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No Man’s Land: दो देशों की सीमाओं के बीच क्या होता है ‘नो मैन्स लैंड’, आखिर इस जमीन पर किसका होता है अधिकार?

जीरो लाइन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रहती है. भारत की ओर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पाकिस्तान की ओर पाकिस्तानी रेंजर्स लगातार निगरानी करते हैं. कई संवेदनशील इलाकों में बारूदी सुरंगें, स्पाई गैजेट्स और सैन्य चौकियां मौजूद होती हैं.

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दुनिया में जमीन को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, इतिहास में सीमा विवाद को लेकर कई देशों में भयानक युद्ध हुए. भारत-पाकिस्तान के बीच आज भी सीमा को लेकर विवाद जारी है. पाकिस्तान ने भारत के अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाया हुआ है. भारत अपने कई पड़ोसियों के साथ लंबी सीमा साझा करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दो देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के बीच की जगह को ‘नो मैन्स लैंड’ (No Man’s Land) कहा जाता है. आइए जानते हैं आखिर क्या है ये ‘नो मैन्स लैंड’ और इस जमीन पर किसका होता है अधिकार?

जमीन के टुकड़े पर किसका अधिकार?

दुनिया के कई देश अपने पड़ोसियों के साथ लंबा बॉर्डर शेयर करते हैं और दोनों सीमाओं के बीच छोड़ी गई जमीन को ‘नो मैन्स लैंड’ कहा जाता है. कई बार इसे ‘जीरो लाइन’ भी कहा जाता है, जो भारत-पाकिस्तान के मामले में ज्यादा उपयोग की जाती है. आपको बता दें कि इस जमीन के टुकड़े पर किसी भी देश का अधिकार नहीं होता. एक्सपर्ट्स के अनुसार ‘नो मैन्स लैंड’ का मतलब सिर्फ ऐसा क्षेत्र नहीं होता जिस पर किसी का अधिकार न हो, बल्कि कई बार यह दो देशों के बीच स्थित एक बफर जोन भी हो सकता है.

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किसे कहते हैं ‘जीरो लाइन’?


जीरो लाइन उस वास्तविक सीमा को कहा जाता है, जहां दो देशों की सीमाएं एक-दूसरे के बिल्कुल सामने होती हैं. भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के कई हिस्सों में जीरो लाइन को हाइलाइट किया जाता है, जबकि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के आसपास इसकी स्थिति अधिक संवेदनशील मानी जाती है. यह वह इलाका है जहां दोनों देशों की सुरक्षा चौकियां आमने-सामने मौजूद रहती हैं और सीमा पर हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाती है.

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‘नो मैन्स लैंड’ कहां होती है?


जीरो लाइन के आसपास कई स्थानों पर एक ऐसा क्षेत्र भी होता है जिसे ‘नो मैन्स लैंड’ कहा जाता है. यह वह जगह होती है, जो किसी भी देश के नागरिकों के उपयोग में नहीं रहती और जहां आमतौर पर किसी देश का नियंत्रण नहीं होता. इतना ही नहीं, सुरक्षा कारणों से इस इलाके में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है. कई बार यही क्षेत्र दोनों देशों के बीच तनाव, गोलीबारी और सैन्य गतिविधियों का केंद्र बन जाता है.

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एक गलती बन सकती है जानलेवा


जीरो लाइन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रहती है. भारत की ओर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पाकिस्तान की ओर पाकिस्तानी रेंजर्स लगातार निगरानी करते हैं. कई संवेदनशील इलाकों में बारूदी सुरंगें, स्पाई गैजेट्स और सैन्य चौकियां मौजूद होती हैं. यही कारण है कि इस क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है.

First published on: Jul 18, 2026 02:59 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक

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