संसद के मानसून सत्र में जारी विरोध, गतिरोध और हंगामे के बीच बुधवार को संसद के गलियारों में जिस मुद्दे की सबसे ज्यादा चर्चा रही, वह था परिसीमन (Delimitation) बिल. राजनीतिक हलकों में संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार अगले सप्ताह इस अहम बिल को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है. हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक ना तो कोई आधिकारिक ऐलान हुआ है और ना ही इसे सदन के सूचीबद्ध कार्य में शामिल किया गया है.

सबकी नजर DMK पर

अगर सरकार यह बिल लाती है तो सबसे बड़ा सवाल होगा कि DMK का रुख क्या होगा? पिछली बार जब परिसीमन का मुद्दा उठा था, तब डीएमके ने इसका जोरदार विरोध किया था. लेकिन इस बार पार्टी के तेवर पहले जैसे नहीं दिख रहे हैं.

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जब डीएमके सांसद तिरुचि शिवा से पूछा गया कि पार्टी इस बार बिल का विरोध करेगी या समर्थन? इस पर उन्होंने कहा कि जब तक सरकार का प्रस्ताव सामने नहीं आता, तब तक पार्टी कोई टिप्पणी नहीं करेगी. राजनीतिक जानकार इसे DMK के बदले हुए रुख के संकेत के तौर पर देख रहे हैं.

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सरकार-विपक्ष के बीच बैक चैनल बातचीत

सूत्रों के मुताबिक, परिसीमन बिल को लेकर सरकार और DMK के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है. वहीं संसद का गतिरोध खत्म करने के लिए भी सरकार लगातार विपक्ष से संवाद बनाए हुए है.

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इसी कड़ी में संसदीय कार्य मंत्री और राहुल गांधी के बीच करीब 50 मिनट तक बैठक हुई. जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में FCRA और परिसीमन जैसे मुद्दों पर विपक्ष का रुख जानने की कोशिश की गई. हालांकि, फिलहाल किसी सहमति की जानकारी सामने नहीं आई है.

दिलचस्प बात यह रही कि गत 10 दिनों में सरकार की ओर से राहुल गांधी के साथ यह दूसरी अहम बैठक थी. राजनीतिक विश्लेषक इसे संसद का गतिरोध समाप्त कराने और सदन को सुचारु रूप से चलाने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.

क्या कुछ बिल टाल सकती है सरकार?

सूत्रों का कहना है कि सरकार संसद का कामकाज सामान्य करने और परिसीमन बिल लाने के लिए कुछ प्रस्तावित विधेयकों को फिलहाल टालने पर भी विचार कर सकती है. सरकार की प्राथमिकता यही है कि सदन व्यवस्थित ढंग से चले, क्योंकि मौजूदा हालात में लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित हो रही है.

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संसदीय गणित क्या कहता है?

राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो पिछली बार NDA के पास लोकसभा में करीब 294 सांसद थे. इसके बाद TMC से आए करीब 20 सांसद और शिवसेना से जुड़े 6 सांसद सरकार के समर्थन में माने जा रहे हैं. अगर DMK के 22 सांसद भी सरकार का समर्थन करते हैं, तो लोकसभा में सरकार के समर्थन का आंकड़ा लगभग 354 तक पहुंच सकता है. संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत (करीब 360 सांसद) से यह केवल छह कम रहेगा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि DMK साथ आती है तो सरकार के लिए बाकी आवश्यक समर्थन जुटाना मुश्किल नहीं होगा.

फिलहाल सिर्फ संकेत

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकार ने अभी तक परिसीमन बिल पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. ना ही यह बिल संसद की कार्यसूची में शामिल किया गया है. ऐसे में फिलहाल यह पूरी चर्चा राजनीतिक संकेतों, सूत्रों और संसद के गलियारों में चल रही चर्चाओं पर आधारित है. आने वाले दिनों में सरकार का अगला कदम इस पूरे मुद्दे की दिशा तय करेगा.