लोकसभा में BJP-कांग्रेस के वार-पलटवारों के साथ रात 12 बजे तक वंदे मातरम् पर लोकसभा में चर्चा होती रही.
Parliament Winter Session Day-6 LIVE Updates: सोमवार को संसद के शीतलकालीन सत्र का छठा दिन था. सोमवार को दोनों सदनों में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा हुई. यह चर्चा रात 12 बजे तक चली. लोकसभा में चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने की. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी वंदे मातरम् पर बोलते हुए मोदी सरकार पर खूब निशाना साधा. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस को आडे हाथ लिया.
इसलिए कराई जा रही है चर्चा
बता दें कि वंदे मातरम् पर चर्चा कराने का प्रस्ताव केंद्र सरकार ने दिया था और इसका मकसद देशवासियों को राष्ट्रीय भावना, सांस्कृतिक गौरव और एकता का संदेश देना है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर प्रदेश में BJP के लिए सांस्कृतिक और भावनात्मक माहौल बनाना, 1937 में वंदे मातरम् के टुकड़े करने की कहानी लोगों को बताना, बंगाल विभाजन और स्वतंत्रता आंदोलन की याद दिलाकर देशभक्ति की भावना को मजबूत करना भी BJP का लक्ष्य है.
लोकसभा-राज्यसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा से जुड़े पल-पल के लाइव अपडेट्स के लिए बने रहें News 24 के साथ…
वंदे मातरम् पर संसद में चल रही बहस के बीच भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्त शहजाद पूनावाला ने कहा, "ये कतई ही हैरानी की बात नहीं है. गांधी-नेहरू परिवार के लोग ना वंदे मातरम् बोलना चाहते हैं ना सुना चाहते हैं. उन्हें बोलने और सुनने दोनों में दिक्कत है. उनके परिवार ने ही वंदे मातरम् का विभाजन किया."
#watch | Delhi: BJP's national spokesperson Shehzad Poonawalla said, "It is no surprise that people from the Gandhi-Nehru family do not want to listen to or speak Vande Mataram... Their family divided Vande Mataram... Rahul Gandhi considers himself above the country." pic.twitter.com/meVCl2IxX1
— ANI (@ANI) December 8, 2025
वंदे मातरम् पर चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा, "यह सच स्वीकार करने होगा, वंदे मातरम् के साथ जो न्याय होना चाहिए था, वो न्याय नहीं हुआ. आज आजाद भारत में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को बराबर का दर्जा देने की बात कही गई थी. एक हमारी राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न अंग बन गया, समाज और संस्कृति की मुख्य धारा में जगह पा गया. वह था हमारा राष्ट्रगान. दूसरी ओर हमारे राष्ट्रीय गीत को उपेक्षित किया गया, खंडित किया गया. जिस धरती पर वंदे मातरम् की रचना हुई थी, उसी धरती पर कांग्रेस ने वंदे मातरम् को खंडित करने का फैसला किया. वंदे मातरम् के साथ हुए राजनीतिक छल और अन्याय के बारे में सभी पीढ़ियों को जानना चाहिए. इसलिए ही इस संबंध में चर्चा हो रही है. क्योंकि अन्याय केवल एक गीत के साथ नहीं था, बल्कि आजाद भारत के लोगों के साथ था. उन लोगों के साथ हुआ, जिनकी सांसों में आजादी की हवा और वंदे मातरम् की पुकार में भरी थी. उस पुकार को सीमाओं में बांधने की कोशिश इतिहास का बहुत बड़ा छल था. इसलिए हम ये मानते हैं कि वंदे मातरम् का गौरव लौटाना समय की मांग है और नैतिकता का तकाजा भी है. इस अन्याय के बावजूद वंदे मातरम् का महत्व किसी भी सूरत में भी कम नहीं हो पाया."
