों पर एक जैसे नियम लागू होते हैं. कानून के सामने हर वाहन बराबर माना जाता है. ये भी पढ़ें- लॉन्च हुई नई Tata Tiago, 6 एयरबैग्स, CNG AMT और EV वारंटी इसमें सबकुछ मिलेगा; बस इतनी है कीमत



