#watch | During debate in Lok Sabha on 150 years of 'Vande Mataram, Defence Minister Rajnath Singh says, "Today, as we celebrate the glorious journey of Vande Mataram for a century and a half, we must accept the truth that Vande Mataram did not receive the justice it deserved.… pic.twitter.com/nPzlacJSn4
— ANI (@ANI) December 8, 2025
वंदे मातरम् पर चर्चा पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा, "हम सभी जानते हैं, कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भारत के राष्ट्र गीत के तौर पर इस साल मना रहे हैं. इस पर हमारे पीएम मोदी ने तथ्यों के साथ शानदार भाषण दिया है. यह वंदे मातरम् भारत के इतिहास, वर्तमान और भविष्य के साथ जुड़ा हुआ है. इसने ब्रिटिश साम्राज्य से लड़ने में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को काफी ताकत दी थी. वंदे मातरम् वो गीत है, जिसकी वजह से सदियों से सोया हुआ हमारा भारत जाग उठा था. वह गीत आधी शताब्दी स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक बना रहा. वही गीत इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटिश संसद तक पहुंच गया था. ऐसा था हमारा वंदे मातरम्. वंदे मातरम् जैसे अमर गीत के रचियता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने कहा था कि एक दिन ऐसा आएगा, जब सभी देशवासी वंदे मातरम् के महत्व को समझेंगे. वह समय आया 1905 में. बंगाल विभाजन के खिलाफ हुए आंदोलन के वक्त. इस आंदोलन के समय धरती से आकाश तक गूंज उठा था. इसी आंदोलन के दौरान, यह वंदे मातरम् जन मानस के दिल में बस गया था. इससे ब्रिटिश सरकार इतनी डर गई थी कि वंदे मातरम् का नारा लगाने के खिलाफ एक सर्कुलर भी जारी कर दिया गया था. लेकिन फिर भी वे जनता को रोक नहीं पाए थे. इसने लोगों के अंदर एक नई चेतना भी पैदा कर दी थी. राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के लिए उस समय वंदे मातरम् संप्रदाय की भी स्थापना की गई थी. इसके लिए वंदे मातरम् कहते हुए रोजाना प्रभात फेरी भी निकाला करते थे."
#watch | During debate in Lok Sabha on 150 years of 'Vande Mataram, Defence Minister Rajnath Singh says, "Vande Mataram is connected to India’s history, present, and future. Vande Mataram gave immense strength to our freedom fighters in their struggle against British colonial… pic.twitter.com/iqQbpJMjKg
— ANI (@ANI) December 8, 2025
जितने साल नरेंद्र मोदी को पीएम के पद पर हो गए, करीब करीब उतने ही वर्षों नेहरू जेल में रहे थे. इस देश की आजादी के लिए. उसके बाद 17 साल के लिए पीएम रहे. आपको नेहरू से जितनी भी शिकायतें है या उन्हें जिनती गालियां देनी हैं, उसकी एक लिस्ट बना लीजिए. फिर हम एक समय तय करते हैं और उस पर बहस करेंगे. लेकिन उसके बाद यह मुद्दा खत्म हो जाना चाहिए. फिर हमें जनता के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करनी होगी.
#watch | During debate in Lok Sabha on 150 years of 'Vande Mataram, Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, "Our Prime Minister has been in the House for twelve years, I have been here for only twelve months. Still, I have a small advice, a few months ago he had released a list… pic.twitter.com/LsUGCIl15a
— ANI (@ANI) December 8, 2025
लोकसभा में भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, "इनका शासन दमन का शासन है, इनकी राजनीति दिखावे और इवेंट मैनेजमेंट की है. इनकी राजनीति चुनाव से चुनाव तक और ध्यान भटकाने की है. आज भी जब सीमा पर जवान दुश्मन का सामना करता है, तो उसकी छाती में वंदे मातरम् गूंजता है. हमारे खिलाड़ी इंटरनेशनल गेम में जाता है तो उसके दिल में वंदे मातरम् होता है. जब हमारे लोग राष्ट्रीय ध्वज को देखते हैं तो उनकी जुबान पर वंदे मातरम होता है. 1905 से लेकर आज तक कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम् गाया जाता रहा है. आप ये बताइए क्या आपके अधिवेशन में वंदे मातरम् गाया जाता है या नहीं? हमारा राष्ट्र गीत हमेशा हमारे लिए प्यारा था और है. यह हमारे लिए हमेशा पवित्र रहा है और रहेगा."
लोकसभा में कांग्रेस सांसद ने कहा कि बंगाल चुनाव आ रहा है, इसलिए आज वंदे मातरम् पर बहस हो रही है. ध्यान भटकाने के लिए वंदे मातरम् पर बहस हो रही है. हम भाजपा की विचारधारा से लड़ते रहेंगे.
लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी की स्पीच पर BJP सांसद संजय जायसवाल ने कहा,"पीएम मोदी ने वंदे मातरम और उसको लेकर इतिहास में जो घटनाएं घटी और देश की आजादी में जिनका योगदान रहा, उन सभी को श्रद्धांजलि व्यक्त की है. इतने अच्छे से अपनी बातों को रखा और राष्ट्र के सभी नायकों को उन्होंने जिस तरह से श्रद्धांजलि दी, संसद के इतिहास में उनका ये भाषण हमेशा याद रखा जाएगा. यह तो सब जानते हैं कि वंदे मातरम के बाकी छंदों को हटाने का काम नेहरू ने किया था. वंदे मातरम हमारे आजादी के दिवानों की पहचान था. वंदे मातरम के बाकी छंदों को हटाना सरासर गलत था. मुझे नहीं लगता कि ये आज जानकारी आई है. यह तो पहले से ही सबको पता है."
#watch | On PM Modi's speech in Lok Sabha during debate on Vande Mataram, BJP MP Sanjay Jaiswal says, "...The PM mentioned only facts and did not make even a single political statement..." pic.twitter.com/zUbHC4Vr2p
— ANI (@ANI) December 8, 2025
लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी की स्पीच पर BJP सांसद बृज लाल ने कहा, "पीएम मोदी ने बिल्कुल सच कहा है. 1925 में कांग्रेस कमेटी की बैठक थी. उस समय वहां वंदे मातरम गीत गाया गया. तो उस वक्त कांग्रेस के अध्यक्ष मोहम्मद अली थे, उन्होंने एतराज किया. जब वह बंद नहीं हुआ तो वह बैठक छोड़कर चले गए. जवाहर लाल नेहरू ने तुष्टिकरण नीति के तहत उस पर कमेटी बनाई. इसके बाद वंदे मातरम का बंटवारा कर दिया गया. नेहरू की वजह से देश का भी बंटवारा हो गया. आज पीएम मोदी ने जो कहा है, अगर वो नेहरू के बारे में नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे. देश के पहले पीएम अगर नेहरू की जगह सरदार पटेल होते, तो आज देश का नक्शा कुछ और होता."
#watch | On PM Modi's speech in Lok Sabha during debate on Vande Mataram, BJP MP Brij Lal says,"...What the PM said today is absolutely right. They (Opposition) start having problems after hearing the truth." pic.twitter.com/EHk3031A9f
— ANI (@ANI) December 8, 2025
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, "क्या 150 साल बाद वंदे मातरम पर बहस की जरूरत थी? देश को आजाद हुए 75 साल हो गए; न तो उन्होंने और न ही जनसंघ ने तब कभी यह मुद्दा उठाया था. भाजपा रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान करने की कोशिश कर रही है. वे जवाहरलाल नेहरू को तो हमेशा कोसते रहते हैं, लेकिन अब उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर का भी अपमान करना शुरू कर दिया है..."
#watch | Delhi: Congress MP Rajeev Shukla says, "Was there a need for a debate on Vande Mataram after 150 years? The country has been independent for 75 years; neither they nor the Jan Sangh ever raised this issue back then. The BJP is trying to insult Rabindranath Tagore. They… pic.twitter.com/0bhes1XHd5
— ANI (@ANI) December 8, 2025
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने कहा, "... सच यह है कि वंदे मातरम के कुछ छंदों को कलकत्ता में नेहरू के कांग्रेस प्रस्ताव में बदल दिया गया था. यह सच है. आप सच्चाई से दूर नहीं भाग सकते. नेहरू ने हिंदुस्तान, भारत और इंडिया के हितों से समझौता किया. इसीलिए विभाजन केवल वंदे मातरम में ही नहीं, बल्कि देश का भी हुआ. यह विभाजन जारी रहा, और इसीलिए हम देख सकते हैं कि आज कांग्रेस में इतना अधिक विभाजन हैं. यही वजह है कि वे इसकी कीमत चुका रहे हैं..."
#watch | Delhi: Former Karnataka CM and BJP MP Basavaraj Bommai says, "...The truth is that some stanzas of Vande Mataram were changed in Nehru's Congress resolution in Calcutta. So this is a fact. You cannot run away from the truth. Nehru compromised the interests of Hindustan,… pic.twitter.com/EaVFNRPczs
— ANI (@ANI) December 8, 2025
लोकसभा में विपक्ष के उपनेता कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने प्रधामनंत्री मोदी के भाषण पर सवाल उठाए और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की बातों को सुनकर लगता है, जैसे उन्होंने ही वंदे मातरम् को बनाया है. उनके राजनीतिक पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी हो. उनकी बातों से ऐसा लगा, जैसे उनकी मंशा फिर से इतिहास लिखने की हो.
किसी चर्चा को राजनीतिक रंग देना भी प्रधानमंत्री मोदी को बखूबी आता है. वे जब भी कोई चर्चा करते हैं तो जिसके बारे में करते हैं, उसका नाम कई बार लेते हैं. जैसे आज पंडित नेहरू का नाम 14 बार लिया. ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में 50 बार कांग्रेस कहा. साल 2022 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए 15 बार नेहरू का नाम लिया. साल 2020 में 20 बार लिया था, चाहे जितनी कोशिश कर लें, देश निर्माण में उनके योगदान पर काला दाग नहीं लगा पाएंगे.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी की स्पीच पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू पर तुष्टिकरण के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन क्या प्रधानमंत्री इन सवालों का जवाब देंगे?
1. वह कौन-से भारतीय नेता थे जिन्होंने 1940 के दशक की शुरुआत में बंगाल में उस व्यक्ति के साथ गठबंधन सरकार बनाई थी, जिसने मार्च 1940 में लाहौर में पाकिस्तान प्रस्ताव पेश किया था?
2. वह कौन-से भारतीय नेता थे जिन्होंने जून 2005 में कराची में जिन्ना की खुलकर तारीफ की थी?
3. वह कौन-से भारतीय नेता थे जिन्होंने अपनी 2009 में प्रकाशित पुस्तक में जिन्ना की प्रशंसा की थी?
पहले सवाल का जवाब श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दूसरे का लाल कृष्ण आडवाणी और तीसरे का जसवंत सिंह है.
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के इंडिगो एयरलाइन क्राइसिस पर पूछे गए सवाल के जवाब से संतुष्ट न होते हुए विपक्षी दलों ने राज्यसभा से वर्कआउट किया. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फ्लाइटों का कैंसिल होना एयरलाइन की ऑपरेशनल गलती थी. एयरलाइन रोस्टर मैनेज नहीं कर पाई एयरलाइन के संपर्क में हैं और गलती के लिए स्पष्टीकारण मांगा गया है. मामले की जांच के आदेश दिए हैं. एयरलाइन को नियमों का पालन करना ही होगा.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में किया बारीसाल का जिक्र और कहा कि आज बारीसाल भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिनं बंगाल विभाजन के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला यही भड़की थी. बारीसाल की महिलाओं और बच्चों पर वंदे मातरम् का नारा लगाने पर जुल्म ढहाए गए, जबकि वे अपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने के लिए उतरे थे.
बारीसाल की वीरांगना शांति घोष का नाम इतिहास दर्ज है. उन्होंने विभाजन और वंदे मातरम् पर प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा था कि जब तक वंदे मातरम् पर लगा प्रतिबंध नहीं हटता, तब तक सुहाग की चूड़ियां नहीं पहनूंगी और उन्होंने चूड़ियां निकाल दी थीं, जबकि तब सुहाग के रहते चूड़ियां निकालना बहुत बड़ी बात होती थी.
1905 में हरितपुर के गांव में वंदे मातरम् का नारा लगा रहे अंग्रेजों ने कोड़े बरसाए गए थे. 1906 में नागपुर में नील सीटी स्कूल के बच्चों पर अत्याचार किए गए थे.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् के टुकड़े कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति और इसके दबाव का परिणाम था. इसी राजनीति के कारण कांग्रेस को भारत का बंटवारा करने के लिए भी झुकना पड़ा. दुर्भाग्य से कांग्रेस की नीतियां भी वैसी ही हैं, जैसी नेहरू के राज में थी. आजादी के बाद INC उसी राह पर चलते-चलते MNC बन गया है. इंडियन नेशनल कांग्रेस से मल्टी नेशनल कंपनी बन गया है. जिस-जिस के नाम के साथ कांग्रेस जुड़ा, उसने वंदे मातरम् का विरोध किया, जबकि आज भी 15 अगस्त और 26 जनवरी को वंदे मातरम् का नार हर जगह गूंजता है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से 15 अक्टूबर 1936 को वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया, जिससे जवाहरलाल नेहरू का सिंहासन डोल गया. उन्होंने मुस्लिम लीग का विरोध करने की बजाय वंदे मातरम् की ही पड़ताल शुरू कर दी. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के शब्द मुस्लिमों की भावना को ठेस पहुंचा सकते हैं, वे भड़केंगे और तनाव बढ़ेगा, इसलिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में वंदे मातरम् की समीक्षा की गई. जिसके बाद कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने सिर झुका दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् के टुकड़े क्यों किए गए? वंदे मातरम् के विरोधियों को जवाब क्यों नहीं दिया गया? जवाहरलाल नेहरु को मुस्लिम लीग को जवाब देना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस ने विरोध के आगे घुटने टेक दिए. इसी विरोध के चलते कांग्रेस को विभाजन के लिए मजबूर होना पड़ा. कांग्रेस की वजह से वंदे मातरम् के टुकड़े हुए, किए गए और होने दिए गए. जवाहरलाल नेहरू ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई और उनकी चुप्पी के कारण वंदे मातरम् के टुकड़े हुए. वे चाहते तो विरोध कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने पूरी कांग्रेस को चुप रहने को कहा.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीयों ने वंदे मातरम् को आवाज बनाकर अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ी. वंदे मातरम् का जन-जन से जुड़ाव था, यह मंत्र देश के स्वतंत्रता संग्राम की लंबी गाथा है. वंदे मातरम् ही अंग्रेजों के अत्याचारों का जवाब था. जब वंदे मातरम् लहर बनने लगा, तो अंग्रेजों को अपनी जड़ें उखड़ती नजर आईं. तब उन्होंने सोचा कि भारत को बांटकर, टुकड़े करके ही इस पर राज किया जा सकेगा. इसके लिए उन्होंने बंगाल को मोहरा बनाया. 1905 में बंगाल का विभाजन किया तो बंगाल की गली-गली में बच्चे-बच्चे की जुबान से वंदे मातरम् का शंखनाद हुआ. जिसे सुनकर अंग्रेज घबरागए और उन्होंने वंदे मातरम् पर बैन लगा दिया. अखबारों का नाम वंदे मातरम् रखा गया तो अंग्रेजों ने अखबार को भी बैन कर दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब बंकिम दा ने वंदे मातरम् लिखा और प्रकाशित करके जन-जन तक पहुंचाया, तभी वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बन गया था. अंग्रेज भारत को कमजोर करने पर तुले थे. कुछ भारतीय भी अंग्रेजों के डर से उनकी भाषा बोलने लगे थे, देश को निकम्मा ओर आलसी साबित करने पर तुले थे, जब वंदे मातरम् ने उन भारतीयों में देशभक्ति की ज्वाला भड़काई थी. आजादी के लिए लड़ने वालों का संकल्प बन गया था वंदे मातरम्, इसलिए अंग्रेजों को वंदे मातरम् की गूंज से अपने जड़ें हिलती दिखीं तो उन्होंने इस पर बैन लगा दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ राजनीतिक लड़ाई, आजादी की लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि वंदे मातरम् अंग्रेजों के खिलाफ चट्टान की तरह खड़ा था. वंदे मातरम् ने अपनी मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने की पवित्र जंग बेटा बनकर लड़ी. वेद काल में भी कहा गया है कि धरती भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं. वंदे मातरम् ने भी बेटे का फर्ज निभाया.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज यहां कोई पक्ष-विपक्ष नहीं है, मैं यहां वंदे मातरम् की 150 साल की यात्रा पर चर्चा करने आया हूं. आज पूरे देश के लिए भारत माता की वंदना के प्रतीक वंदे मातरम् का रण स्वीकार करने का मौका है. सदन को, पूरे देश को इस मौके को जाने नहीं देना चाहिए. भारतीय संस्कृति, परंपराएं और विरासत सदियों पुरानी है, लेकिन अंग्रेजों ने गुलामी की जजीरों में जकड़कर भारत को सोने की चिड़िया से बंधक बना दिया, लेकिन अब भारत 2047 में विकसित भारत बनकर रहेगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् की 150 साल की यात्रा कई पड़ावों से गुजरी. जब वंदे मातरम् 50 साल का हुआ तो देश गुलामी की जंजीरों में बंधा था. 100 साल का हुआ, तब भारत में आपताकाल लगा था. जब वंदे मातरम् 100 साल का हुआ, तब संविधान का गला घोंटा गया. जब वंदे मातरम् 100 साल का हुआ तो कालाखंड उजागर हुआ. जंग-ए-आजादी में वंदे मातरम् देशभक्ति का प्रतीक था, विरोध करने का सबसे मजबूत मंत्र था और अंग्रेजों के खिलाफ भावनात्मक नेतृत्व था. इस मंत्र ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी थी, प्रेरणा दी थी. स्वतंत्रता सेनानियों को त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था.
लोकसभा में वंदे मातरम् पर प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन शुरू हो गया है. उन्होंने सदन में उपस्थित लोगों को वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने की बधाई दी. उन्होंने कहा कि भारत आजादी के 75 वर्ष पूरे होने का साक्षी बना है. गुरु तेग बहादुर का 350वीं बलिदान दिवस मना रहा है. सरदार पटेल और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती भी मना रहा है. उन्होंने कहा कि गर्व की बात है कि देशवासी वंदे मातरम् के 150 पूरे होने के एतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं.
लोकसभा में कांग्रेस ने इंडिगो एयरलाइन को लेकर गहराए संकट का मुद्दा उठाया. सांसद गौरव गोगोई ने सवाल पूछा, जिसके जवाब में स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि अभी मंत्री महोदय राज्यसभा में हैं.
संसद के शीतकालीन सत्र की छठे दिन कार्यवाही शुरू हो चुकी और प्रश्नकाल जारी है. 12 बजे प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा की शुरुआत करेंगे, वहीं राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह चर्चा की शुरुआत करेंगे. BJP के बाद कांग्रेस की ओर से चर्चा का जवाब देते हुए अपनी बात मुद्दे पर रखी जाएगी, वहीं इस मामले में हंगामे के आसार भी हैं.










